पटना में भीषण लू का कहर: डीएम त्यागराजन ने जारी किया हाई अलर्ट, 15 विभागों को दिए सख्त निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- पटना में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर डीएम त्यागराजन एस.एम. ने हाई अलर्ट जारी किया।
- 15 सरकारी विभागों को एक साथ सक्रिय कर हीटवेव एक्शन प्लान लागू किया गया है।
- बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और पूर्व रोगी सर्वाधिक जोखिम वाले समूहों में चिन्हित किए गए हैं।
- सिविल सर्जन लखिंद्र प्रसाद को सभी स्वास्थ्यकर्मियों को हीटस्ट्रोक प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए गए।
- सभी सरकारी अस्पतालों में हीटस्ट्रोक के लिए जीवनरक्षक दवाओं का भंडार अनिवार्य किया गया।
- लू संबंधी सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क किया जा सकता है।
पटना, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार इन दिनों भीषण लू की मार झेल रहा है। राजधानी पटना में बीते कई दिनों से पारा लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है, जिससे आम नागरिकों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस संकट से निपटने के लिए जिलाधिकारी (डीएम) त्यागराजन एस.एम. ने गुरुवार को 'हीटवेव एक्शन प्लान' के तहत जिला प्रशासन को 'हाई अलर्ट' पर रखते हुए व्यापक निर्देश जारी किए हैं।
15 सरकारी विभागों को एक साथ किया गया सतर्क
डीएम के निर्देश के अनुसार, लगभग 15 सरकारी विभागों को एक साथ सक्रिय किया गया है और उन्हें आपस में समन्वय बनाकर काम करने के आदेश दिए गए हैं। यह बहु-विभागीय दृष्टिकोण इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस बार लू को महज मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा के रूप में देख रहा है।
प्रशासन ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, वृद्धजनों और पूर्व से किसी बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों को सर्वाधिक जोखिम वाले समूहों में चिन्हित किया है। इन वर्गों के लिए विशेष सतर्कता और देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
लू के लक्षण और स्वास्थ्य जोखिम
डीएम त्यागराजन एस.एम. ने बताया कि शुष्क मौसम और कम आर्द्रता के संयोग से गर्म हवाओं यानी लू चलने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि लू लगने के प्रमुख लक्षणों में अत्यधिक पसीना आना, तेज़ श्वास, मांसपेशियों में ऐंठन, जी मिचलाना, उल्टी, दस्त, तीव्र प्यास, तेज़ बुखार और गंभीर अवस्था में बेहोशी शामिल हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि ऐसे किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें।
तीन स्तरों पर लागू किया गया एक्शन प्लान
जिला प्रशासन ने तीन स्तरों पर ठोस उपाय लागू किए हैं — प्रशासनिक स्तर, मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पताल स्तर, और सामुदायिक स्तर। इस त्रिस्तरीय रणनीति का उद्देश्य लू से होने वाली मौतों को शून्य पर लाना है।
पटना के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखिंद्र प्रसाद को निर्देशित किया गया है कि वे सभी स्वास्थ्यकर्मियों को हीटस्ट्रोक के लक्षणों, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल की पूरी जानकारी दें, ताकि समय पर इलाज संभव हो सके।
सभी सरकारी अस्पतालों — मेडिकल कॉलेजों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक — में हीटस्ट्रोक के उपचार के लिए जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडार बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा, हर स्वास्थ्य केंद्र पर लू से जुड़े मामलों का अलग डेटा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है।
हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान
पटना के निवासी राज्य स्वास्थ्य सोसायटी द्वारा संचालित स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर '104' पर कॉल कर लू संबंधी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि जागरूकता, शीघ्र पहचान और बचाव ही इस संकट से लड़ने के सबसे प्रभावी हथियार हैं।
गौरतलब है कि बिहार में हर वर्ष अप्रैल-जून के बीच लू से दर्जनों लोगों की मौत होती है। ऐसे में इस बार प्रशासन का यह सक्रिय और बहु-स्तरीय दृष्टिकोण उल्लेखनीय है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तर भारत में गर्मी का मौसम न केवल लंबा हो रहा है, बल्कि तापमान के चरम स्तर भी साल-दर-साल नए रिकॉर्ड बना रहे हैं।
आने वाले दिनों में यदि मानसून-पूर्व वर्षा नहीं हुई तो पटना समेत पूरे बिहार में लू की स्थिति और भी विकट हो सकती है। जिला प्रशासन की ओर से सभी संबंधित विभागों को निर्देश है कि वे इन उपायों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करें और किसी भी ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।