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बोम्मई का CM शिवकुमार पर निशाना: कर्नाटक का कर्ज ₹65,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.20 लाख करोड़ हुआ

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बोम्मई का CM शिवकुमार पर निशाना: कर्नाटक का कर्ज ₹65,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.20 लाख करोड़ हुआ

सारांश

BJP सांसद बसवराज बोम्मई ने CM शिवकुमार पर तीखा हमला बोला है — उनका कहना है कि राज्य का कर्ज उनके कार्यकाल के ₹65,000 करोड़ से दोगुना होकर ₹1.20 लाख करोड़ पर पहुँच गया है और कांग्रेस पूर्ववर्ती सरकार को ढाल बनाकर अपनी विफलता छुपा रही है।

मुख्य बातें

BJP सांसद बसवराज बोम्मई ने 25 सितंबर 2026 को CM डीके शिवकुमार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया।
बोम्मई के दावे के अनुसार राज्य का ऋण उनके कार्यकाल में ₹65,000 करोड़ से बढ़कर कांग्रेस राज में ₹1.20 लाख करोड़ हो गया है।
राज्य के वित्त विभाग ने चेतावनी दी कि उच्च राजस्व व्यय से नए कार्यक्रमों की गुंजाइश नहीं बची।
बोम्मई ने कहा कि उनकी सरकार ने अधिशेष बजट दिया था, जबकि कांग्रेस सरकार लगातार तीन घाटे के बजट पेश कर चुकी है।
बोम्मई ने पूर्व काल को कोविड-19 महामारी से प्रभावित बताया और वर्तमान स्थिति से तुलना को अनुचित करार दिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 25 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए पूर्ववर्ती सरकार को ढाल बना रही है। बोम्मई के अनुसार, राज्य का ऋण उनके कार्यकाल में लगभग ₹65,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1.20 लाख करोड़ हो गया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब उभरा जब राज्य के वित्त विभाग की एक आंतरिक चेतावनी सार्वजनिक हुई, जिसमें कहा गया था कि उच्च राजस्व व्यय के चलते नए कार्यक्रम शुरू करने की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने गुरुवार को विधानसभा में इस चेतावनी का हवाला देते हुए तर्क दिया कि इसी तरह के आदेश पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और बोम्मई के कार्यकाल में भी जारी हुए थे।

बोम्मई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अतीत से तुलना करना अनुचित और भ्रामक है।

बोम्मई की मुख्य दलीलें

बोम्मई ने स्पष्ट किया कि येदियुरप्पा और उनके अपने कार्यकाल के दौरान परिस्थितियाँ सर्वथा भिन्न थीं। उन्होंने कहा, "हमारे कार्यकाल में कोविड-19 की लहरें चरम पर थीं और आर्थिक गतिविधियाँ ठप हो गई थीं। वित्तीय अनुशासन बनाए रखना अनिवार्य था।" उनके अनुसार, महामारी-जनित आर्थिक संकट के बावजूद वित्तीय प्रबंधन की लगाम बनाए रखी गई।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार ने अधिशेष बजट पेश किया था, जबकि मौजूदा कांग्रेस सरकार ने लगातार तीन घाटे के बजट सदन में रखे हैं।

राष्ट्रीय आर्थिक संदर्भ का हवाला

बोम्मई ने तर्क दिया कि वर्तमान आर्थिक माहौल पिछले दौर से बेहतर है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि हो रही है और कर्नाटक के राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में, आलोचकों के अनुसार, राज्य सरकार के पास वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं।

सरकार से सुधार की माँग

बोम्मई ने कांग्रेस सरकार से अपनी वित्तीय कठिनाइयों को खुलकर स्वीकार करने और तत्काल सुधारात्मक उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है। यह कर्नाटक के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।"

गौरतलब है कि यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस की गारंटी योजनाओं पर खर्च को लेकर राजनीतिक बहस पहले से ही तेज़ है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य का राजकोषीय संतुलन आने वाले बजट सत्रों में केंद्रीय मुद्दा बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ से काटकर नहीं देखा जाना चाहिए — राज्यों की उधारी क्षमता GDP के अनुपात में तय होती है और कर्नाटक की अर्थव्यवस्था भी उसी अनुपात में बढ़ी है। असली सवाल यह है कि गारंटी योजनाओं पर होने वाले राजस्व व्यय ने पूँजीगत निवेश को कितना संकुचित किया है — जो मुख्यधारा की बहस में अनुपस्थित है। वित्त विभाग की चेतावनी एक संस्थागत संकेत है, न कि महज BJP का राजनीतिक आरोप; इसे गंभीरता से लेना दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है। बिना स्वतंत्र राजकोषीय समीक्षा के यह विवाद केवल चुनावी नारेबाजी बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसवराज बोम्मई ने CM शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए?
बोम्मई ने आरोप लगाया कि CM शिवकुमार अपनी सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए पूर्ववर्ती BJP सरकार को दोष दे रहे हैं। उनके अनुसार, वित्त विभाग की चेतावनी और लगातार तीन घाटे के बजट यह साबित करते हैं कि राज्य का खजाना गहरे दबाव में है।
कर्नाटक का ऋण कितना बढ़ा है?
बोम्मई के दावे के अनुसार, राज्य का ऋण उनके कार्यकाल में लगभग ₹65,000 करोड़ था, जो वर्तमान कांग्रेस सरकार के अंतर्गत बढ़कर लगभग ₹1.20 लाख करोड़ हो गया है। यह आँकड़ा बोम्मई का दावा है; सरकार की ओर से इसका आधिकारिक खंडन या पुष्टि सार्वजनिक नहीं हुई है।
कर्नाटक वित्त विभाग की चेतावनी में क्या कहा गया?
वित्त विभाग की चेतावनी में कहा गया कि उच्च राजस्व व्यय के कारण राज्य में नए कार्यक्रम शुरू करने की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है। इसी चेतावनी का हवाला CM शिवकुमार ने विधानसभा में दिया था और इसी को बोम्मई ने मौजूदा सरकार की विफलता का प्रमाण बताया।
बोम्मई ने अपने कार्यकाल की तुलना कैसे की?
बोम्मई ने कहा कि येदियुरप्पा और उनके अपने कार्यकाल में कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियाँ ठप थीं, इसलिए वित्तीय सतर्कता अपरिहार्य थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने अधिशेष बजट पेश किया था, जबकि कांग्रेस लगातार तीन घाटे के बजट दे चुकी है।
इस विवाद का कर्नाटक की जनता पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि राज्य सरकार का राजकोषीय दबाव बना रहा तो सामाजिक योजनाओं और बुनियादी ढाँचे में निवेश सीमित हो सकता है। वित्त विभाग की चेतावनी संकेत देती है कि नई गारंटी योजनाएँ या पूँजीगत परियोजनाएँ शुरू करना निकट भविष्य में चुनौतीपूर्ण रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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