बीजापुर में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में दो माओवादी ढेर, भारी हथियार बरामद
सारांश
Key Takeaways
- बीजापुर में मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए।
- सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार बरामद किए।
- यह अभियान खुफिया जानकारी पर आधारित था।
- मुठभेड़ में शामिल सुरक्षाबलों की तत्परता सराहनीय है।
- इस घटना ने माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
बीजापुर, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के इंद्रावती नदी क्षेत्र में सुरक्षाबलों के साथ एक मुठभेड़ में गुरुवार को दो माओवादी मार गिराए गए और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, बीजापुर के इंद्रावती नदी क्षेत्र में माओवादियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद यह अभियान शुरू किया गया था। सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम ने क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया।
इस अभियान के दौरान गुरुवार सुबह इंद्रावती नदी क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच गोलीबारी हुई। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि मुठभेड़ के बाद इलाके की तलाशी के दौरान वर्दीधारी माओवादियों के दो शव मिले हैं।
उन्होंने कहा कि घटनास्थल से एसएलआर राइफल, आईएनएसए राइफल और 12 बोर राइफल सहित कई हथियार जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, विस्फोटक और माओवादी गतिविधियों से जुड़े अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टालिंगम ने बताया कि आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान अभी भी जारी है और एक विस्तृत रिपोर्ट अलग से जारी की जाएगी। ऑपरेशन जारी रहने के कारण आगे की जानकारी की प्रतीक्षा है।
इसी बीच, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है, जहां कोर्ट ने दो माओवादियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास और 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। दोषियों के नाम हुंगा उर्फ गुट्टम सोडी और जोगा कुदामी हैं। दोनों सुकमा जिले के गदिरास पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले पोरडेम गांव के निवासी हैं, जिन्हें 20 मई 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
अरनपुर पुलिस स्टेशन में छत्तीसगढ़ विशेष लोक सुरक्षा अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच करने के बाद अदालत ने पाया कि दोनों के पास टिफिन बम और डेटोनेटर सहित विस्फोटक थे और वे उन पर नियंत्रण रखते थे।
न्यायालय ने दोनों को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4 (बी) के तहत दोषी ठहराया और प्रत्येक को पांच वर्ष के कठोर कारावास और 5,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न चुकाने पर उन्हें छह महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ेगा।