क्या बांग्लादेश के हालात को ध्यान में रखकर क्रिकेट खेला जाना चाहिए? मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

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क्या बांग्लादेश के हालात को ध्यान में रखकर क्रिकेट खेला जाना चाहिए? मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

सारांश

बांग्लादेश के क्रिकेट बहिष्कार पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को ध्यान में रखते हुए भारतीय क्रिकेट बोर्ड को निर्णय लेना चाहिए। क्या बांग्लादेश के हालात को ध्यान में रखकर क्रिकेट खेला जाना चाहिए? जानिए इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है।

Key Takeaways

  • बांग्लादेश ने टी-20 वर्ल्ड कप बहिष्कार की घोषणा की।
  • मौलाना रजवी का कहना है कि खेल में सामाजिक मुद्दों का ध्यान रखना चाहिए।
  • अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की चिंता व्यक्त की गई।

बरेली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश ने भारत में होने वाले आगामी टी-20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट का बहिष्कार करने की घोषणा की है, जिसके चलते खेल, राजनीति और धर्म के क्षेत्र में बयानों की लहर तेज हो गई है। इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बांग्लादेश पर हमला किया।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के निर्णय में भारत सरकार का दखल होता है। यह बोर्ड खेल मंत्रालय के अधीन संचालित होता है। इन लोगों को निर्णय लेते समय सभी पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए। जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और जुल्म हो रहे हैं, तो इस स्थिति को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है। अगर इन सच्चाइयों को ध्यान में रखकर खेल खेले जाएंगे तो लोग इसकी सराहना करेंगे, अन्यथा भारत में लोग इसका बहिष्कार करेंगे।"

रजवी ने कहा, "बांग्लादेश में वर्तमान हालात बहुत नाजुक और खतरनाक हैं, जहां चरमपंथी विचारधारा वाले लोग अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं और उन पर ज्यादती कर रहे हैं। मैं क्रिकेट बोर्ड के जिम्मेदार लोगों से कहना चाहता हूं कि भारत में बांग्लादेश के खिलाड़ियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।"

उन्होंने केरल जमात-ए-इस्लामी के सदस्य के हालिया बयान पर निशाना साधते हुए कहा, "वे कह रहे हैं कि इस्लामी सल्तनत को कोई सच्चा इंसान कबूल नहीं कर सकता। उनका यह बयान हकीकत के खिलाफ है। सभी धर्मों के लोगों ने इस्लामी राज्य को कबूल किया है। कई देशों के मुखिया ने पैगंबर इस्लाम की शिक्षा से अपने-अपने देश के कानून बनाए और कई उपलब्धियां हासिल की।"

उन्होंने कहा, "आज भी यदि हम अलग-अलग देशों के संविधान को देखें तो उसमें इस्लामी उसूल देखने को मिलते हैं कि किस तरह से लोगों के साथ इंसाफ किया जाता था, महिलाओं का सम्मान किया जाता था, और लोगों को बराबरी का दर्जा दिया जाता था। ऐसे में जमात-ए-इस्लामी नेता का बयान पूरी तरह से बेबुनियाद है।"

Point of View

यह आवश्यक है कि हम खेलों में सामाजिक मुद्दों को ध्यान में रखें। यह न केवल क्रिकेट के प्रति हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि एक मानवता के नाते भी।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

बांग्लादेश ने टी-20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार क्यों किया?
बांग्लादेश ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के कारण भारतीय क्रिकेट बोर्ड का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का क्या कहना है?
उन्होंने कहा है कि खेल के निर्णय में सामाजिक मुद्दों का ध्यान रखना चाहिए।
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