बंगाल की खाड़ी में नया मौसमी सिस्टम सक्रिय, 1-2 नवंबर को चेन्नई में भारी बारिश की संभावना
सारांश
मुख्य बातें
बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसमी सिस्टम बनने के संकेत मिल रहे हैं, जिसके चलते 1 और 2 नवंबर 2026 को चेन्नई और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय इलाकों में भारी बारिश की आशंका जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस सिस्टम की तीव्रता, दिशा और तट से टकराने की संभावना को लेकर अभी पूरी स्पष्टता नहीं है।
मौसमी सिस्टम की मौजूदा स्थिति
मौसम विशेषज्ञ बंगाल की खाड़ी में उभर रहे एक कम दबाव के क्षेत्र पर कड़ी नज़र बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम मजबूत होकर उत्तरी तमिलनाडु की दिशा में आगे बढ़ सकता है। यदि यह सिस्टम चक्रवात का रूप ले लेता है, तो इसके चेन्नई और आंध्र प्रदेश के बीच किसी बिंदु पर तट से टकराने की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि यह पूर्वानुमान ऐसे समय में सामने आया है जब चक्रवात 'अर्नब' तमिलनाडु से होकर गुज़र चुका है और अब आंध्र प्रदेश की ओर उत्तर दिशा में बढ़ रहा है। इस प्रकार, राज्य लगातार मौसमी सिस्टमों की चपेट में है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. वी.आर. दुरई ने बताया कि मौजूदा मौसम पूर्वानुमान मॉडल इस सिस्टम के उत्तरी तमिलनाडु की ओर बढ़ने का संकेत दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सिस्टम का अंतिम मार्ग अभी निर्धारित नहीं हुआ है।
डॉ. दुरई के शब्दों में, 'जब तक यह सिस्टम चक्रवात में नहीं बदल जाता, तब तक यह बताना मुश्किल है कि यह किस दिशा में जाएगा और कैसे आगे बढ़ेगा। हालांकि, मौजूदा मौसम पूर्वानुमान मॉडल बताते हैं कि यह उत्तरी तमिलनाडु की ओर बढ़ सकता है।'
बारिश का असर किस पर होगा
डॉ. दुरई के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश की मात्रा इस बात पर निर्भर करेगी कि सिस्टम मजबूत होने के बाद किस दिशा में रुख करता है। यदि यह कावेरी डेल्टा की ओर मुड़ता है, तो तमिलनाडु के आंतरिक इलाकों में अच्छी बारिश हो सकती है।
दूसरी ओर, यदि यह चेन्नई और उससे सटे आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ता है, तो चेन्नई शहर में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब शहर पहले ही पिछले कुछ हफ्तों से मौसमी उठापटक झेल रहा है।
अनिश्चितता और आगे क्या
मौसम विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि 1 और 2 नवंबर को होने वाली संभावित बारिश पूरी तरह से इस सिस्टम के विकास और उसके आगे बढ़ने के मार्ग पर निर्भर करेगी। अभी सामने आ रहे संकेत केवल प्रारंभिक अनुमान हैं, न कि निश्चित पूर्वानुमान।
डॉ. दुरई ने कहा कि जैसे-जैसे यह सिस्टम और मजबूत होगा और इसका मार्ग स्पष्ट होगा, उसी के अनुसार ताज़ा और अधिक सटीक पूर्वानुमान जारी किए जाएंगे। तटीय निवासियों और प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।