तेजस्वी यादव का राजभवन मार्च: 'वोट चोरी कर लोकतंत्र खत्म हुआ, मोदी-शाह-ज्ञानेश कुमार दोषी'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए घोषणा की कि विपक्षी दल गुरुवार को राजभवन मार्च करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि 'वोट चोरी' के ज़रिये देश के लोकतंत्र को कमज़ोर करने की कोशिश की गई है और दोषियों को सज़ा दिलाना विपक्ष का उद्देश्य है।
राजभवन मार्च का कारण
तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी कराने और लोकतंत्र को नष्ट करने का षड्यंत्र रचने का आरोप है। उन्होंने दावा किया कि फर्जी चुनाव कराकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिताने का काम ज्ञानेश कुमार ने किया। यह आरोप कथित तौर पर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर विपक्ष की व्यापक चिंताओं का हिस्सा है।
विपक्ष की मांगें
तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि जब इन कथित गड़बड़ियों का भंडाफोड़ हुआ, तो लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दल एकजुट हुए। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने लोकतंत्र को खत्म करने के लिए षड्यंत्र रचा है, उन षड्यंत्रकारियों को सज़ा मिले, इसके लिए हम लोग राजभवन मार्च के लिए जा रहे हैं।' विपक्ष की माँग है कि आगामी चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों तथा सभी राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर और लेवल प्लेइंग फील्ड सुनिश्चित किया जाए।
शोक संदेश: नाना पाटेकर और हेमंत सोरेन की माँ
तेजस्वी यादव ने इस अवसर पर बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'वह एक बड़े कलाकार रहे। बॉलीवुड के लिए यह एक बड़ी क्षति हुई है।' उन्होंने दिवंगत कलाकार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकसंतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।
इसके अलावा, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता के निधन पर भी तेजस्वी यादव ने शोक जताया। उन्होंने कहा कि दोनों परिवारों के बीच पुराने पारिवारिक संबंध रहे हैं और इस दुख की घड़ी में वे पूरी तरह सोरेन परिवार के साथ खड़े हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह राजभवन मार्च ऐसे समय में आया है जब बिहार में चुनावी राजनीति का माहौल गरमाया हुआ है और विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहा है। तेजस्वी यादव ने साफ किया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।