शम्पा गोस्वामी के खिलाफ 'उत्पीड़न अभियान' पर फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने जताई गंभीर चिंता
सारांश
मुख्य बातें
आयरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स (FLD) ने 10 अक्टूबर 2026 को बांग्लादेशी हिंदू महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता शम्पा गोस्वामी के विरुद्ध चल रहे कथित उत्पीड़न अभियान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, यह उत्पीड़न उनके लिंग और हिंदू अल्पसंख्यक पहचान से जुड़ा है, और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध व्यापक भेदभाव के माहौल में हो रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
FLD ने बांग्लादेश के अधिकारियों द्वारा गोस्वामी पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध और गृह मंत्रालय के उस आदेश की कड़ी निंदा की है, जिसमें पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार और फंड के दुरुपयोग की जांच करने को कहा गया है। संगठन का कहना है कि ये कदम गोस्वामी, उनके परिवार और उनके नेतृत्व वाली संस्था 'प्रेरणा' को बदनाम करने, परेशान करने और प्रशासनिक रूप से कमज़ोर करने के एक लगातार चल रहे अभियान का हिस्सा हैं।
'प्रेरणा' महिलाओं के नेतृत्व में संचालित एक संगठन है, जो बांग्लादेश के सतखीरा जिले में काम करता है और महिला अधिकारों के लिए सक्रिय है।
यात्रा प्रतिबंध और न्यायालय में याचिका
FLD के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को गोस्वामी को हवाई अड्डे पर रोका गया और उन्हें इंडोनेशिया के बाली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने से रोक दिया गया। इसके बाद 20 सितंबर 2026 को उन्होंने इस यात्रा प्रतिबंध को चुनौती देते हुए बांग्लादेश उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की और वे अब सुनवाई की तारीख का इंतजार कर रही हैं।
इसके अतिरिक्त, 28 सितंबर 2026 को गोस्वामी को एक पत्र मिला, जिसमें बताया गया कि गृह मंत्रालय ने IGP को उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार और फंड दुरुपयोग की जांच के आदेश दिए हैं।
लिंग-आधारित और अल्पसंख्यक-केंद्रित उत्पीड़न की आशंका
FLD ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोस्वामी पर हमलों का स्वरूप लिंग-आधारित है और ये हमले एक महिला तथा अल्पसंख्यक समुदाय की सदस्य के रूप में उनकी पहचान से जुड़े हैं। संगठन के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदू समुदाय, अहमदिया मुसलमानों और आदिवासी समूहों के सदस्यों को लगातार भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं।
FLD की माँगें
मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश सरकार से माँग की है कि वह गोस्वामी पर लगाया गया यात्रा प्रतिबंध तत्काल हटाए और उनके, उनके परिवार तथा 'प्रेरणा' के विरुद्ध किसी भी प्रकार की उत्पीड़न एवं डराने-धमकाने की कार्रवाई बंद करे। इसके साथ ही FLD ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि गोस्वामी, उनकी बेटियों और 'प्रेरणा' के कर्मचारियों को निशाना बनाई जा रही धमकियों, जबरन वसूली की कोशिशों और ऑनलाइन उत्पीड़न की तुरंत, गहन और निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दंडित किया जाए।
आगे क्या होगा
गोस्वामी की रिट याचिका पर बांग्लादेश उच्च न्यायालय में सुनवाई अभी बाकी है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समुदाय की नज़र इस मामले पर टिकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का परिणाम बांग्लादेश में अल्पसंख्यक महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए एक मिसाल बन सकता है।