3 नवंबर 2026
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दिल्ली पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के तीन नेटवर्क तोड़े: 70 म्यूल खाते, 187 फर्जी सिम, ₹1.59 करोड़ की ठगी, 6 गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के तीन नेटवर्क तोड़े: 70 म्यूल खाते, 187 फर्जी सिम, ₹1.59 करोड़ की ठगी, 6 गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एक साथ चार ऑपरेशन में साइबर ठगी के परस्पर जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया — 70 म्यूल खाते, 187 फर्जी सिम, ₹3.73 करोड़ का एपीके फ्रॉड और ₹1.59 करोड़ की कुल ठगी। छह गिरफ्तारियों के साथ पीड़ितों को ₹1.87 करोड़ से अधिक वापस दिलाए गए।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस के आउटर नॉर्थ साइबर क्राइम स्टेशन ने चार ऑपरेशन में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
नेटवर्क ने लगभग 70 म्यूल बैंक खाते तैयार किए और 187 फर्जी सिम कार्ड लगभग ₹1,500 प्रति सिम की दर से बेचे।
NCRP पर दर्ज 125 शिकायतों में कुल लगभग ₹1.59 करोड़ की धोखाधड़ी दर्ज है।
जालंधर से गिरफ्तार सौरव ने एपीके फ्रॉड से लगभग ₹3.73 करोड़ जुटाए; पहले भी 8 साइबर अपराध मामलों में संलिप्त रहा।
MRM पोर्टल और जांच के जरिए पीड़ितों को ₹74.94 लाख और ₹1.12 करोड़ क्रमशः वापस दिलाए गए।
जब्त सामग्री में 8 मोबाइल , 8 एटीएम कार्ड , 7 चेक बुक , POS डिवाइस , ₹10,030 नकद और एक मोटरसाइकिल शामिल हैं।

दिल्ली पुलिस के आउटर नॉर्थ जिले के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने 3 नवंबर 2026 को साइबर धोखाधड़ी के कई परस्पर जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जिनमें 'म्यूल' बैंक खातों का दुरुपयोग, फर्जी सिम कार्ड की अवैध बिक्री और एपीके-आधारित साइबर फ्रॉड मॉड्यूल शामिल थे। चार अलग-अलग अभियानों में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 125 शिकायतों से जुड़ी लगभग ₹1.59 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन में चार अलग मामले सामने आए जो एक बड़े साइबर अपराध पारिस्थितिकी तंत्र की ओर इशारा करते हैं। पहले मामले (एफआईआर संख्या 39/2026) में 24 अक्टूबर को 19 वर्षीय देवेंद्र उर्फ सचिन को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि उसने और उसके साथी मोहित ने शाहबाद डेयरी के निवासियों को बीमा लाभ और नकद प्रोत्साहन का प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते खुलवाए।

इन खातों की बैंकिंग किट इकट्ठा करके दोनों ने उन्हें हैदराबाद से संचालित एक संदिग्ध साइबर अपराध नेटवर्क को सौंप दिया। आरोपियों ने इस तरह लगभग 70 बैंक खाते तैयार किए और लेनदेन पर करीब 10 प्रतिशत कमीशन अपने पास रखा। मोहित फिलहाल एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में बंद है। इस मामले में NCRP की 9 शिकायतें और लगभग ₹14.51 लाख की ठगी दर्ज है।

फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क का पर्दाफाश

दूसरे मामले में अतुल, समीर उर्फ सैम और पंकज को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, टेलीकॉम डीलर अतुल ने ग्राहकों की जानकारी के बिना उनकी तस्वीरों और दस्तावेजों का उपयोग कर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी करवाए और उन्हें अपने साथियों को लगभग ₹1,500 प्रति सिम की दर से बेचा।

वर्ष 2026 में इस तरह लगभग 187 सिम कार्ड हासिल किए गए। यह नेटवर्क NCRP की 114 शिकायतों से जुड़ा है, जिनमें करीब ₹1.40 करोड़ की धोखाधड़ी शामिल है।

बैंक खाते बेचने और एपीके फ्रॉड के मामले

तीसरे मामले में सुमित को गिरफ्तार किया गया, जिसने अपने साथी विक्की चौहान को ₹20,000 में तीन बैंक खाते बेचे थे। इन खातों के जरिए साइबर धोखाधड़ी के दो मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें लगभग ₹4.5 लाख शामिल हैं। पुलिस चौहान और अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।

