बरसाना की 'रंगीली गली' में लट्ठमार होली क्यों मनाई जाती है?
सारांश
Key Takeaways
- बरसाना की 'रंगीली गली' होली का प्रमुख केंद्र है।
- यह गली प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।
- लट्ठमार होली का आयोजन हर वर्ष विशेष धूमधाम से किया जाता है।
- महिलाएं इस पर्व में शक्ति और शौर्य का प्रतीक मानी जाती हैं।
- गालियां इस होली का अनिवार्य हिस्सा हैं, जो उत्सव का मजा बढ़ाती हैं।
नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के वृंदावन और बरसाना की हर जगह राधा-कृष्ण का प्रेम बिखरा हुआ है। बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव शुरू हो जाता है। हर साल, बरसाना की प्रसिद्ध लट्ठमार होली का उत्सव विदेशों में बसे भक्त भी बेसब्री से इंतजार करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लट्ठमार होली बरसाना की 'रंगीली गली' में ही क्यों मनाई जाती है?
बरसाना में होली का पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि इसमें प्रेम और उत्साह का रंग शामिल होता है, जिसमें मीठी गालियों के साथ वृंदावन और नंदगांव के हुरियारों का स्वागत किया जाता है। यद्यपि पूरे बरसाना में होली का रंग बिखरा होता है, लेकिन बरसाना की 'रंगीली गली' में आनंद का एक अलग ही अनुभव होता है। यह गली न केवल एक मार्ग है, बल्कि ब्रज की सदियों पुरानी संस्कृति और लट्ठमार होली का जीवंत केंद्र है।
कहा जाता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण अपने सखा के साथ इसी गली में राधा रानी और गोपियों के साथ होली खेलने जाते थे। लगभग 100 मीटर लंबी यह गली प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। इसी गली में श्रीकृष्ण राधारानी का पीछा करते हुए रंग लगाते थे और समर्पण के साथ श्रीजी के सामने उपस्थित होते थे। यही कारण है कि रंगीली गली में होली का विशेष महत्त्व है। इस वर्ष बरसाना की लट्ठमार होली का आयोजन 26 फरवरी को होगा, जिसकी तैयारी 23 जनवरी, बसंत पंचमी से शुरू होगी।
लट्ठमार होली के लिए पहले फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन, जिसे लड्डू होली कहते हैं, बरसाना की सखियां नंदगांव के ग्वालों को होली खेलने का न्योता देती हैं। भेंट स्वरूप मिष्ठान भी दिए जाते हैं और राधा-कृष्ण के प्रेम को समर्पित गीत गाए जाते हैं। इसके बाद नंदगांव के हुरियाए बरसाना गली में सखियों के साथ होली खेलते हैं। खास बात यह है कि होली खेलने से पहले हुरियारों का स्वागत मीठी गालियों के साथ किया जाता है। जवाब में, नंदगांव के हुरियाए भी सखियों को कहावत के अंदाज में गालियां देते हैं। होली के अवसर पर गालियां भी मिष्ठान की तरह लगती हैं और कोई भी बुरा नहीं मानता।
‘रंगीली गली’ में मनाई गई होली शौर्य और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है, क्योंकि पुरुषों को केवल बचाव का अधिकार होता है और महिलाएं लाठी-डंडों से पुरुषों की पिटाई करती हैं। इस कारण से लट्ठमार होली को महिलाओं की शक्ति और शौर्य का प्रतीक माना जाता है।