बाड़मेर में सरपंच पद के लिए ₹11 करोड़ की कथित बोली का वीडियो वायरल, लंगेरा पंचायत में हड़कंप
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के बाड़मेर जिले की लंगेरा ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए कथित तौर पर ₹11 करोड़ की बोली लगाए जाने का एक वीडियो 15 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक विवाद खड़ा हो गया है। आगामी पंचायती राज चुनावों की तैयारियों के बीच सामने आए इस वीडियो में निर्विरोध सरपंच चुनने के बदले मोटी रकम देने की कथित चर्चा होती दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालाँकि, वीडियो की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कब और कहाँ हुई कथित बैठक
दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो 11 अक्टूबर को हुई एक बैठक का है। उस बैठक में कथित तौर पर ग्रामीण शिक्षा, रोज़गार और गाँव के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान, सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों के अनुसार, सरपंच पद के बदले धनराशि देने का प्रस्ताव सामने आया।
रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआत में ₹1 करोड़ की पेशकश की गई, जो कथित तौर पर बढ़कर पहले ₹5 करोड़ और फिर ₹11 करोड़ तक जा पहुँची। एक अलग दावे में यह भी कहा जा रहा है कि एक व्यक्ति ने तीन दिनों के भीतर ₹5 करोड़ देने की तैयारी जताई थी। इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो सकी है।
आरक्षण का पेच और लोकतांत्रिक सवाल
लंगेरा ग्राम पंचायत में सरपंच का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है। इस संदर्भ में करोड़ों रुपये की कथित बोली की चर्चा ने चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत स्तर पर इस तरह के आरोप नए नहीं हैं — ग्रामीण चुनावों में धन-बल के इस्तेमाल की शिकायतें देश के कई हिस्सों से समय-समय पर आती रही हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में पंचायती राज चुनावों की प्रक्रिया तेज़ हो रही है।
ग्रामीणों का रुख
वायरल वीडियो के साथ यह दावा भी प्रसारित हो रहा है कि ग्रामीणों ने कथित बोली की व्यवस्था को अस्वीकार कर दिया और सरपंच का चयन नियमित चुनावी प्रक्रिया के ज़रिए कराने पर ज़ोर दिया। हालाँकि, इस दावे की भी अब तक कोई आधिकारिक या प्रशासनिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार
फ़िलहाल बाड़मेर ज़िला प्रशासन की ओर से इस वायरल वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है। वीडियो की सत्यता, बैठक में वास्तव में क्या हुआ और उसमें शामिल लोगों की पहचान — इन सभी बिंदुओं पर आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार है। वायरल दावों के आधार पर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा।
यदि जाँच में कथित बोली की बात सत्य पाई जाती है, तो यह चुनाव आयोग और राजस्थान सरकार दोनों के लिए गंभीर हस्तक्षेप का विषय बन सकती है।