तेजस्वी यादव का बड़ा दावा: राज्यसभा चुनाव में हमारे पास है संख्या, जीत सुनिश्चित
सारांश
Key Takeaways
- राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया सुनिश्चित हो गई है।
- तेजस्वी यादव ने विश्वास जताया कि महागठबंधन का उम्मीदवार जीत दर्ज करेगा।
- एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जो चार सीटें जीतने में सक्षम हैं।
- राजद के पास 35 विधायक हैं, जो अन्य विधायकों के समर्थन के बिना एक सीट नहीं जीत सकते।
- राजनीतिक जोड़-तोड़ की चर्चाएं इस चुनाव को लेकर तेज हो गई हैं।
पटना, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए छह प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं, जिससे मतदान की प्रक्रिया अब सुनिश्चित हो गई है। इस चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी संदर्भ में, राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को गठबंधन के विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के माध्यम से चुनावी रणनीतियों को सुदृढ़ करने की कोशिश की गई। बैठक के बाद, तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह बैठक बेहद सकारात्मक रही और सभी सहयोगी दलों के साथ संवाद जारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन का उम्मीदवार जीत दर्ज करेगा।
जब उनसे आवश्यक संख्या बल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हमारे पास संख्या है, तभी तो हम चुनाव लड़ रहे हैं।” बैठक के बाद, पूर्व मंत्री और राजद नेता चंद्रशेखर ने कहा कि साम्प्रदायिक दल और उनके विचार देश के लिए एक खतरा हैं। उनके खिलाफ सामाजिक न्याय की पार्टियां एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गेट-टू-गेदर था और सभी लोग जीत के प्रति आश्वस्त हैं। बिहार से इस बार राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं और इन पर मतदान होगा।
एनडीए ने राज्यसभा चुनाव के लिए पांच जबकि राजद ने एक प्रत्याशी उतारा है। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में एक उम्मीदवार की जीत के लिए 41 विधायकों की आवश्यकता होती है। एनडीए के पास वर्तमान में 202 विधायक हैं, जिससे वह आसानी से चार सीटें जीत सकता है। हालांकि, पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे अन्य विधायकों का समर्थन चाहिए।
विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाला महागठबंधन मौजूद है, जिसके पास कुल 35 विधायक हैं। इस खेमे को एक सीट जीतने के लिए भी अन्य विधायकों की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि इस चुनाव को लेकर राजनीतिक गणित और जोड़-तोड़ की चर्चाएं तेज हो गई हैं।