महागठबंधन के पटना मार्च पर BJP-JDU का पलटवार: 'राजनीतिक हताशा का प्रदर्शन'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और अन्य विपक्षी दलों के महागठबंधन ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में लोक भवन तक मार्च निकाला, जिसके जवाब में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। दोनों सत्तापक्षी दलों के नेताओं ने एक स्वर में इस मार्च को 'राजनीतिक हताशा का प्रदर्शन' करार दिया और कहा कि जो दल कभी बूथ कैप्चरिंग के आरोपों में घिरे रहे, वे आज मतदाता सूची सत्यापन (SIR) और फर्जी वोटरों का मुद्दा उठा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस मार्च पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'यह राजनीतिक हताशा का प्रदर्शन है। जो लोग कल तक बूथ कैप्चरिंग के जरिए सरकारें बनाते थे, वे अब एसआईआर और फर्जी वोटरों की बात कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस परिवार पर 'नौकरी के बदले जमीन' मामले में चार्जशीट दायर हो चुकी है, वही परिवार आज ईमानदारी और शुचिता की बातें कर रहा है।
सरावगी ने यह भी रेखांकित किया कि राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पशुपालन घोटाले में सजायाफ्ता हैं और अभी भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया में दोहरी वोटर आईडी, मृत व्यक्तियों और अन्यत्र बस चुके लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, और उस समय किसी ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्री रामकृपाल यादव ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में निकाले गए इस 'आक्रोश मार्च' पर कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिना किसी दबाव में आए अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए लोकतंत्र को स्थापित किया। उन्होंने कहा, 'ये लोग सत्ता से दूर हो गए हैं, जो गुस्सा है वह स्वाभाविक है, इसीलिए गुस्सा मार्च निकाल रहे हैं।'
JDU का हमला — तेजस्वी पर निशाना
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा, 'तेजस्वी यादव, राहुल गांधी के ही संक्षिप्त संस्करण हैं। वे काम नहीं करना चाहते, बल्कि एक पॉलिटिकल टूरिस्ट के तौर पर विदेश यात्राएँ करते हैं।' रंजन ने आरोप लगाया कि बिहार में बाढ़ और सूखे के संकट के समय या विधानसभा सत्र के दौरान तेजस्वी कहीं नजर नहीं आते और केवल अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मैदान में उतरते हैं।
विपक्ष के मार्च की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि महागठबंधन ने यह मार्च मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में निकाला। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और विपक्ष मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जमीन तैयार करने में जुटा है। आलोचकों का कहना है कि SIR के नाम पर हजारों वास्तविक मतदाताओं के नाम कटे हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे शुद्धिकरण की वैध प्रक्रिया बताता है।
आगे क्या होगा
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बिहार में मतदाता सूची विवाद आने वाले महीनों में और गहरा सकता है, खासकर जब चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न दलों की कानूनी याचिकाएँ अदालतों में लंबित हैं। सत्ता पक्ष और महागठबंधन दोनों के बीच यह वाक्युद्ध बिहार के चुनावी माहौल को गर्म बनाए रखेगा।