बेंगलुरु में 'सिम बॉक्स' नेटवर्क का भंडाफोड़: 10 GSM गेटवे डिवाइस जब्त, सैकड़ों करोड़ की धोखाधड़ी का संदेह
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक साइबर कमांड यूनिट ने 22 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड इलाके में दो अपार्टमेंट से संचालित एक अवैध 'सिम बॉक्स' नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में 10 GSM गेटवे डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 320 सिम कनेक्शन की थी। प्रारंभिक जाँच के अनुसार इस नेटवर्क से सैकड़ों करोड़ रुपये की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी जुड़ी हो सकती है।
कार्रवाई का आधार और शिकायत
यह अभियान भारती एयरटेल के चीफ सर्कल नोडल ऑफिसर की शिकायत के बाद शुरू हुआ, जिसमें एयरटेल सिम कार्ड के संदिग्ध और अनधिकृत उपयोग का आरोप लगाया गया था। शिकायत के आधार पर व्हाइटफील्ड के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (CCPS) में 26 अगस्त को आधिकारिक मामला दर्ज किया गया था।
गौरतलब है कि 'सिम बॉक्स' डिवाइस इंटरनेट कॉल को स्थानीय मोबाइल नेटवर्क कॉल में बदलने का काम करती हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय कॉल की वास्तविक उत्पत्ति को छिपाया जा सकता है — यह तकनीक साइबर अपराधियों के बीच पहचान छुपाने का एक प्रमुख हथियार बन चुकी है।
छापेमारी का विवरण
कर्नाटक साइबर कमांड यूनिट ने दूरसंचार विभाग (DoT), कर्नाटक के साथ मिलकर यह संयुक्त अभियान चलाया। कडुगोडी स्थित पहले अपार्टमेंट से 6 सिम बॉक्स डिवाइस जब्त की गईं, जिनमें से प्रत्येक में 32 सिम स्लॉट थे। वहीं पट्टंदुर अग्रहारा स्थित दूसरे ठिकाने से इसी प्रकार की 4 और डिवाइस बरामद की गईं।
जाँच अधिकारियों के अनुसार दोनों स्थानों को आरोपियों के एक ही नेटवर्क द्वारा स्थापित और संचालित किया जा रहा था, जो इस ऑपरेशन के समन्वित और संगठित स्वरूप की ओर संकेत करता है।
संभावित अपराधों से कड़ी
शुरुआती सुरागों से संकेत मिलता है कि इस नेटवर्क का संबंध कथित तौर पर देशभर में हो रहे 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों, 'सेक्सटॉर्शन' (यौन शोषण से जुड़ी जबरन वसूली), वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों से हो सकता है। हालाँकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि इस नेटवर्क से कितने लोग पीड़ित हुए, वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना हुआ, और यह नेटवर्क अपने विस्तार में कितना बड़ा है।
यह ऐसे समय में आया है जब 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले पूरे भारत में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और गृह मंत्रालय पहले ही इस खतरे को लेकर नागरिकों को आगाह कर चुका है।
आगे की जाँच
जब्त किए गए सभी 10 GSM गेटवे डिवाइस की विस्तृत फॉरेंसिक जाँच जारी है ताकि धोखाधड़ी वाले संचार में उनकी ठीक-ठीक भूमिका और इनसे जुड़े साइबर अपराधों की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके। कमांड यूनिट के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़े और आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया भी चल रही है। आने वाले हफ्तों में इस मामले में गिरफ्तारियाँ और अधिक खुलासे संभव हैं।