क्या बिहार में कर्मयोगिनी माता अहिल्या के महानाट्य ने महारानी की गौरवगाथा को जीवंत किया?
सारांश
Key Takeaways
- माता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर आयोजित भव्य कार्यक्रम।
- उप मुख्यमंत्री ने संस्कृति और सेवा के महत्व पर जोर दिया।
- नाटक ने अहिल्याबाई के जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया।
- हमें अपने ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
- संस्कृति का निर्माण मान्यताओं से होता है।
पटना, २२ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पटना के नाट्य स्थल प्रेमचंद रंगशाला में महान शासिका माता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर गुरुवार को कर्मयोगिनी माता अहिल्या महानाट्य का भव्य मंचन किया गया। संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने अहिल्याबाई के बचपन से लेकर महान शासनकाल तक की जीवन-यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
नाटक के जरिए उनके बालिका से लेकर महारानी तक के दौर को सजीव करने की कोशिश की गई। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में अहिल्याबाई के शासन को याद किया। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र की बनावट के पीछे हमेशा एक संस्कृति की बनावट छिपी रहती है, लेकिन स्वयं संस्कृति का आकार अधिकतर उन मान्यताओं के द्वारा तय होता है जो वहां के लोग अपने बारे में संजोते हैं।
हमारी सनातन संस्कृति में ईश्वर की आराधना भी 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के भाव से करने पर बल दिया गया है, और सामाजिक मूल्य भी सबके समग्र कल्याण की धुरी पर टिका है। हमारे यहां शासन का सही अर्थ जनता की सेवा करना और उनके जीवन में सुधार लाना होता है। इसे ही आज हमारे प्रधानमंत्री 'सबका साथ सबका विकास' या 'नागरिक देवो भव' की भावना से आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज हम जिस महान देवी की पावन विरासत को महानाट्य के जरिए नमन कर रहे हैं, उन्होंने भी प्रभु सेवा और जन सेवा को एक दृष्टि से देखा था, इसीलिए वे आज ३०० वर्षों बाद भी जनमानस में लोकमाता के रूप में याद की जाती हैं। लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर वो दिव्य-आत्मा थीं, जो हमेशा हाथ में शिवलिंग लेकर चलती थीं और शिव की तरह ही गरीब कल्याण, नारी कल्याण और संस्कृति कल्याण ही उनके लिए कर्म का धर्म और धर्म का मर्म था।
उन्होंने हुनर आधारित, पारिवारिक विरासत पर आधारित कारीगरी को जो प्रोत्साहन दिया था, वह आज हमारे लिए रोल मॉडल है। उप मुख्यमंत्री सिन्हा ने लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जैसी दिव्य-आत्मा की विरासत को याद करते हुए अपने जीवन में उतारने का सच्चा प्रयास हम सभी को करना है, तभी हम अपनी ऐसी महान विभूति को सच्ची श्रद्धांजलि भी दे सकेंगे और अपने राष्ट्रधर्म के पालन में भी सफल हो सकेंगे।