क्या बिहार एसआईआर में केवल एक पार्टी ने उठाई आपत्ति? अब भी 6 दिन बाकी हैं

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क्या बिहार एसआईआर में केवल एक पार्टी ने उठाई आपत्ति? अब भी 6 दिन बाकी हैं

सारांश

क्या बिहार के चुनावी पुनरीक्षण में केवल एक पार्टी का ही विरोध है? जानिए इस प्रक्रिया के बारे में और क्या हैं अगले कदम, सिर्फ 6 दिन बचे हैं।

मुख्य बातें

6 दिन बाकी हैं दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए।
केवल कम्युनिस्ट पार्टी ने आपत्ति उठाई है।
नए मतदाताओं के 4,33,214 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
दावों और आपत्तियों का निपटारा 7 दिन में किया जाएगा।
प्रारूप मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए आदेश आवश्यक है।

नई दिल्ली, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के संबंध में एक दैनिक बुलेटिन जारी किया है। ईसीआई ने जानकारी दी है कि 26 दिन बीतने के बाद केवल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) की ओर से 10 आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार, 1 अगस्त 2025 (दोपहर 3 बजे) से 26 अगस्त (सुबह 10 बजे) तक के आंकड़ों के अनुसार, दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए अब केवल 6 दिन शेष हैं। इस दौरान केवल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) की ओर से आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जिनका समाधान 7 दिन के भीतर किया जाएगा।

ईसीआई ने बताया कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नए मतदाताओं से फॉर्म 6 (घोषणा-पत्र सहित) के तहत कुल 4,33,214 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनका निपटारा अभी बाकी है। इसके अलावा, योग्य मतदाताओं को शामिल करने और अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए ईआरओ द्वारा अब तक कोई दावा या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है।

इसके अतिरिक्त, मतदाताओं से सीधे प्राप्त दावों और आपत्तियों की संख्या 1,62,453 है, जिनमें से 17,516 का निपटारा 7 दिनों के बाद किया गया है।

नियमों के अनुसार, दावों और आपत्तियों का निस्तारण संबंधित ईआरओ या एआरओ द्वारा पात्रता सत्यापन और 7 दिन की नोटिस अवधि पूर्ण होने के बाद ही किया जाएगा।

1 अगस्त 2025 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची से किसी भी नाम को बिना जांच और उचित अवसर दिए हटाया नहीं जा सकता। इसके लिए स्पष्ट आदेश पारित करना अनिवार्य है। प्रारूप मतदाता सूची में शामिल न किए गए नामों की सूची (कारण सहित) जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ/डीएम) और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर ईपीआईसी नंबर के साथ खोज योग्य रूप में उपलब्ध है। असंतुष्ट व्यक्तियों को आधार कार्ड की प्रति के साथ अपने दावे प्रस्तुत करने की अनुमति है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि बिहार चुनाव में केवल एक पार्टी द्वारा आपत्ति उठाना एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि मतदाता सूची में कई नए मतदाता शामिल हो रहे हैं। यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार एसआईआर क्या है?
बिहार एसआईआर का मतलब है विशेष गहन पुनरीक्षण , जो निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची की सफाई और सुधार के लिए किया जाता है।
आपत्तियां कैसे दर्ज कर सकते हैं?
आपत्तियां दर्ज करने के लिए आपको संबंधित फॉर्म भरकर निर्वाचन कार्यालय में जमा करना होगा।
मतदाता सूची में नाम कैसे जोड़ा जाता है?
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 भरा जाता है, जिसमें नए मतदाता की जानकारी दी जाती है।
क्या आपत्तियों का निपटारा तुरंत होता है?
नहीं, आपत्तियों का निपटारा संबंधित ईआरओ या एआरओ द्वारा 7 दिन के भीतर किया जाएगा।
क्या बिना जांच नाम हटाया जा सकता है?
नहीं, बिना उचित जांच और आदेश के नाम नहीं हटाए जा सकते।
राष्ट्र प्रेस
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