पवन खेड़ा ने त्योहारों में बढ़ती नफरत पर चिंता जताई, प्रशासन से सख्त कार्रवाई का आह्वान किया
सारांश
Key Takeaways
- पवन खेड़ा का वीडियो संदेश त्योहारों के दौरान बढ़ते तनाव पर आधारित है।
- उन्होंने सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए प्रशासन से कार्रवाई की अपील की।
- सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के प्रमुख नेता पवन खेड़ा ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने देश में त्योहारों के दौरान बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और नफरत भरे माहौल पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में त्योहारों की मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
पवन खेड़ा ने कहा कि भारत में होली, ईद, क्रिसमस, हनुमान जयंती और राम नवमी जैसे त्योहार परंपरागत रूप से खुशी, मेल-जोल और सामाजिक सौहार्द के प्रतीक रहे हैं। लेकिन पिछले 10-12 वर्षों से ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें इन अवसरों पर टकराव और तनाव को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हनुमान जयंती के दौरान मस्जिदों के बाहर तेज संगीत बजाकर माहौल को बिगाड़ा जाता है, जबकि क्रिसमस पर चर्चों में उपद्रव की घटनाएं सामने आती हैं।
कांग्रेस नेता ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि नफरत फैलाने वाले बयानों और गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे एक ‘एंट्रेंस टेस्ट’ चल रहा है, जिसमें जो जितना ज्यादा हेट स्पीच करेगा, वह उतना ही आगे बढ़ेगा। दिल्ली के उत्तम नगर में हाल ही में हुई होली के दौरान हत्या की घटना का जिक्र करते हुए खेड़ा ने आरोप लगाया कि इस मामले को सांप्रदायिक रंग दिया गया और इसके बाद माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। उन्होंने दावा किया कि राजधानी की सड़कों पर भड़काऊ नारे लगाए गए, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
खेड़ा ने वाराणसी, पुणे और बिहार के मधुबनी में हुई कथित घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक आधार पर हिंसा और हमलों की घटनाएं चिंताजनक हैं। अपने संदेश में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी टिप्पणी की और कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांतों पर आधारित रही है, और देश के ऐतिहासिक संबंधों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
वीडियो के अंत में पवन खेड़ा ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन से अपील की कि वे समय रहते हस्तक्षेप कर नफरत के माहौल को बढ़ने से रोकें। उन्होंने इसे “इम्तिहान की घड़ी” बताते हुए कहा कि यह केवल सरकार या पुलिस के लिए नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के लिए एक बड़ी परीक्षा है कि वे सामाजिक सौहार्द और देश की साझा विरासत को बनाए रखें। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नफरत फैलाने वाली ताकतों का मिलकर सामना करें और देश की एकता एवं सांस्कृतिक विरासत को कमजोर न होने दें।