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गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने वलसाड में त्रिमंदिर का भूमि पूजन किया, अंतरधार्मिक सद्भाव का संदेश

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गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने वलसाड में त्रिमंदिर का भूमि पूजन किया, अंतरधार्मिक सद्भाव का संदेश

सारांश

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वलसाड के नंदावाला में दादा भगवान फाउंडेशन के त्रिमंदिर की आधारशिला रखी — एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र जो जैन, शैव और वैष्णव परंपराओं को एकजुट कर धार्मिक विभाजनों से ऊपर उठने का मार्ग प्रशस्त करता है।

मुख्य बातें

गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने 3 नवंबर 2026 को वलसाड जिले के नंदावाला गांव में त्रिमंदिर का भूमि पूजन किया।
त्रिमंदिर जैन धर्म, शैव धर्म, वैष्णव धर्म और अन्य परंपराओं को एक साझा आध्यात्मिक मंच पर लाएगा।
समारोह में वित्त मंत्री कानू देसाई , पूज्य दीपकभाई और तीन विधायक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
दादा भगवान फाउंडेशन अक्रम विज्ञान के प्रसार के लिए देश-विदेश में सत्संग और ज्ञान विधि आयोजित करती है।
CM पटेल ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत' दृष्टिकोण से जोड़ा।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 3 नवंबर 2026 को वलसाड जिले के नंदावाला गांव में दादा भगवान फाउंडेशन द्वारा निर्मित किए जा रहे त्रिमंदिर का भूमि पूजन संपन्न कराया। यह आध्यात्मिक केंद्र जैन धर्म, शैव धर्म, वैष्णव धर्म और अन्य धार्मिक परंपराओं को एक साझा मंच पर लाने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है। समारोह में पूज्य दीपकभाई और राज्य के वित्त मंत्री कानू देसाई की विशेष उपस्थिति रही।

भूमि पूजन का समारोह

मुख्यमंत्री पटेल ने पूज्य दीपकभाई के साथ वैदिक परंपराओं के अनुसार आधारशिला रखी और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर बोलते हुए पटेल ने कहा, 'जब भी हम महात्मा बनकर यहां आते हैं, हम हमेशा प्रार्थना करते हैं कि हम स्वयं को आपके चरणों में समर्पित कर सकें।' उन्होंने परम पूज्य दादा भगवान, पूज्य निरुमा और पूज्य दीपकभाई के उस दृष्टिकोण को भी स्मरण किया जिसमें देशभर के गांवों में ऐसे अंतरधार्मिक मंदिरों की स्थापना की कल्पना की गई थी।

मुख्यमंत्री का संकल्प और विकसित भारत का संदर्भ

पटेल ने उपस्थितजनों से आह्वान किया, 'आइए आज हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि जैसे-जैसे ऐसे और मंदिर बनेंगे, भारत का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा।' उन्होंने इन आध्यात्मिक संस्थानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ये केंद्र राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे। गौरतलब है कि त्रिमंदिर की अवधारणा धार्मिक विभाजनों से ऊपर उठकर आत्म-साक्षात्कार और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने पर केंद्रित है।

त्रिमंदिर और दादा भगवान फाउंडेशन का उद्देश्य

दादा भगवान फाउंडेशन की स्थापना परम पूज्य दादा भगवान द्वारा अक्रम विज्ञान — आध्यात्मिक समझ के एक चरणहीन मार्ग — को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। संगठन का उद्देश्य लोगों को कठोर त्याग या तपस्या की आवश्यकता के बिना, अपने सामान्य दैनिक जीवन को जारी रखते हुए आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने में सहायता करना है। पूज्य निरुमा और वर्तमान आध्यात्मिक गुरु पूज्य दीपकभाई के मार्गदर्शन में, फाउंडेशन भारत और विदेशों में सत्संग, ज्ञान विधि तथा आध्यात्मिक शिविरों का आयोजन करता है।

