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तेजस्वी के 'लोक भवन मार्च' पर एनडीए का पलटवार: 'जनादेश नहीं, पहले पार्टी की समीक्षा करें'

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तेजस्वी के 'लोक भवन मार्च' पर एनडीए का पलटवार: 'जनादेश नहीं, पहले पार्टी की समीक्षा करें'

सारांश

बिहार चुनाव में करारी हार के बाद तेजस्वी यादव के 'लोक भवन मार्च' का ऐलान एनडीए को रास नहीं आया। जेडीयू और BJP ने एक साथ कहा — 25 सीटों पर सिमटी पार्टी पहले आत्ममंथन करे, सड़क पर उतरने से पहले जनादेश का सम्मान करे।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को 'लोक भवन मार्च' का ऐलान किया है, जिस पर एनडीए ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी यादव की पार्टी बिहार विधानसभा में 25 सीटों पर सिमट गई है और उन्हें पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
एनडीए को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 200 से अधिक सीटों का जनादेश मिला।
BJP नेता मृत्युंजय तिवारी ने इंडी गठबंधन के सीईसी ज्ञानेश कुमार विरोधी प्रदर्शन को 'राजनीतिक ड्रामा' बताया।
सर्वोच्च न्यायालय ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दरभंगा और मुजफ्फरपुर में एनडीए के नामांकन समन्वय की पुष्टि की।

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक सरगर्मी थमने का नाम नहीं ले रही। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा 8 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित 'लोक भवन मार्च' के ऐलान के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने विपक्ष पर तीखा पलटवार किया है। जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ने एक स्वर में तेजस्वी यादव को आत्ममंथन की नसीहत दी है।

जेडीयू का तेजस्वी पर सीधा हमला

जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने तेजस्वी यादव के प्रस्तावित मार्च पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेजस्वी यादव को सड़क पर उतरने से पहले अपनी पार्टी की स्थिति पर गहन विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने कभी बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी का गौरव हासिल किया था, वह आज 25 विधायकों तक सिमट कर रह गई है और उनके नेता मुश्किल से विपक्ष के नेता का पद बचा पाए हैं।

राजीव रंजन ने आगे कहा कि तेजस्वी यादव अपनी पार्टी के लगातार कमज़ोर होने के कारणों को समझने के लिए तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार, विपक्ष को जनता के जनादेश को स्वीकार करते हुए अपनी राजनीतिक रणनीति और संगठन की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव अभी तक चुनावी हार के सदमे से बाहर नहीं निकल पाए हैं।

एनडीए को मिला भारी जनादेश

जेडीयू प्रवक्ता ने बिहार के मतदाताओं का संदर्भ देते हुए कहा कि जनता ने पिछले 20 वर्षों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों का मूल्यांकन किया और राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का श्रेय उन्हें दिया। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को 200 से अधिक सीटों का भारी जनादेश मिला, जबकि पिछली विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी रहे तेजस्वी यादव का दल इस बार 25 सीटों पर सिमट गया। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भी इंडी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।

भाजपा का इंडी गठबंधन पर निशाना

BJP नेता मृत्युंजय तिवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन चाहे जितने मार्च निकाल ले, वह अब केवल सड़कों पर ही दिखाई देगा और सत्ता में आने की उसकी कोई संभावना नहीं है।

मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का भरोसा और विश्वास हासिल करना सबसे ज़रूरी है — जनता ही सर्वोपरि है। उनके अनुसार, विपक्ष जनता का विश्वास खो चुका है और अब विरोध प्रदर्शन के ज़रिए राजनीतिक ड्रामा कर रहा है। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं — अदालत और चुनाव आयोग — के फ़ैसलों पर लगातार सवाल उठाने का आरोप भी लगाया।

सुप्रीम कोर्ट नोटिस पर भाजपा की प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस पर मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि अदालत जो भी फ़ैसला करेगी, उस पर विचार किया जाएगा और चुनाव आयोग सभी मुद्दों पर अपना जवाब देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग जनता का भरोसा नहीं जीत पाते और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं करते, वे ही लोकतंत्र और संविधान को कमज़ोर करने की कोशिश करते हैं।

एनडीए में समन्वय पर संजय झा की सफाई

जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने एनडीए के भीतर सहयोगी दलों के बीच समन्वय पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वह स्वयं दरभंगा और मुजफ्फरपुर में थे, जबकि जेडीयू और गठबंधन के अन्य नेता अलग-अलग क्षेत्रों में नामांकन कार्यक्रमों में शामिल हुए। शाम को सभी नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नामांकन प्रक्रिया और विभिन्न सीटों की स्थिति का विस्तृत फ़ीडबैक दिया। बिहार की राजनीति में आने वाले दिन और भी तीखे बयानों के गवाह बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की कवायद है। एनडीए का जवाबी हमला भी रणनीतिक है — जीत के बाद विपक्ष को लगातार रक्षात्मक रखना सत्तारूढ़ दलों की आज़माई हुई चाल है। इस पूरे घटनाक्रम में सीईसी विवाद और सुप्रीम कोर्ट नोटिस एक संवेदनशील परत जोड़ते हैं, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर हाशिये पर रख देती है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी यादव का 'लोक भवन मार्च' क्या है और कब होगा?
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में 'लोक भवन मार्च' का ऐलान किया है। यह मार्च बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों और चुनाव आयोग संबंधी विवादों के बीच प्रस्तावित किया गया है।
जेडीयू ने तेजस्वी यादव की आलोचना क्यों की?
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी यादव की पार्टी बिहार विधानसभा में 25 सीटों पर सिमट गई है और उन्हें चुनावी हार के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए। जेडीयू का आरोप है कि तेजस्वी यादव जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे।
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को कितनी सीटें मिलीं?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को 200 से अधिक सीटों का जनादेश मिला। वहीं, पिछली विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी रहे तेजस्वी यादव का दल इस बार 25 सीटों पर सिमट गया।
सीईसी ज्ञानेश कुमार विवाद क्या है और सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इंडी गठबंधन इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है।
BJP ने इंडी गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर क्या कहा?
BJP नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि इंडी गठबंधन चाहे जितने मार्च निकाल ले, वह अब केवल सड़कों पर ही दिखाई देगा। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान न करने और राजनीतिक ड्रामा करने का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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