70वीं बीपीएससी: पटना में 2,027 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र, किसी ने 16 घंटे पढ़ा, किसी ने चौथे प्रयास में जीती जंग
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 13 अगस्त 2026 को पटना के बापू सभागार में आयोजित समारोह में 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा में सफल 2,027 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इन चयनित अभ्यर्थियों में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, एसडीएम, डीएसपी, रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर और अन्य विभागों के पद शामिल हैं। यह समारोह उन युवाओं के लिए वर्षों के संघर्ष की परिणति बना, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपना सपना जीवित रखा।
मुख्य घटनाक्रम
नियुक्ति पत्र वितरण समारोह बापू सभागार, पटना में आयोजित किया गया, जहाँ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वयं प्रत्येक सफल अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र सौंपा। चयनित अभ्यर्थियों की संख्या 2,027 रही, जो बिहार प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर तैनात होंगे। सभागार में उपस्थित परिजनों की आँखें भी नम थीं, क्योंकि यह सफलता केवल अभ्यर्थियों की नहीं, पूरे परिवार की मेहनत का प्रतिफल थी।
संघर्ष की कहानियाँ
रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर चयनित आदित्य जैन मध्य प्रदेश के दमोह जिले के एक ग्रामीण किसान परिवार से हैं। वह अपने गाँव से सरकारी सेवा में इस मुकाम तक पहुँचने वाले पहले व्यक्ति हैं। उनके पिता अशोक जैन ने बताया कि आदित्य कई बार 16-16 घंटे तक पढ़ाई करते थे और खाना-पीना तक भूल जाते थे। माँ राजमणि जैन को बार-बार फोन करके याद दिलाना पड़ता था। आदित्य ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, बड़े भाई और पूरे परिवार को दिया।
बिहार प्रशासनिक सेवा में चयनित नागमणि कुमार की यात्रा विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह उनका बीपीएससी का चौथा प्रयास और चौथा साक्षात्कार था। वह पिछले करीब 12 वर्षों से बीएसएनएल में जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। नौकरी के साथ-साथ तैयारी जारी रखना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः 70वीं बीपीएससी में सफलता पाई।
बिहार प्रशासनिक सेवा में चयनित कविता कुमारी ने डेंटिस्ट्री की पढ़ाई की है, लेकिन उनका लक्ष्य हमेशा से सिविल सर्विस था। उन्होंने बताया कि 69वीं बीपीएससी में वह मुख्य परीक्षा तक पहुँची थीं, लेकिन मेंस में सफलता नहीं मिली थी। इस बार उन्होंने वह कमी पूरी की।
अन्य सफल अभ्यर्थियों की आवाज़
शशांक गौरव ने नियुक्ति पत्र मिलने पर इसे जीवन का सबसे यादगार पल बताया। उन्होंने अपने पिता सुभाष ओझा को प्रेरणा स्रोत बताया और बड़े भाई शशांक सौरभ तथा छोटे भाई शशांक अभिनव के सहयोग को भी सफलता में अहम बताया।
मनीषा पटेल ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद मिली सफलता की खुशी अलग ही होती है। अमरदीप कुमार ने नए अधिकारियों को सलाह दी कि प्रतियोगी परीक्षा का संघर्ष लंबा होता है, इसलिए धैर्य बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पद ग्रहण के बाद उनकी प्राथमिकता लोगों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना होगी।
भाव्या कृति ने कहा कि एक अभ्यर्थी से अधिकारी बनने का सफर केवल बौद्धिक क्षमता का नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी परिचायक है। उन्होंने एक साथ 2,000 से अधिक युवाओं को नियुक्ति मिलने को बड़ी उपलब्धि बताया।
आम जनता और युवाओं पर असर
यह नियुक्ति समारोह बिहार के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सरकारी सेवाओं की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। 70वीं बीपीएससी की इस बैच में ग्रामीण पृष्ठभूमि, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और महिला अभ्यर्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
आगे की राह
नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी अब अपने-अपने पदों पर योगदान देंगे और बिहार के प्रशासनिक ढाँचे को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे। यह बैच राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात होगी, जहाँ इन अधिकारियों की जिम्मेदारी जमीनी स्तर पर शासन को बेहतर बनाने की होगी।