11 अक्टूबर 2026
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हैदराबाद में ₹60-70 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश, 70 फर्जी खाते देने के आरोप में दो गिरफ्तार

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हैदराबाद में ₹60-70 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश, 70 फर्जी खाते देने के आरोप में दो गिरफ्तार

सारांश

हैदराबाद में साइबर पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जिसने छात्रों और डिलीवरी पार्टनरों से बैंक खाते और सिम कार्ड हासिल कर हरियाणा के साइबर ठगों को भेजे। कथित तौर पर ₹60-70 करोड़ के 450 मामले इन्हीं फर्जी खातों के ज़रिए अंजाम दिए गए।

मुख्य बातें

हैदराबाद साइबर अपराध पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को रामंथपुर निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपी गुम्मा रमेश (39) और मुदाले अनिल (19) पर 70 फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को देने का आरोप है।
ये खाते कथित तौर पर देशभर के 450 साइबर अपराध मामलों में इस्तेमाल हुए, जिनमें लगभग ₹60-70 करोड़ के लेनदेन शामिल हैं।
एक पीड़ित से फेसबुक के ज़रिए पुराने नोट के नाम पर ₹7,93,351 की ठगी की गई थी।
खाते और सिम कार्ड कूरियर द्वारा हरियाणा में मुख्य साइबर गिरोह को भेजे गए; एक फरार आरोपी की तलाश जारी है।

हैदराबाद की साइबर अपराध पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर 70 फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड एकत्र करके साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, ये खाते कथित तौर पर देशभर में 450 साइबर अपराध मामलों में इस्तेमाल किए गए, जिनमें लगभग ₹60-70 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन शामिल हैं।

आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि

गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी हैदराबाद के रामंथपुर इलाके के निवासी हैं। पहले आरोपी गुम्मा रमेश (आयु 39 वर्ष) मूल रूप से कर्नाटक के बीदर जिले से हैं और आर्थिक तंगी के कारण हैदराबाद आकर टैक्सी चालक का काम कर रहे थे। दूसरे आरोपी मुदाले अनिल (आयु 19 वर्ष) ने कमीशन के बदले अलग-अलग बैंकों में तीन बचत खाते खोले और उनके क्रेडेंशियल रमेश को सौंप दिए।

साइबर अपराध पुलिस स्टेशन के प्रभारी पुलिस उपायुक्त एस. चैतन्य कुमार ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उनकी आय व्यक्तिगत खर्चों के लिए अपर्याप्त थी, इसलिए उन्होंने साइबर अपराधियों को फर्जी खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने का निर्णय किया।

मामला कैसे सामने आया

यह गिरफ्तारी एक शिकायत के आधार पर हुई जिसमें पीड़ित ने बताया कि अज्ञात व्यक्तियों ने उसे फेसबुक के माध्यम से एक पुराने एक रुपए के नोट के बदले ₹45 लाख देने का झांसा देकर ₹7,93,351 की ठगी की। इस शिकायत के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D तथा साइबर अपराध अधिनियम की धारा 318(4), 319(2), 336(3) और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।

फर्जी खाता नेटवर्क का तंत्र

आरोप है कि रमेश ने एक फरार आरोपी के साथ मिलकर रामंथपुर और आसपास के इलाकों में छात्रों, डिलीवरी पार्टनरों और अन्य लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते और सिम कार्ड हासिल किए। इसके बाद बैंक पासबुक, एटीएम/डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल और सिम कार्ड हरियाणा में मौजूद मुख्य साइबर अपराधियों को कूरियर के ज़रिए भेजे गए।

गौरतलब है कि यह तथाकथित 'म्यूल अकाउंट' नेटवर्क देशव्यापी साइबर ठगी का एक स्थापित तरीका बनता जा रहा है, जिसमें स्थानीय भर्तीकर्ता आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को निशाना बनाते हैं।

पुलिस जाँच की स्थिति

पुलिस ने आरोपियों से खाता पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज़ बरामद किए हैं। मुख्य आरोपी, जो फिलहाल फरार है, की तलाश जारी है। हरियाणा में सक्रिय मुख्य साइबर गिरोह तक पहुँचने के लिए जाँच एजेंसियाँ अंतर-राज्यीय समन्वय कर रही हैं।

आम जनता पर असर और सावधानी

पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को सचेत किया है कि कमीशन के बदले अपने बैंक खाते या सिम कार्ड किसी अन्य को देना स्वयं एक दंडनीय अपराध है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि साइबर फ्रॉड नेटवर्क अब कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर भर्ती कर रहे हैं — विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमज़ोर युवाओं और श्रमिकों को। आगे की जाँच में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बार-बार इसी तरह के नेटवर्क से संचालन करते पाए गए हैं। स्थानीय भर्तीकर्ताओं को पकड़ना ज़रूरी है, लेकिन शीर्ष गिरोह बेपर्दा हुए बिना यह नेटवर्क खत्म नहीं होगा।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद में साइबर अपराध के इस मामले में क्या हुआ?
हैदराबाद साइबर अपराध पुलिस ने दो आरोपियों — गुम्मा रमेश और मुदाले अनिल — को गिरफ्तार किया है, जिन पर 70 फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने का आरोप है। ये खाते कथित तौर पर देशभर में 450 साइबर अपराध मामलों में इस्तेमाल हुए।
फर्जी बैंक खाते किस काम के लिए इस्तेमाल किए गए?
इन खातों का उपयोग साइबर ठगों द्वारा पीड़ितों से ठगी गई रकम को ट्रांसफर और छुपाने के लिए किया गया। पुलिस के अनुसार, इन खातों के ज़रिए लगभग ₹60-70 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन हुए।
आरोपियों ने फर्जी खाते कैसे जुटाए?
आरोप है कि रमेश ने रामंथपुर और आसपास के इलाकों में छात्रों, डिलीवरी पार्टनरों और अन्य लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते और सिम कार्ड हासिल किए। इसके बाद ये दस्तावेज़ कूरियर के ज़रिए हरियाणा में साइबर अपराधियों को भेजे गए।
क्या अपना बैंक खाता किसी और को देना अपराध है?
हाँ, पुलिस अधिकारियों के अनुसार कमीशन के बदले अपने बैंक खाते या सिम कार्ड किसी अन्य को देना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और साइबर अपराध अधिनियम के तहत दंडनीय है। इस मामले में भी खाता धारकों को संभावित कानूनी दायरे में लिया जा सकता है।
जाँच में आगे क्या होगा?
पुलिस एक फरार मुख्य आरोपी की तलाश कर रही है और हरियाणा में सक्रिय मुख्य साइबर गिरोह तक पहुँचने के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय जारी है। आगे और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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