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चारधाम यात्रा 2025: 53 लाख से अधिक श्रद्धालु, बद्रीनाथ-गंगोत्री में टूटे पुराने रिकॉर्ड

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चारधाम यात्रा 2025: 53 लाख से अधिक श्रद्धालु, बद्रीनाथ-गंगोत्री में टूटे पुराने रिकॉर्ड

सारांश

चारधाम यात्रा 2025 ने 28 सितंबर तक 53 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के साथ नया इतिहास रच दिया — पिछले वर्ष की तुलना में 15% से अधिक की बढ़त। बद्रीनाथ और गंगोत्री में पुराने रिकॉर्ड टूटे। यात्रा में अभी डेढ़ महीना शेष है, और कुल संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

28 सितंबर 2025 तक चारधाम यात्रा में 53 लाख 23 हजार 401 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या लगभग 46 लाख थी — इस वर्ष 15% से अधिक की वृद्धि।
बद्रीनाथ धाम में 18.10 लाख और गंगोत्री धाम में पहली बार 8.41 लाख श्रद्धालु — दोनों में नए रिकॉर्ड।
केदारनाथ में 15.57 लाख और यमुनोत्री में 7.5 लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुँचे।
श्री हेमकुंट साहिब में 3 लाख 52 हजार 765 श्रद्धालु — कई वर्षों में सर्वाधिक।
यात्रा में अभी डेढ़ महीना शेष; रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी में आपदा प्रबंधन विभाग 24 घंटे अलर्ट पर।

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2025 ने इतिहास रच दिया है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 28 सितंबर 2025 तक मौजूदा यात्रा सीजन में 53 लाख 23 हजार 401 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं — जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या लगभग 46 लाख थी। यह वृद्धि करीब 15 प्रतिशत से अधिक की है, जो इस यात्रा के इतिहास में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।

धामवार श्रद्धालु संख्या

बद्रीनाथ धाम में अब तक 18.10 लाख तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं, जो इस धाम के लिए एक नया कीर्तिमान है। गंगोत्री धाम में पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या 8.41 लाख के पार पहुँची है, जो पूर्व के सभी रिकॉर्ड तोड़ती है। केदारनाथ धाम में 15.57 लाख और यमुनोत्री धाम में 7.5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुँच चुके हैं।

इसके अतिरिक्त, श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा में भी असाधारण उत्साह देखा गया है। यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या 3 लाख 52 हजार 765 तक पहुँच चुकी है, जो बीते कई वर्षों की तुलना में अधिक बताई गई है।

यात्रा में अभी डेढ़ महीना शेष

राज्य सरकार के अनुसार, यात्रा सीजन में अभी करीब डेढ़ महीने का समय शेष है। ऐसे में विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का अनुमान है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की कुल संख्या पिछले सभी वर्षों के मुकाबले काफी अधिक हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने की दिशा में कई कदम उठा रही है।

सुरक्षा और आपदा प्रबंधन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में चारधाम यात्रा को सतर्कता और निरंतर निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा, 'श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यात्रा को सुरक्षित, सुगम तथा व्यवस्थित बनाने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।'

यात्रा मार्ग से जुड़े रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में आपदा प्रबंधन विभाग को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। राज्य और जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी यात्रा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।

आम जनता और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

गौरतलब है कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है — यह उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में लाखों स्थानीय लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत भी है। होटल, परिवहन, पुरोहित, खच्चर मालिक और छोटे व्यापारी — सभी के लिए यह सीजन वर्ष का सबसे महत्त्वपूर्ण समय होता है। रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से इन तबकों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

आगे क्या

यात्रा के शेष डेढ़ महीने में श्रद्धालुओं की आमद और बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आपात स्थितियों से निपटने के लिए संबंधित जिलों में आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। यदि यह गति बनी रही, तो इस वर्ष चारधाम यात्रा का कुल आँकड़ा पिछले सभी रिकॉर्ड को बड़े अंतर से पीछे छोड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ एक ज़रूरी सवाल भी उठता है — क्या बुनियादी ढाँचा इस बढ़ती भीड़ के अनुरूप विकसित हो रहा है? पिछले वर्षों में केदारनाथ और यमुनोत्री मार्ग पर भूस्खलन और भीड़ प्रबंधन की विफलताओं ने श्रद्धालुओं की जान जोखिम में डाली है। रिकॉर्ड संख्या की घोषणाएँ तब तक अधूरी हैं जब तक उनके साथ सुरक्षा घटनाओं, चिकित्सा आपात स्थितियों और मार्ग क्षमता का पारदर्शी डेटा न हो। धार्मिक पर्यटन को आर्थिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना स्वाभाविक है, परंतु मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि इस भीड़ का बोझ स्थानीय पर्यावरण और पहाड़ी पारिस्थितिकी पर क्या पड़ रहा है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चारधाम यात्रा 2025 में अब तक कितने श्रद्धालु पहुँचे हैं?
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 28 सितंबर 2025 तक चारधाम यात्रा में कुल 53 लाख 23 हजार 401 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या लगभग 46 लाख थी, यानी इस वर्ष 15% से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है।
बद्रीनाथ और गंगोत्री में कौन-से रिकॉर्ड टूटे हैं?
बद्रीनाथ धाम में इस सीजन 18.10 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो इस धाम का नया कीर्तिमान है। गंगोत्री धाम में पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या 8.41 लाख के पार पहुँची है, जो पूर्व के सभी रिकॉर्ड से अधिक है।
चारधाम यात्रा 2025 में अभी कितना समय बाकी है?
राज्य सरकार के अनुसार यात्रा सीजन में अभी करीब डेढ़ महीने का समय शेष है। इसे देखते हुए अनुमान है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की कुल संख्या पिछले सभी वर्षों के मुकाबले काफी अधिक हो सकती है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में आपदा प्रबंधन विभाग को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। राज्य और जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी यात्रा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।
हेमकुंट साहिब यात्रा का इस वर्ष क्या हाल है?
श्री हेमकुंट साहिब में इस सीजन 3 लाख 52 हजार 765 श्रद्धालु पहुँच चुके हैं, जो बीते कई वर्षों की तुलना में अधिक बताई गई है। यहाँ भी श्रद्धालुओं में असाधारण उत्साह देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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