ग्रैंडमास्टर प्रणेश एम. ने कनिजा ओपन 2026 जीता, टाई-ब्रेक में तीन खिलाड़ियों को पछाड़ा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रणेश एम. ने हंगरी के नागीकानिजा में आयोजित प्रतिष्ठित कनिजा ओपन 2026 के ग्रुप-ए में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए खिताब अपने नाम किया। 9 राउंड में 7 अंक अर्जित कर प्रणेश ने तीन अन्य खिलाड़ियों के साथ शीर्ष पर जगह बनाई और बेहतर टाई-ब्रेक स्कोर के आधार पर विजेता घोषित हुए।
मुख्य घटनाक्रम
प्रणेश के साथ संयुक्त रूप से 7 अंक पाने वाले तीन अन्य खिलाड़ी — इज़रायल के ओर ब्रोनस्टीन, यूक्रेन के आंद्रे वोलोकिटिन और भारत के कार्तिक वेंकटरमन — क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। कार्तिक वेंकटरमन अंतिम राउंड में वोलोकिटिन के साथ ड्रॉ खेलने के कारण सीधे खिताब जीतने से चूक गए। ब्रोनस्टीन ने नौवें राउंड में अपने ही देश के आईएम बेनी आइजेनबर्ग को हराकर शीर्ष समूह में जगह बनाई।
भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन
226 खिलाड़ियों वाले ग्रुप-ए में कई अन्य भारतीयों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। नीलाष साहा ने 6.5 अंकों के साथ 10वाँ स्थान हासिल किया। नीतीश बेलुरकर (20वाँ स्थान, 6 अंक), अजय संतोष पर्वथारेड्डी (21वाँ स्थान, 6 अंक) और भट्टाचार्य सोहम (23वाँ स्थान, 6 अंक) भी प्रमुख भारतीय प्रतिभागियों में रहे।
प्रणेश का सफर और पृष्ठभूमि
26 अगस्त 2006 को तमिलनाडु के कराईकुडी में जन्मे मुनिरेथिनम प्रणेश ने जनवरी 2023 में स्वीडन के स्टॉकहोम में रिल्टन कप जीतकर भारत के 79वें ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया था। इससे पहले उन्होंने 2020 में दिल्ली जीएम ओपन में इंटरनेशनल मास्टर का टाइटल और पहला जीएम नॉर्म अर्जित किया था। 2025 में उन्होंने चेन्नई ग्रैंड मास्टर्स के चैलेंजर्स सेक्शन में भी जीत दर्ज की थी। फिडे की अगस्त 2026 रैंकिंग में प्रणेश 2673 रेटिंग के साथ विश्व में 44वें स्थान पर हैं।
साधारण परिवार से असाधारण उड़ान
प्रणेश का पारिवारिक पृष्ठभूमि उनकी उपलब्धियों को और भी प्रेरणादायक बनाती है। उनके पिता मुनिरेथियम कपड़े की दुकान पर काम करते हैं, जबकि माँ मनजुला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। गौरतलब है कि माँ मनजुला ही प्रणेश की पहली शतरंज कोच रही हैं, जिन्होंने उन्हें इस खेल की बारीकियाँ सिखाईं। बड़े भाई दिनेशराजन, जो स्वयं भी एक शतरंज खिलाड़ी हैं, ने भी प्रणेश की प्रशिक्षण यात्रा में अहम भूमिका निभाई।
भारतीय शतरंज का बढ़ता वर्चस्व
यह जीत अंतरराष्ट्रीय शतरंज में भारतीय प्रतिभाओं के बढ़ते दबदबे की पुष्टि करती है। हंगरी का यह टूर्नामेंट भारतीय खिलाड़ियों के लिए लगातार सफलता का मंच बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवा भारतीय ग्रैंडमास्टरों की यह पीढ़ी वैश्विक शतरंज में एक नई शक्ति के रूप में उभर रही है, और आने वाले वर्षों में भारत से और भी बड़े खिताबों की उम्मीद की जा सकती है।