क्या अयोध्या का संत-समाज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खड़ा हुआ है?

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क्या अयोध्या का संत-समाज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खड़ा हुआ है?

सारांश

अयोध्या के संत-समाज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में आवाज उठाई है। विवाद बढ़ते ही मुख्यमंत्री योगी से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। क्या यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है?

Key Takeaways

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का माघ मेले में विवाद हुआ है।
  • संत-समाज ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है।
  • मुख्यमंत्री योगी से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
  • यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा माना जा रहा है।
  • संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार को निंदनीय बताया गया है।

अयोध्या, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रयागराज में 3 जनवरी से आरंभ हुए माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच हुआ टकराव अब एक गंभीर विवाद बन चुका है।

राजनीतिक हस्तियों से लेकर साधु-संत तक इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। इस बीच, अयोध्या का संत-समाज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के आचार्य अमित दास महाराज ने कहा, "यह पूरी तरह गलत था। एक संत के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। वे साधारण संत नहीं, बल्कि जगद्गुरु शंकराचार्य हैं। प्रशासन का यह कदम गलत है और मुख्यमंत्री को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।"

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने बटुक-ब्राह्मणों के साथ उनके शिखा को पकड़कर अपमानित किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है। हमारे सनातन धर्म में ब्राह्मणों की शिखा उनकी धरोहर होती है, और इसका अपमान सहन नहीं किया जा सकता।

अयोध्या धाम स्थित सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के देवेशचार्य महाराज ने कहा, "माघ मेला सभी सनातन धर्म अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण पर्व है, और इस दौरान संतों के साथ ऐसा व्यवहार करना निंदनीय है।"

उन्होंने आगे कहा कि मेला प्रशासन का यह हक नहीं बनता कि वे शंकराचार्य से उनकी शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगें। यह सब साजिश के तहत हो रहा है, जिससे सरकार की छवि भी खराब हो रही है।

अयोध्या धाम के महंत परमहंस समाधि स्थल के आचार्य नारायण मिश्रा ने कहा, "माघ मेले के दौरान सभी धार्मिक नेताओं को पवित्र स्नान का अधिकार है। मुझे विश्वास है कि सीएम योगी ने संतों के लिए सुविधाएं प्रदान की हैं, लेकिन कुछ लोग सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि अयोध्या के संत-समाज की प्रतिक्रिया एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक मुद्दे को दर्शाती है। हमें हमेशा राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखना चाहिए। संत-समाज का समर्थन एक संकेत है कि धार्मिक मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
NationPress
23/01/2026

Frequently Asked Questions

माघ मेला क्या है?
माघ मेला हर साल प्रयागराज में आयोजित होता है, जो सनातन धर्म के अनुयायियों का एक प्रमुख पर्व है।
शंकराचार्य का महत्व क्या है?
शंकराचार्य भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण धार्मिक नेता हैं, जो वेदांत दर्शन के प्रवर्तक माने जाते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस विवाद में क्या रोल है?
मुख्यमंत्री ने संत-समाज से निष्पक्ष जांच की मांग को गंभीरता से लिया है और मामले पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है।
क्यों संत-समाज ने शंकराचार्य का समर्थन किया?
संत-समाज का मानना है कि शंकराचार्य के प्रति अपमानजनक व्यवहार निंदनीय है और इससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।
क्या इस घटनाक्रम से सरकार की छवि प्रभावित हुई है?
हाँ, इस विवाद ने सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाया है और इसे राजनीतिक साजिश के रूप में देखा जा रहा है।
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