बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान का खतरा, तमिलनाडु के नीलगिरी-कुड्डालोर में 3 नवंबर तक भारी बारिश का अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 नवंबर 2026 को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निकट बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटों में चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके प्रभाव से तमिलनाडु के तटीय, पहाड़ी और अंदरूनी जिलों में अगले तीन दिनों तक व्यापक बारिश का पूर्वानुमान है।
मौसम प्रणाली की स्थिति
IMD के अनुसार, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बनी यह मौसम प्रणाली क्रमशः मजबूत हो रही है। विभाग ने संकेत दिया है कि यह प्रणाली अगले 24 घंटों में चक्रवाती तूफान में परिवर्तित हो सकती है। गौरतलब है कि बंगाल की खाड़ी अक्टूबर-नवंबर के महीनों में चक्रवाती गतिविधियों के लिए सबसे सक्रिय क्षेत्र मानी जाती है — पिछले एक दशक में इस मौसम में कई गंभीर तूफान तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटों से टकरा चुके हैं।
जिलेवार बारिश का पूर्वानुमान
1 नवंबर (रविवार) को नीलगिरी, तिरुवल्लूर, कुड्डालोर और विल्लुपुरम के कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना है। उत्तरी तटीय जिलों और पश्चिमी घाट वाले जिलों में मध्यम बारिश का अनुमान है।
मदुरै, तिरुचिरापल्ली, नमक्कल, सलेम, इरोड और करूर में भी रविवार को मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि राज्य के शेष भागों में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।
2 नवंबर (सोमवार) को नीलगिरी और तिरुवल्लूर में भारी बारिश का अनुमान है। कुड्डालोर और विल्लुपुरम जिलों में 2 और 3 नवंबर — यानी लगातार दो दिन — भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ये दोनों जिले तटीय क्षेत्र में स्थित हैं और मौसम प्रणाली के अनुमानित मार्ग के करीब हैं।
चेन्नई में क्या होगा
चेन्नई में रविवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। IMD के अनुसार, शहर के कुछ इलाकों में गरज-चमक और बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश संभव है, लेकिन यह पूरे शहर में एकसमान नहीं होगी — केवल चुनिंदा इलाकों तक सीमित रह सकती है।
आम जनता पर असर और सावधानी
भारी बारिश की चेतावनी वाले जिलों — विशेषकर नीलगिरी, कुड्डालोर और विल्लुपुरम — में निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का जोखिम भी बढ़ सकता है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दिए जाने की संभावना है क्योंकि मौसम प्रणाली के सक्रिय होने पर समुद्री स्थितियाँ खराब हो सकती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के कई जिले उत्तर-पूर्वी मानसून के सक्रिय चरण में हैं और भूमि पहले से ही नमी से संतृप्त हो सकती है, जिससे जलभराव और बाढ़ का खतरा अधिक रहता है। आने वाले 48 से 72 घंटे निर्णायक होंगे, जब यह स्पष्ट होगा कि यह प्रणाली किस दिशा में बढ़ती है और कितनी तीव्रता से।