भाजपा सांसदों ने बिहार राज्यसभा चुनाव को बताया 'भरोसे की जीत'
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा ने सभी सीटें जीतीं।
- जनता का विश्वास मोदी पर कायम।
- विपक्ष के लोग एकजुट नहीं।
- महागठबंधन की गंभीरता पर प्रश्न।
- भाजपा का संगठन मजबूत।
नई दिल्ली, १७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार राज्यसभा चुनाव के परिणामों के बाद भाजपा सांसदों ने इसे एनडीए की रणनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर जनता और विधायकों के भरोसे का परिणाम करार दिया। भाजपा सांसदों ने कहा कि विपक्ष के लोग भी अब उनकी नीतियों से परेशान हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच भाजपा के प्रति आकर्षण बढ़ा है और राज्यसभा चुनाव में यह भरोसा साफ-साफ दिखाई दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति जनता के विश्वास को चुनाव परिणामों का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एनडीए और भी मजबूत होगी।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कांग्रेस और महागठबंधन पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस ने व्हिप तक जारी नहीं किया और राहुल गांधी कंबोडिया तथा तेजस्वी यादव यूरोप में छुट्टियां मनाते रहे। संजय जायसवाल ने इसे महागठबंधन की गैर गंभीरता बताया और कहा कि इतनी बड़ी गलती केवल राहुल गांधी के नेतृत्व में ही संभव थी।
केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि यह चुनाव परिणाम एनडीए की जीत और भाजपा नेतृत्व की गठबंधन के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। इसी प्रतिबद्धता के कारण बिहार की सभी पांच राज्यसभा सीटें एनडीए ने जीती हैं। विपक्ष के लोग एक साथ नहीं हैं और हर कोई एक-दूसरे को दबाने की कोशिश कर रहा है, तो वह जनता का विकास कैसे कर सकता है?
भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने क्रॉस-वोटिंग की खबरों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने गठबंधन में भी विश्वासघात कर रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में पांचों सीटें एनडीए ने जीती हैं और यह गठबंधन की मजबूती और संगठन की स्पष्टता का प्रमाण है। मैं सभी को बधाई देता हूं।
भाजपा सांसद नरेश बंसल ने महागठबंधन को लेकर कहा कि पिछले 70 वर्षों से उनकी यही प्रवृत्ति रही है कि वे हर परिस्थिति में आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके लोग उनके साथ नहीं हैं और इसलिए उनके आरोपों में कोई दम नहीं है।
भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि यदि किसी कुनबे का मालिक कमजोर हो और नेतृत्व क्षमता न हो तो ऐसे हालात आम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 से आज तक भाजपा के किसी विधायक ने बगावत नहीं की, क्योंकि संगठन दृढ़ और मजबूत है।