क्या बिहार के डोडा में शहीद हुए सेना के जवान का भोजपुर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ?

Click to start listening
क्या बिहार के डोडा में शहीद हुए सेना के जवान का भोजपुर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ?

सारांश

जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए बिहार के जवान हरे राम कुंवर का अंतिम संस्कार भावुक माहौल में हुआ। उनके छोटे बच्चे, परिवार और स्थानीय लोगों ने श्रद्धांजलि दी। जानें कैसे इस घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया।

Key Takeaways

  • शहीद हरे राम कुंवर का बलिदान
  • उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
  • परिवार का दुख और शोक
  • स्थानीय लोगों की शोक सभा
  • वीरता की कहानी

पटना, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक भयानक घटना में शहीद हुए ३८ वर्षीय सैनिक हरे राम कुंवर का अंतिम संस्कार शनिवार को बिहार के भोजपुर जिले के महुली घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

भारतीय सेना के जवानों ने राष्ट्रीय तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी दी, जबकि उनके ११ वर्षीय बड़े बेटे पीयूष ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान घाट पर मौजूद हर आंख नम थी और माहौल अत्यंत भावुक हो गया।

अंतिम संस्कार से पूर्व शहीद सैनिक के परिवार के सदस्यों ने फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सबसे मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब शहीद के पिता ने अपने बेटे के पार्थिव शरीर के सामने सिर झुकाकर अंतिम प्रणाम किया। वहीं, उनके छोटे बेटे प्रियांशु (८) ने मासूमियत भरे अंदाज में अपने पिता को सलाम कर अंतिम विदाई दी। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।

महुली घाट पर शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण और आसपास के इलाकों के लोग उमड़ पड़े। लोगों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वीर जवान अमर रहे’ के नारे लगाकर वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। शहीद के बड़े भाई जयप्रकाश कुंवर ने बताया कि गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे परिवार को इस हादसे की सूचना मिली, जिसके बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

उन्होंने बताया कि हरे राम कुंवर वर्ष २००९ में दानापुर स्थित बिहार रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। राष्ट्र सेवा को वे अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानते थे और लंबे समय से सीमावर्ती इलाकों में तैनात थे। दुर्घटना से कुछ ही घंटे पहले उन्होंने अपनी मां शांति देवी से फोन पर बातचीत की थी। परिवार के लिए वह बातचीत अब उनकी सबसे आखिरी, लेकिन बेहद दर्दनाक स्मृति बन गई है।

शहादत की खबर जैसे ही बरहारा प्रखंड के नाथमलपुर गांव पहुंची, पूरा गांव शोक में डूब गया। सड़कों पर सन्नाटा छा गया और हर घर में मातम पसर गया। शहीद की पत्नी खुशबू देवी का दुख असहनीय है और वे बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। उनके दोनों बेटे पीयूष और प्रियांशु ने बहुत छोटी उम्र में अपने पिता को हमेशा के लिए खो दिया। ग्रामीण और रिश्तेदार शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस अपूरणीय क्षति के सामने शब्द भी कम पड़ते नजर आए।

शहीद के पिता नथमलपुर गांव में रहते हैं, जबकि उनके दादा रामगीता कुंवर अब भी जीवित हैं। अपने पोते की शहादत की खबर से बुजुर्ग दादा गहरे सदमे में हैं। लोगों के दिलों में हरे राम कुंवर के राष्ट्र के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान पर गर्व भी साफ झलक रहा है।

शहीद सैनिक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में खानी टॉप के पास हुई इस दुखद दुर्घटना में भोजपुर जिले के बरहारा प्रखंड के नथमलपुर गांव के बहादुर सैनिक हरे राम कुंवर की शहादत अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि वे वीर जवान के बलिदान को नमन करते हैं और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।

बता दें कि भारतीय सेना का एक वाहन २२ जनवरी को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में खानी टॉप के पास नियंत्रण खो बैठा और खाई में जा गिरा। इस भीषण हादसे में दस सैनिक शहीद हो गए, जबकि ११ अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के वक्त सभी सैनिक ऑपरेशनल तैनाती के लिए जा रहे थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है और शहीद जवानों को पूरे राष्ट्र की ओर से नमन किया जा रहा है।

Point of View

बल्कि पूरे देश के लिए एक दुखद क्षण है। हमें अपने सशस्त्र बलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की आवश्यकता है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना हमारी सुरक्षा में लगे रहते हैं।
NationPress
10/02/2026

Frequently Asked Questions

हरे राम कुंवर की शहादत कब हुई?
हरे राम कुंवर की शहादत २२ जनवरी को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुई।
उनका अंतिम संस्कार कहाँ हुआ?
उनका अंतिम संस्कार बिहार के भोजपुर जिले के महुली घाट पर हुआ।
उन्हें किस सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई?
उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
उनके परिवार में कौन-कौन हैं?
उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे और माता-पिता शामिल हैं।
इस घटना ने गांव पर क्या असर डाला?
इस घटना ने पूरे गाँव को शोक में डुबो दिया और लोग एकत्रित होकर श्रद्धांजलि अर्पित करने आए।
Nation Press