चारधाम यात्रा 2025: 114 दिनों में 47 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, पिछले साल से 4.68 लाख अधिक
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2025 ने मानसून की बाधाओं को पार करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 10 अगस्त 2025 तक मात्र 114 दिनों में 47,02,703 श्रद्धालुओं ने चार पवित्र धामों के दर्शन किए — जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4,68,556 अधिक है। यह आँकड़ा इस यात्रा सीज़न को अब तक के सबसे सफल सीज़न में से एक बनाता है।
धाम-वार श्रद्धालुओं की संख्या
चारों धामों में बद्रीनाथ सबसे आगे रहा, जहाँ अब तक 16,12,112 श्रद्धालु पहुँचे। इसके बाद केदारनाथ में 14,50,116, गंगोत्री में 7,37,629 और यमुनोत्री में 6,62,347 तीर्थयात्री आए। इसके अतिरिक्त, 2,40,499 श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब में भी मत्था टेका। गौरतलब है कि 23 अप्रैल को बद्रीनाथ यात्रा के आरंभ के बाद से अब तक पिछले वर्ष की तुलना में 3,50,192 अधिक श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन कर चुके हैं।
मानसून के बीच भी जारी रही यात्रा
यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल 2025 को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ हुई थी। सक्रिय मानसून और प्रशासनिक चेतावनियों के बावजूद केवल सोमवार को ही 15,376 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए। उस दिन बद्रीनाथ में 9,559, केदारनाथ में 4,170, गंगोत्री में 1,204 और यमुनोत्री में 443 श्रद्धालु पहुँचे। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड के कई मार्गों पर भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और सुरक्षा इंतज़ाम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, 'सक्रिय मानसून को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग 24 घंटे अलर्ट पर है। जिलाधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। तीर्थयात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें।' धामी स्वयं राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष के माध्यम से स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।
आम जनता पर असर और व्यवस्थाएँ
राज्य सरकार मौसम की प्रतिकूल स्थिति में यात्रा को अस्थायी रूप से रोककर श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित कर रही है। भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और पूरे मार्ग पर रहने, खाने और चिकित्सा सुविधाओं के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष नए शिखर छू रही है।
क्या होगा आगे
चारधाम यात्रा का सीज़न अक्टूबर-नवंबर तक जारी रहता है, जब कपाट शीतकाल के लिए बंद होते हैं। आँकड़ों की इस रफ़्तार को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष का कुल आँकड़ा पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है — बशर्ते मानसून से जुड़ी बाधाएँ सीमित रहें।