बांग्लादेश: हिंदू कार्यकर्ता शम्पा गोस्वामी पर देशद्रोह का मामला, मानवाधिकार संगठनों ने उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के सतखीरा जिले में सक्रिय हिंदू महिला अधिकार कार्यकर्ता शम्पा गोस्वामी के विरुद्ध 29 सितंबर 2026 को दर्ज किए गए देशद्रोह के मामले ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समुदाय की गहरी चिंता बढ़ा दी है। ह्यूमन राइट्स फोरम बांग्लादेश (HRFB) सहित अनेक प्रमुख संगठनों ने उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और अधिकारियों से आरोपों की निष्पक्ष जाँच की माँग की है। गोस्वामी का आरोप है कि मामला दर्ज होने के बाद से उन्हें और उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
शम्पा गोस्वामी सतखीरा स्थित महिला संगठन 'प्रेरणा नारी उन्नयन संगठन' की कार्यकारी निदेशक हैं। उनके विरुद्ध श्यामनगर पुलिस स्टेशन में देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। उनका कथन है कि मामला दर्ज होने के बाद से पुलिसकर्मी उनके घर और संगठन के कार्यालय पर नज़र रख रहे हैं तथा उनके परिजनों को भी परेशान किया जा रहा है।
बांग्लादेश के प्रमुख समाचारपत्र 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, HRFB ने सोमवार को जारी एक बयान में अधिकारियों से अपील की कि गोस्वामी को बिना किसी भय के अपनी वैध मानवाधिकार गतिविधियाँ जारी रखने का अवसर दिया जाए।
मानवाधिकार संगठनों की माँग
HRFB बांग्लादेश के 20 मानवाधिकार और विकास संगठनों का एक गठबंधन है, जिसमें आइन ओ सालिश केंद्र (ASK), मानुषेर जोन्यो फाउंडेशन (MJF), बांग्लादेश लीगल एड एंड सर्विसेज ट्रस्ट (BLAST), बांग्लादेश महिला परिषद (BMP) और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (TIB) जैसे संस्थान शामिल हैं।
फोरम ने कहा कि मानवाधिकार कार्यों से जुड़े व्यक्तियों पर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगाने के लिए ठोस और स्पष्ट कानूनी आधार होना अनिवार्य है। HRFB ने माँग की कि गोस्वामी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की कानूनी वैधता तथा उनकी ओर से लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों की भी निष्पक्ष जाँच हो।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
आयरलैंड स्थित मानवाधिकार संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स (FLD) ने पिछले महीने ही गोस्वामी के विरुद्ध हो रहे कथित हमलों और उत्पीड़न पर चिंता ज़ाहिर की थी। संगठन का कहना था कि यह उत्पीड़न उनकी महिला और धार्मिक अल्पसंख्यक पहचान से जुड़ा है और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा और भेदभाव के व्यापक माहौल का हिस्सा है।
FLD ने गोस्वामी पर लगाए गए कथित यात्रा प्रतिबंध और बांग्लादेश के गृह मंत्रालय की ओर से उनके खिलाफ शुरू की गई पुलिस जाँच पर भी गहरी आपत्ति दर्ज की।
संवैधानिक पहलू
यह ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश के संविधान में नागरिकों को मौलिक अधिकारों के तहत निजी जीवन की सुरक्षा, स्वतंत्र आवागमन तथा घर और निजी पत्राचार की गोपनीयता का अधिकार दिया गया है। HRFB ने स्पष्ट कहा कि निगरानी और उत्पीड़न के आरोपों को इन संवैधानिक प्रावधानों की कसौटी पर कसते हुए गंभीरता से जाँचा जाना चाहिए।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कथित कार्रवाइयों की बढ़ती शृंखला में एक और मामला है। मानवाधिकार संगठनों की इस एकजुट माँग के बाद अब निगाहें बांग्लादेशी प्रशासन की प्रतिक्रिया और जाँच की दिशा पर टिकी हैं।