क्या बांग्लादेश को लेकर माल्टा ही नहीं, पूरे विश्व को चिंता होनी चाहिए?
सारांश
Key Takeaways
- बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बढ़ रहे हैं।
- माल्टा के हाई कमिश्नर ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
- स्थिरता केवल माल्टा या भारत के लिए ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।
- बांग्लादेश में रोहिंग्याओं की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
नई दिल्ली, 24 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा और अत्याचार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। इस संदर्भ में, भारत में माल्टा के हाई कमिश्नर रूबेन गौसी ने बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति इसी तरह बनी रही, तो यह क्षेत्र की स्थिरता और उनके देश में निवास कर रहे बांग्लादेशी समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
रूबेन गौसी ने कहा, “मैं बांग्लादेश में भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं। भारत में माल्टा के हाई कमिश्नर के अलावा, मैं बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव में भी हाई कमिश्नर हूं। मैं नेपाल में भी राजदूत के रूप में कार्यरत हूं। मैं वर्तमान स्थिति पर ध्यान दे रहा हूं क्योंकि माल्टा में बांग्लादेशी समुदाय बहुत बड़ा है।”
उन्होंने आगे कहा, “देश में चल रही घटनाओं से हम बहुत चिंतित हैं। माल्टा में बांग्लादेशी लोग बड़ी संख्या में हैं। हम देख रहे हैं कि क्या हो रहा है। यह समस्या काफी समय से चल रही है, विशेषकर जब से शेख हसीना की सरकार को हटाया गया था। हम उम्मीद कर रहे हैं कि 3 फरवरी को बांग्लादेश में चुनाव सुचारू रूप से संपन्न हो जाएं।”
हालांकि, माल्टा और बांग्लादेश के बीच कोई विशेष व्यापारिक संबंध नहीं हैं, फिर भी गौसी ने इस बात पर जोर दिया कि माल्टा में बांग्लादेशी समुदाय की मेहनत और इज्जत के कारण वहां की शांति हमारे लिए महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश में स्थिरता केवल माल्टा या भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चिंता का विषय होना चाहिए।
माल्टा के राजदूत ने बांग्लादेश में मानवाधिकार मुद्दों, विशेषकर रोहिंग्याओं की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “हम ढाका में ईयू के राजदूत माइकल मिलर से नियमित संवाद करते हैं। वे एक प्रसिद्ध राजनयिक हैं और हमें घटनाओं की जानकारी देते रहते हैं।”