क्या बिहार को विकसित बनाने के लिए मंत्रिमंडल की बैठक में सात निश्चय-3 को मिली मंजूरी?
सारांश
Key Takeaways
- सात निश्चय-3 का लक्ष्य 2025-2030 में बिहार को विकसित बनाना है।
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया।
- यह योजना रोजगार, कृषि, और शिक्षा पर जोर देती है।
- भविष्य का दृष्टिकोण: न्याय के साथ विकास।
- पिछले 20 वर्षों में राज्य में विकास की निरंतरता।
पटना, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की मंत्रिमंडल की बैठक मंगलवार को आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के विकास के लिए सात निश्चय-3 के गठन को स्वीकृति दी गई। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की और इसमें केवल एक प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
बैठक के बाद बताया गया कि बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव और सरकार के गठन के बाद 'न्याय के साथ विकास' पर आधारित साझा कार्यक्रम के संकल्प को दोहराते हुए अगले पांच वर्षों (2025-2030) में बिहार को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
इसी सोच के तहत 2025 से 2030 तक के लिए सात निश्चय-3 का गठन किया जा रहा है। इसमें दोगुना रोजगार - दोगुनी आय, समृद्ध उद्योग - सशक्त बिहार, कृषि में प्रगति - प्रदेश की समृद्धि, उन्नत शिक्षा - उज्जवल भविष्य, सुलभ स्वास्थ्य - सुरक्षित जीवन, मजबूत आधार - आधुनिक विस्तार, और सबका सम्मान - जीवन आसान जैसी सात योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, उद्योग और कृषि पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत बिहार में दोगुना रोजगार, किसानों की दोगुनी आय, उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए विकसित बिहार का लक्ष्य रखा है।
यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले सात निश्चय के माध्यम से बिहार में विकास योजनाओं को लागू किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 24 नवंबर 2005 से राज्य में कानून का राज स्थापित किया है और पिछले 20 वर्षों में सभी वर्गों और क्षेत्रों के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं।
इसके तहत सात निश्चय (2015-2020) और सात निश्चय-2 (2020-2025) के तहत तय लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद अब सात निश्चय-3 को लागू करने का निर्णय लिया गया है। हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने बिहार को विकसित बनाने का वादा किया है और इसके तहत सरकार लगातार प्रयास कर रही है।