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क्या भारत-वीमर प्रारूप बैठक में जयशंकर ने यूरोप के साथ बढ़ते संबंधों पर प्रकाश डाला?

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क्या भारत-वीमर प्रारूप बैठक में जयशंकर ने यूरोप के साथ बढ़ते संबंधों पर प्रकाश डाला?

सारांश

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-वीमर प्रारूप बैठक में भाग लिया, जहां उन्होंने यूरोप के साथ बढ़ते संबंधों पर चर्चा की। इस बैठक में पोलैंड, फ्रांस और जर्मनी के मंत्रियों के साथ रणनीतिक मुद्दों पर विचार साझा किए गए। जानें, इस महत्वपूर्ण चर्चा के क्या मायने हैं।

मुख्य बातें

भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक संबंधों में वृद्धि।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर।
वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान जरूरी।
यूरोपीय देशों के साथ गहरे सहयोग की आवश्यकता।
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में संभावनाएं।

पेरिस, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-वीमर प्रारूप बैठक के परिणामस्वरूप पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट और जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया।

इस अवसर पर, विदेश मंत्री जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री बैरोट को बैठक के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि मंत्री वाडेफुल और सिकोरस्की के साथ विचारों का आदान-प्रदान करना बहुत फायदेमंद रहा।

उन्होंने बताया कि बैठक में कई मुद्दों पर संक्षिप्त लेकिन गहरी चर्चा हुई। इससे पहले, उनकी और मंत्री बैरोट के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। फ्रांस भारत का सबसे पुराना रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच संबंध बेहद विशेष हैं। द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मैक्रॉन का जल्द ही भारत में स्वागत किया जाएगा।

डॉ. जयशंकर ने बताया कि यह पहला अवसर है जब भारत इस प्रारूप में शामिल हुआ है। चर्चा का मुख्य ध्यान तीन विषयों पर केंद्रित रहा: भारत-यूरोपीय संघ संबंध, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूक्रेन संघर्षयूरोप के साथ भारत का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है, जो ब्रुसेल्स के साथ सामूहिक प्रयासों और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के समर्थन से स्पष्ट है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सहयोग बढ़ता है, छोटे समूहों में संवाद भी आवश्यक हो जाता है ताकि व्यापक की दिशा को मजबूती मिल सके। आज की बैठक इसी दिशा में एक प्रयास था।

विदेश मंत्री ने आगे बताया कि वर्तमान में दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ वर्षों में, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यह स्थिति स्पष्ट दिखाई दी है। यूरोप भी कई रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। कुछ वैश्विक घटनाएं ऐसी हैं जो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि भले ही हम दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हों, लेकिन इसे ध्यान में रखते हुए विचारों का नियमित आदान-प्रदान और साझा आकलन बहुत आवश्यक हो जाता है।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यूरोपीय संघ और यूरोप के देशों के साथ संबंधों में सबसे अधिक विकास की संभावना है। इस क्षेत्र में अभी भी बहुत क्षमता है और सहयोग के नए अवसर उपलब्ध हैं। वीमर प्रारूप में शामिल तीनों यूरोपीय देश भारत के लिए महत्वपूर्ण भागीदार हैं। आज की चर्चा भारत-यूरोप संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने में सहायक होगी।

उन्होंने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। जो घटनाएं दुनिया को अस्थिर और अनिश्चित बनाती हैं, वही समान विचारधारा वाले देशों के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता को भी मजबूत करती हैं। यही सोच इस बैठक का आधार रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत का यूरोप के साथ संबंध लगातार प्रगति कर रहा है। विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर की यह बैठक महत्वपूर्ण है, जो न केवल द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि वैश्विक मुद्दों पर भी भारत की आवाज को मजबूत करती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-वीमर प्रारूप बैठक का महत्व क्या है?
यह बैठक भारत के यूरोप के साथ संबंधों को और मजबूत करने का एक प्रयास है, जिससे सामूहिक सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ेगा।
डॉ. जयशंकर ने किस मुद्दे पर चर्चा की?
उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ संबंध, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की।
राष्ट्र प्रेस
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