चौथे मामले में, 18 अगस्त को पंजाब के जालंधर से सौरव को गिरफ्तार किया गया। उस पर एपीके-आधारित साइबर फ्रॉड नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। उसके मोबाइल फोन से 124 बैंक खातों व कार्डों की जानकारी मिली — जिनमें 29 बैंक खाते, 85 डेबिट/क्रेडिट कार्ड और 10 मास्क्ड कार्ड शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, सौरव ने ऑनलाइन सोना खरीदने, गिफ्ट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से साइबर फ्रॉड से प्राप्त लगभग ₹3.73 करोड़ की राशि का उपयोग किया। इस राशि से खरीदी गई बताई जा रही एक 500 वर्ग गज की बेकरी फैक्ट्री और एक कार की जांच की जा रही है। वह पहले भी साइबर अपराध के 8 मामलों में संलिप्त रहा है।

जब्त सामग्री और पीड़ितों को राशि की वापसी

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 8 मोबाइल फोन, 8 एटीएम कार्ड, 7 चेक बुक, 2 पासबुक, एक POS डिवाइस, एक पॉकेट राउटर, ₹10,030 नकद और एक मोटरसाइकिल जब्त की।

उल्लेखनीय है कि MRM पोर्टल के जरिए साइबर फ्रॉड पीड़ितों को ₹74.94 लाख वापस दिलाए गए हैं, जबकि जांच के दायरे में आए मामलों में शिकायतकर्ताओं को ₹1.12 करोड़ की राशि वापस कराई गई है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ-साथ अपराधियों ने भी अपने तरीके परिष्कृत किए हैं।

पुलिस के अनुसार, जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुव्यवस्थित आपूर्ति श्रृंखला बन चुकी है — जिसमें टेलीकॉम डीलर, बैंक खाता खरीद-फरोख्त करने वाले और हैदराबाद जैसे शहरों से संचालित 'बैक-ऑफिस' एक साथ काम करते हैं। ₹3.73 करोड़ की एपीके फ्रॉड से खरीदी गई बेकरी फैक्ट्री यह भी बताती है कि अपराध की कमाई किस तरह 'वैध' संपत्ति में तब्दील हो रही है। असली सवाल यह है कि क्या NCRP पर दर्ज 125 शिकायतें हिमशैल का केवल सिरा हैं, क्योंकि अधिकांश पीड़ित शिकायत ही नहीं करते। बिना टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय किए — जिनके डीलर बेरोकटोक फर्जी सिम जारी कर रहे हैं — इस तरह की गिरफ्तारियाँ अस्थायी राहत से अधिक नहीं होंगी।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने किस तरह के साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया?
दिल्ली पुलिस ने तीन तरह के नेटवर्क उजागर किए — 'म्यूल' बैंक खाते तैयार करने वाला गिरोह, फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाला नेटवर्क, और एपीके-आधारित साइबर फ्रॉड मॉड्यूल। इन चार ऑपरेशनों में कुल छह आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
'म्यूल' बैंक खाते क्या होते हैं और इनका दुरुपयोग कैसे होता है?
'म्यूल' खाते वे बैंक खाते होते हैं जो किसी व्यक्ति के नाम पर खोलकर साइबर अपराधियों को बेच दिए जाते हैं। इस मामले में आरोपियों ने शाहबाद डेयरी निवासियों को बीमा व नकद प्रोत्साहन का लालच देकर लगभग 70 ऐसे खाते तैयार किए और उन्हें हैदराबाद के एक संदिग्ध नेटवर्क को सौंप दिया।
फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था?
पुलिस के अनुसार, टेलीकॉम डीलर अतुल ने ग्राहकों की जानकारी के बिना उनकी तस्वीरों और दस्तावेजों से अतिरिक्त सिम कार्ड हासिल किए और उन्हें लगभग ₹1,500 प्रति सिम की दर से साथियों को बेचा। वर्ष 2026 में इस तरह 187 सिम कार्ड जारी किए गए, जो NCRP की 114 शिकायतों और ₹1.40 करोड़ की ठगी से जुड़े हैं।
एपीके-आधारित फ्रॉड में गिरफ्तार सौरव पर क्या आरोप हैं?
जालंधर से गिरफ्तार सौरव पर एपीके-आधारित साइबर फ्रॉड नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। उसके मोबाइल से 124 बैंक खातों व कार्डों की जानकारी मिली और वह साइबर फ्रॉड से लगभग ₹3.73 करोड़ जुटाने का संदिग्ध है। वह पहले भी 8 साइबर अपराध मामलों में संलिप्त रहा है।
पीड़ितों को कितनी राशि वापस दिलाई गई है?
MRM पोर्टल के जरिए साइबर फ्रॉड पीड़ितों को ₹74.94 लाख वापस दिलाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, जांच के दायरे में आए मामलों में शिकायतकर्ताओं को ₹1.12 करोड़ की राशि भी वापस कराई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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