समारोह में उपस्थित प्रमुख जन प्रतिनिधि

इस भूमि पूजन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जन प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें वलसाड विधायक भरत पटेल, धरमपुर विधायक अरविंद पटेल, कपराडा विधायक जीतू चौधरी, जिला कलेक्टर नितिन सांगवान, जिला विकास अधिकारी अतिराग चपलॉट, पुलिस अधीक्षक युवराजसिंह जडेजा और जिला भाजपा संगठन अध्यक्ष हेमंत कंसारा शामिल थे। इस व्यापक प्रशासनिक और राजनीतिक उपस्थिति ने आयोजन के महत्व को रेखांकित किया।

अंतरधार्मिक सद्भाव का व्यापक संदेश

देशभर में दादा भगवान फाउंडेशन के त्रिमंदिर अंतरधार्मिक सद्भाव और विश्व शांति का संदेश फैलाने के माध्यम के रूप में स्थापित किए जाते रहे हैं। नंदावाला में निर्मित होने वाला यह नया त्रिमंदिर उसी श्रृंखला की एक और कड़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब आध्यात्मिक पर्यटन और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने पर राष्ट्रीय स्तर पर जोर दिया जा रहा है। भविष्य में और अधिक ऐसे केंद्रों की स्थापना के साथ, फाउंडेशन का विस्तार कार्यक्रम जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इसका राजनीतिक संदर्भ भी उल्लेखनीय है — एक भाजपा शासित राज्य में मुख्यमंत्री द्वारा अंतरधार्मिक केंद्र का उद्घाटन 'सबका साथ, सबका विकास' की कथा को व्यावहारिक रूप देने का प्रयास है। गौरतलब है कि दादा भगवान फाउंडेशन दशकों से अपनी अपराजनीतिक छवि बनाए हुए है, इसलिए यह साझेदारी दोनों पक्षों के लिए लाभकारी दिखती है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ऐसे केंद्र जमीनी स्तर पर सांप्रदायिक सद्भाव को मापनीय रूप से बढ़ाते हैं, या केवल प्रतीकात्मक स्तर पर बने रहते हैं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वलसाड का त्रिमंदिर क्या है?
त्रिमंदिर दादा भगवान फाउंडेशन द्वारा स्थापित एक अंतरधार्मिक आध्यात्मिक केंद्र है जो जैन धर्म, शैव धर्म, वैष्णव धर्म और अन्य परंपराओं को एक साझा मंच पर लाता है। इसका उद्देश्य लोगों को धार्मिक विभाजनों से ऊपर उठकर आत्म-साक्षात्कार की ओर मार्गदर्शन करना है।
दादा भगवान फाउंडेशन क्या है और इसकी स्थापना क्यों हुई?
दादा भगवान फाउंडेशन की स्थापना परम पूज्य दादा भगवान द्वारा अक्रम विज्ञान — आध्यात्मिक समझ के एक चरणहीन मार्ग — को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। यह संगठन लोगों को कठोर त्याग की आवश्यकता के बिना सामान्य जीवन जीते हुए आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने में सहायता करता है।
भूमि पूजन समारोह में कौन-कौन उपस्थित थे?
समारोह में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, वित्त मंत्री कानू देसाई, पूज्य दीपकभाई के अलावा वलसाड विधायक भरत पटेल, धरमपुर विधायक अरविंद पटेल, कपराडा विधायक जीतू चौधरी, जिला कलेक्टर नितिन सांगवान और पुलिस अधीक्षक युवराजसिंह जडेजा शामिल रहे।
CM पटेल ने त्रिमंदिर को 'विकसित भारत' से कैसे जोड़ा?
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक संस्थान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' दृष्टिकोण में योगदान देंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि अधिक त्रिमंदिरों के निर्माण से भारत का 'नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा।'
अक्रम विज्ञान क्या है?
अक्रम विज्ञान को आध्यात्मिक समझ का एक चरणहीन मार्ग बताया गया है, जिसे परम पूज्य दादा भगवान ने प्रतिपादित किया था। इसमें किसी कठोर तपस्या या सांसारिक जीवन त्याग की जरूरत नहीं होती और व्यक्ति दैनिक जीवन में रहते हुए आत्म-साक्षात्कार प्राप्त कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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