राज्यसभा चुनाव में हार पर पप्पू यादव का बड़ा खुलासा, 'सभी लोग बिकते हैं'
सारांश
Key Takeaways
- पप्पू यादव ने विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया।
- राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने सभी सीटें जीतीं।
- महागठबंधन की हार के पीछे विधायकों की गैर-मौजूदगी थी।
- तेजस्वी यादव पर नेतृत्व में कमजोरी का आरोप।
- राजनीतिक भ्रष्टाचार का बढ़ता प्रभाव।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राज्य की पांच राज्यसभा सीटों पर महागठबंधन को मिली हार पर गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों को पैसे देकर खरीदा गया है। पप्पू यादव ने कहा कि सभी लोग बिकते हैं, बस खरीदार होना चाहिए।
नई दिल्ली में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा अब किसी भी सिद्धांत का पालन नहीं करती, लेकिन हम भी बिक रहे हैं। उन्होंने राजद नेता तेजस्वी यादव पर आम सहमति बनाने और पार्टी नेतृत्व के साथ तालमेल करने में असफल रहने का आरोप लगाया। पप्पू यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव को राजनीतिक हालात की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने न तो कोई बैठक बुलाई और न ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी सहित प्रमुख लोगों से सलाह-मशविरा किया। उन्होंने इसे कर्तव्य की अवहेलना करार दिया और जोर दिया कि चुनाव से पहले एक सामूहिक रणनीति बनाई जानी चाहिए थी।
सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सभी पांचों सीटों पर जीत हासिल की, जिससे विपक्षी गठबंधन को बड़ा झटका लगा। वोटिंग के समय महागठबंधन के चार विधायकों की गैर-मौजूदगी ने नतीजों को काफी हद तक प्रभावित किया और पलड़ा एनडीए के पक्ष में झुक गया।
जीतने वालों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को 44-44 वोट मिले। उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर को 42-42 वोट मिले।
दूसरी वरीयता वाले वोटों की गिनती के बाद, पांचवीं सीट भी भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम की जीत के साथ एनडीए के खाते में चली गई।
महागठबंधन की रणनीति के अनुसार, उसने असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के पांच विधायकों और बसपा के एक विधायक का समर्थन हासिल किया था। लेकिन, चार विधायक, कांग्रेस के विधायक सुरेंद्र कुशवाहा, मनोज विश्वास, मनोहर सिंह और राजद के विधायक फैसल रहमान, वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाए।
कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने बाद में दावा किया कि उन्होंने बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के निर्देश पर वोटिंग से खुद को अलग रखा और इसकी वजह उम्मीदवार के चयन से अपनी असहमति बताई। इसी तरह, सुरेंद्र कुशवाहा ने नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि पिछड़े, दलित या महादलित समुदायों से किसी भी उम्मीदवार को नामित नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवार को थोपा गया था, जिसके कारण वे वहां उपस्थित नहीं हुए।