तेजस्वी यादव की असफलता से महागठबंधन को राज्यसभा चुनाव में मिली हार: राजीव रंजन
सारांश
Key Takeaways
- एनडीए की जीत ने विपक्ष की कमजोरी को उजागर किया है।
- तेजस्वी यादव की अपरिपक्वता महागठबंधन के लिए हानिकारक साबित हुई।
- राजीव रंजन ने नीतीश कुमार के मार्गदर्शन की सराहना की।
पटना, १७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की पाँच राज्यसभा सीटों पर एनडीए की जीत पर जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि यह जीत पूर्व निर्धारित थी। राजद नेता तेजस्वी यादव की अपरिपक्वता के कारण महागठबंधन को राज्यसभा चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा।
राजीव रंजन ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि 'हम पहले से ही आश्वस्त थे और हमने बार-बार कहा था कि हम पाँचों सीटें जीतेंगे। विपक्ष में जो अंदर ही अंदर हलचल थी, उसकी हमें पहले से जानकारी थी। तेजस्वी यादव ने गठबंधन को एकजुट रखने में पूरी तरह से असफलता दिखाई है। यह नतीजा दिखाता है कि एनडीए मजबूत है और इसका कोई विकल्प नहीं है।'
सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने पर उन्होंने कहा कि नई सरकार को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा। राज्यसभा की गरिमा भी बढ़ेगी और उनके नेतृत्व में यह नई ऊँचाइयों को छुएगी।
तेजस्वी यादव के बयान पर जदयू नेता ने कहा कि वे अपने विधायकों को एकजुट नहीं कर पाए हैं। कांग्रेस के विधायकों को वोट देने के लिए संगठित नहीं कर पाने का यह उनकी कमी है। महागठबंधन कमजोर हो रहा है, इस पर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को गंभीरता से सोचना चाहिए।
एलपीजी संकट के बीच भारतीय जहाज 'शिवालिक' के बाद 'नंदा देवी' के भारत पहुंचने पर राजीव रंजन ने कहा कि ये दो जहाज कुछ हद तक विपक्ष के आरोपों का ठोस जवाब हैं। यह साबित करता है कि भारतीय कूटनीति का जादू पूरी दुनिया में छा रहा है और हमारी कोशिशों का सभी सम्मान कर रहे हैं।
ओडिशा में बीजेडी-कांग्रेस विधायकों की क्रॉस-वोटिंग पर राजीव रंजन ने कहा कि अब यह एक राष्ट्रीय लहर बन चुकी है। कांग्रेस का जो स्थान आजादी के बाद के प्रारंभिक दशकों में था, आज भारतीय जनता पार्टी और एनडीए परिवार ने इतना बड़ा आकार ले लिया है कि सभी दलों की निगाहें अब एनडीए परिवार की ओर हैं। इसलिए ओडिशा में जो हुआ, वह अप्रत्याशित नहीं है।