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क्या कटे हुए बाल और नाखून स्वास्थ्य को सुधारते हैं? जानें आयुर्वेद से!

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क्या कटे हुए बाल और नाखून स्वास्थ्य को सुधारते हैं? जानें आयुर्वेद से!

सारांश

आयुर्वेद केवल बीमारी का उपचार नहीं करता, बल्कि जीवनशैली को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। जानें कि कैसे नियमित रूप से बाल और नाखून काटने से आपके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

मुख्य बातें

बाल और नाखून काटना स्वच्छता का हिस्सा है।
यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
स्वच्छता से ऊर्जा बढ़ती है।
लंबे नाखूनों में सूक्ष्मजीवों का जमाव होता है।
मूंछों की देखभाल भी आवश्यक है।

नई दिल्ली, 16 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। आयुर्वेद केवल बीमारियों के इलाज का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह जीवनशैली को संतुलित और स्वस्थ बनाने का मार्गदर्शन भी करता है। हमारे दैनिक जीवन में छोटी-छोटी आदतें, जैसे कि समय-समय पर बाल और नाखून काटना, शरीर और मन दोनों पर गहरा प्रभाव डालती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, जब सिर के बाल, मूंछ या नाखून लंबे हो जाते हैं, तो शरीर पर अतिरिक्त भार महसूस होता है। यह भार मानसिक और शारीरिक हलचल पर असर डालता है। बाल और नाखून काटने से शरीर हल्का महसूस करता है, जिससे काम करने में ऊर्जा और एकाग्रता बढ़ती है।

स्वच्छता को आयुर्वेद में 'आचार' का हिस्सा माना गया है। लंबे नाखून और बिना संवारे बालों में धूल, गंदगी और पसीना आसानी से जमा हो जाता है। यह वातावरण बैक्टीरिया और फंगस के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे संक्रमण और त्वचा रोगों का खतरा बढ़ जाता है। नियमित रूप से बाल और नाखून काटने से इन जीवाणुओं का जमाव रुकता है और शरीर शुद्ध एवं स्वस्थ बना रहता है।

लंबे नाखूनों के किनारों में अक्सर अदृश्य सूक्ष्मजीव पनप जाते हैं। ये जीवाणु भोजन बनाते समय या चेहरे को छूते समय शरीर के भीतर प्रवेश कर सकते हैं।

आयुर्वेद में इसे रोग का प्रवेश द्वार माना गया है। नाखून छोटे और स्वच्छ रखने से संक्रमण की संभावना काफी कम हो जाती है। इसी प्रकार मूंछों की नियमित देखभाल न केवल चेहरे की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि होंठ और नाक के आसपास स्वच्छता भी बनाए रखती है।

आयुर्वेद मन और शरीर के संतुलन पर जोर देता है। स्वच्छ और संतुलित रूप-रंग व्यक्ति को आत्मविश्वास देता है और सामाजिक जीवन को भी सकारात्मक बनाता है। मूंछें भारतीय संस्कृति में शौर्य और सम्मान का प्रतीक रही हैं, लेकिन इनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। बिना संवारे बाल या नाखून जहां शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, वहीं यह सामाजिक दृष्टि से भी अस्वच्छता का संकेत माने जाते हैं।

बाल और नाखून काटना केवल सुंदर दिखने के लिए नहीं है, बल्कि यह शरीर की स्वच्छता, स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन बनाए रखने का एक अनिवार्य नियम है। आयुर्वेद मानता है कि जब व्यक्ति शरीर को स्वच्छ रखता है, तो उसकी आभा और ऊर्जा दोनों बढ़ जाती हैं। यह आभा जीवनशक्ति (ओजस) को मजबूत करती है और दीर्घायु का आधार बनती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आयुर्वेद का यह सिद्धांत हमारे जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल व्यक्तिगत स्वच्छता, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नियमित बाल और नाखून काटने से स्वास्थ्य में सुधार होता है?
जी हां, नियमित रूप से बाल और नाखून काटने से शरीर हल्का महसूस करता है और यह मानसिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
आयुर्वेद में स्वच्छता का क्या महत्व है?
आयुर्वेद में स्वच्छता को 'आचार' का हिस्सा माना गया है, जो संक्रमण और त्वचा रोगों से बचाने में मदद करता है।
राष्ट्र प्रेस
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