बंगाल की जनता बाकी राज्यों से अलग, भाजपा को मिलेगी चुनौती: मजीद मेमन

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बंगाल की जनता बाकी राज्यों से अलग, भाजपा को मिलेगी चुनौती: मजीद मेमन

सारांश

पूर्व सांसद मजीद मेमन ने कहा — बंगाल और तमिलनाडु में मतदान दर शानदार रही। बंगाल की जनता समझदार है, भाजपा के बहकावे में नहीं आएगी। ममता सरकार से जनता खुश है। खड़गे के विवादित बयान पर भी मेमन ने संयम बरतने की नसीहत दी।

Key Takeaways

  • मजीद मेमन ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों में इस बार मतदान दर बेहद अच्छी रही।
  • बंगाल और केरल की जनता राजनीतिक बहकावे में नहीं आती — मजीद मेमन का स्पष्ट बयान।
  • भाजपा ने घुसपैठ और झुग्गी-बस्ती जैसे मुद्दे उठाए, लेकिन बंगाल की जनता ममता बनर्जी सरकार से संतुष्ट है।
  • पीएम मोदी और अमित शाह ने बंगाल में जीत के लिए अथक प्रयास किए, लेकिन रणनीति पर सवाल उठे।
  • कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के विवादित बयान पर मजीद मेमन ने कहा — शब्द वापस लेने में कोई बुराई नहीं।
  • 2021 की तरह इस बार भी भाजपा के लिए बंगाल जीतना बड़ी चुनौती — राजनीतिक विश्लेषकों की राय।

मुंबई, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में इस बार मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सांसद मजीद मेमन ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में कहा कि दोनों राज्यों में मतदान की दर उत्साहजनक रही और लोग लंबी कतारों में खड़े होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचे।

बंगाल में मतदान का उत्साह

मजीद मेमन ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु — दोनों ही राज्यों में मतदाताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। लोग सुबह से ही मतदान केंद्रों पर पहुंचे और धूप-गर्मी की परवाह किए बिना कतारों में खड़े रहे। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया।

बंगाल की जनता अलग है — भाजपा को समझना होगा

मजीद मेमन ने स्पष्ट कहा कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपना पूरा दमखम लगा दिया है, लेकिन उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि बंगाल की जनता बाकी राज्यों की तुलना में अधिक जागरूक और समझदार है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और केरल — ये दो ऐसे राज्य हैं जहां की जनता राजनीतिक बहकावे और छलावे में आसानी से नहीं आती। यहां के मतदाता तथ्यों के आधार पर फैसला करते हैं, भावनात्मक अपीलों के आधार पर नहीं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कामकाज से जनता जुड़ी हुई है और ऐसे में भाजपा के लिए बंगाल में सफलता हासिल करना बेहद मुश्किल दिखता है।

मोदी-शाह की मेहनत, लेकिन रणनीति पर सवाल

मजीद मेमन ने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में जीत के लिए अथक प्रयास किए हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने पहले घुसपैठियों का मुद्दा उठाया, फिर मतदाता सूची से लाखों नाम हटवाने की बात की और अब बंगाल को झुग्गी-बस्ती बताने वाले बयान दिए — यह रणनीति जनता को नाराज कर सकती है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता मौजूदा सरकार से संतुष्ट है और उसे बदलने की कोई वजह नहीं दिखती। भाजपा धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण की कोशिश करती है, जो अंततः उसके खिलाफ जाती है।

खड़गे के विवादित बयान पर मेमन की दो-टूक

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर मजीद मेमन ने साफ कहा कि ऐसे शब्दों का प्रयोग उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि खड़गे एक बड़े राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष हैं और उन्हें अपने बयानों में संयम बरतना चाहिए। मजीद मेमन ने सुझाव दिया कि अगर खड़गे अपने शब्द वापस ले लें तो इसमें कोई बुराई नहीं होगी, क्योंकि प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल एक गंभीर मामला है।

विश्लेषण: बंगाल में भाजपा की रणनीति और ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने पश्चिम बंगाल में भारी निवेश किया था, लेकिन ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी। इस बार भी भाजपा की रणनीति लगभग वही है — धार्मिक ध्रुवीकरण और घुसपैठ का मुद्दा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में वामपंथी राजनीति की विरासत और बौद्धिक परंपरा के कारण यहां का मतदाता वर्ग अन्य राज्यों की तुलना में अधिक तार्किक निर्णय लेता है। यही कारण है कि यहां भावनात्मक अपीलें कम काम करती हैं।

आने वाले दिनों में मतगणना के नतीजे यह तय करेंगे कि ममता बनर्जी की रणनीति कारगर रही या भाजपा ने इस बार कोई नया समीकरण बनाने में सफलता पाई। राजनीतिक हलकों में इस चुनाव को 2026 की राजनीतिक दिशा का संकेतक माना जा रहा है।

Point of View

बल्कि एक गहरी चुनावी सच्चाई की ओर इशारा है। 2021 में भी भाजपा ने बंगाल में अपना सब कुछ झोंका था, फिर भी ममता बनर्जी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की — यह पैटर्न बताता है कि बंगाल का मतदाता राष्ट्रीय लहर से प्रभावित होने की बजाय स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देता है। विडंबना यह है कि भाजपा जितना ज्यादा घुसपैठ और झुग्गी-बस्ती जैसे बयान देती है, उतना ही बंगाल की अस्मिता को ठेस पहुंचती है — और यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। खड़गे प्रकरण यह भी दर्शाता है कि विपक्ष अभी भी भाषाई संयम की राजनीति नहीं सीख पाया।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

मजीद मेमन ने बंगाल चुनाव के बारे में क्या कहा?
मजीद मेमन ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदान की दर बहुत अच्छी रही और बंगाल की जनता समझदार है जो भाजपा के बहकावे में नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सरकार से जनता संतुष्ट है।
क्या भाजपा बंगाल में सफल होगी?
मजीद मेमन के अनुसार भाजपा को बंगाल में सफलता मिलना मुश्किल लगता है। उन्होंने कहा कि बंगाल और केरल जैसे राज्यों की जनता धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति से प्रभावित नहीं होती।
खड़गे ने पीएम मोदी पर क्या विवादित टिप्पणी की?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। मजीद मेमन ने इस पर कहा कि खड़गे को अपने बयान वापस लेने चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री पद के खिलाफ अशोभनीय भाषा गंभीर मामला है।
बंगाल की जनता बाकी राज्यों से अलग क्यों है?
मजीद मेमन के अनुसार पश्चिम बंगाल और केरल में जनता राजनीतिक रूप से अधिक जागरूक है और भावनात्मक अपीलों की बजाय सरकार के कामकाज के आधार पर मतदान करती है। यहां की वामपंथी और बौद्धिक राजनीतिक परंपरा इसकी बड़ी वजह मानी जाती है।
2026 बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की स्थिति कैसी है?
मजीद मेमन के मुताबिक ममता बनर्जी सरकार से बंगाल की जनता खुश है और सरकार बदलने की कोई वजह नहीं दिखती। 2021 में भी ममता ने 213 सीटें जीतकर भाजपा को करारा जवाब दिया था।
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