तेजस्वी यादव का दावा: धोखे के बिना हमारी जीत होती तय
सारांश
Key Takeaways
- महागठबंधन की हार का मुख्य कारण धोखा है।
- तेजस्वी यादव ने भाजपा पर धनबल के उपयोग का आरोप लगाया।
- एनडीए के सभी प्रत्याशी जीते हैं।
- राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना है।
- तेजस्वी ने एआईएमआईएम और बसपा से समर्थन लिया।
पटना, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी की हार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर कुछ लोग धोखा नहीं देते, तो हमारी जीत निश्चित थी।
चुनाव परिणाम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि महागठबंधन के पास शुरुआत में मजबूत बढ़त थी। पहले से यह तय था कि हमारे पास पांचवें प्रत्याशी के लिए छह वोट और एनडीए के पास तीन वोट कम थे। फिर भी, हमने लड़ाई चुनना पसंद किया और झुकने के बजाय उनके विचारधारा से लडऩे का फैसला किया।
तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि हमने एआईएमआईएम और बसपा से समर्थन प्राप्त किया और हमारी संख्या छह तक पहुँच गई। उन्होंने 'हॉर्स ट्रेडिंग' का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा का 'चाल, चरित्र और चेहरा' हमेशा से धोखे और धनबल का रहा है। यह केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि कई राज्यों में ऐसा किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि बिहार में राज्यसभा चुनाव में एनडीए के सभी पांच प्रत्याशी विजयी हुए हैं। सोमवार शाम मतगणना के बाद एनडीए के सभी उम्मीदवारों, जिनमें नीतीश कुमार, नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश राम शामिल हैं, को जीत का ऐलान किया गया।
यह भी बताया गया कि एनडीए के पांचवे उम्मीदवार शिवेश कुमार को द्वितीय वरीयता के आधार पर जीत मिली है, लेकिन उन्होंने सबसे अधिक मत प्राप्त किए हैं। चुनाव में महागठबंधन की तरफ से राजद ने अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारा था, जिसके बाद पांचवीं सीट को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। राज्यसभा चुनाव के कारण बिहार की राजनीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव होना तय है। नीतीश कुमार को ऊपरी सदन में जाने के लिए राज्य का मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।