बारावफात पर UP में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: लखनऊ में जुलूस-ए-मदहे सहाबा, वाराणसी में बैरिकेड
सारांश
मुख्य बातें
ईद-ए-मिलाद-उन-नबी (बारावफात) के अवसर पर उत्तर प्रदेश में बुधवार, 27 अगस्त 2025 को व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त के बीच जुलूस निकाले गए। लखनऊ में ऐतिहासिक 'जुलूस-ए-मदहे सहाबा' का आयोजन हुआ, जबकि वाराणसी में रेवड़ी तालाब से बेनियाबाग तक पारंपरिक जुलूस के मद्देनजर पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए। दोनों शहरों में प्रशासन ने शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने के लिए ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन की विशेष योजना बनाई।
लखनऊ: अमीनाबाद से निकला ऐतिहासिक जुलूस
लखनऊ के अमीनाबाद स्थित अमीर-उद-दौला पार्क से जुलूस-ए-मदहे सहाबा रवाना हुआ। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने जुलूस से पहले एक अपील जारी करते हुए कहा, "सभी मुसलमानों से गुज़ारिश है कि वे बड़ी संख्या में और शांतिपूर्ण तरीके से इस जुलूस में शामिल हों। सभी नियमों, कानूनों और गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन करें। जुलूस में ऐसे कोई नारे न लगाएं जिनसे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों।"
गौरतलब है कि मंगलवार रात से ही जलसे का आयोजन जारी था, जो देर रात तक चला। इस दौरान पुलिस बल लगातार तैनात रहा।
लखनऊ पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था
लखनऊ के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस कमलेश दीक्षित ने बताया, "मंगलवार रात से ही जलसा चल रहा था और हमारे पुलिसकर्मी तैनात रहे। बुधवार को 'जुलूस-ए-मोहम्मदी' में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और हमारी टीमें लगातार सक्रिय हैं, जिनमें सिविल पुलिस और पीएसी के जवान शामिल हैं।"
वाराणसी: रेवड़ी तालाब से बेनियाबाग तक जुलूस
वाराणसी में पारंपरिक बारावफात जुलूस रेवड़ी तालाब से शुरू होकर बेनियाबाग तक गया, जहाँ स्वागत समारोह का आयोजन हुआ। प्रशासन ने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए। वाराणसी के एसीपी गौरव कुमार ने बताया, "बिना इजाजत वाले वाहनों को रोकने के लिए हर चौराहे पर बैरिकेड लगाए गए हैं। सिर्फ उन्हीं वाहनों को गुजरने दिया जाएगा जिनकी इजाजत है।"
पुलिस ने ट्रैफिक मार्गों पर विशेष नजर रखी और अधिकारियों ने जनता से शांतिपूर्ण सहयोग की अपील की।
धार्मिक महत्व और सामाजिक संदेश
वाराणसी के इमाम सऊद आलम मुख्तारी ने बारावफात के महत्व पर कहा, "बारावफात या ईद मिलाद-उन-नबी हम मुसलमानों के लिए बहुत अहम मौका है। इसे 'ईद-ए-ईद' कहा जा सकता है। पैगंबर साहब ने इंसानियत और शांति का संदेश दिया — उन्होंने सिखाया कि इंसान के तौर पर कैसे जिएं, अपने पड़ोसियों का ख्याल कैसे रखें और शांति कैसे बनाए रखें।"
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरतता रहा है। दोनों शहरों में जुलूस के शांतिपूर्ण संपन्न होने के बाद सामान्य ट्रैफिक बहाल होने की उम्मीद है।