बद्रीनाथ धाम में 18.67 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 2023 का रिकॉर्ड टूटा; 20 लाख का लक्ष्य करीब
सारांश
मुख्य बातें
बद्रीनाथ धाम ने इस तीर्थयात्रा सीज़न में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है — 5 अक्टूबर 2026 तक 18.67 लाख से अधिक श्रद्धालु उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित इस पवित्र धाम में भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर चुके हैं। इस संख्या ने 2023 में बने 18.39 लाख तीर्थयात्रियों के पिछले रिकॉर्ड को पार कर लिया है, और वह भी अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही।
रिकॉर्ड कैसे टूटा
तीर्थयात्रियों की यह संख्या अक्टूबर 2026 के पहले हफ्ते में ही 2023 के 18.39 लाख के आँकड़े को पार कर गई। रविवार को अकेले 14,000 से अधिक भक्त बद्रीनाथ धाम पहुँचे और भगवान बद्री विशाल की पूजा-अर्चना की। गौरतलब है कि मानसून के बाद चार धाम यात्रा के दूसरे चरण में तीर्थयात्रियों की आवाजाही में तेज़ी आई है, जिसने इस रिकॉर्ड को और तेज़ी से हासिल करने में मदद की।
20 लाख का अनुमान
मौजूदा रफ्तार को देखते हुए अधिकारियों का अनुमान है कि इस सीज़न में 20 लाख से अधिक श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुँच सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चार धाम यात्रा के प्रति देशभर में आस्था और पर्यटन दोनों दृष्टिकोण से रुचि लगातार बढ़ रही है। यह लगातार कई वर्षों में तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि का सिलसिला है।
यातायात और प्रशासनिक चुनौतियाँ
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के कारण बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है। कर्णप्रयाग और बद्रीनाथ के बीच गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे मंदिर की ओर जाने वाले भक्तों को असुविधा हो रही है। अधिकारी स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं और यातायात प्रबंधन के उपाय किए जा रहे हैं।
सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
तीर्थयात्रा मार्ग पर भक्तों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों — जो चार धाम यात्रा के प्रमुख मार्गीय जिले हैं — में आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट पर रखा गया है। यात्रा प्रशासन के अनुसार, तीर्थयात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी की गई है।
आगे क्या
चार धाम यात्रा सीज़न अभी जारी है और आने वाले हफ्तों में भी श्रद्धालुओं की आमद अपेक्षित है। यदि यह रफ्तार बनी रही तो बद्रीनाथ धाम जल्द ही 20 लाख तीर्थयात्रियों का आँकड़ा पार कर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर सकता है। प्रशासन तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के अनुरूप अपनी व्यवस्था को और सुदृढ़ करने में लगा है।