11 अक्टूबर 2026
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गोरखा में बूढ़ी गंडकी नदी में भीषण बाढ़, दर्जनों घर-पुल बहे; नेपाली सेना तैनात

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गोरखा में बूढ़ी गंडकी नदी में भीषण बाढ़, दर्जनों घर-पुल बहे; नेपाली सेना तैनात

सारांश

नेपाल के गोरखा में बूढ़ी गंडकी नदी ने एक बार फिर कहर बरपाया — दर्जनों घर, पुल और एक जलविद्युत परियोजना का कैंप बहा। यह त्रिशूली बाढ़ के एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी तबाही है, जहाँ 1,455 मौतें हो चुकी हैं। बालेन शाह ने सेना और त्वरित प्रतिक्रिया दल को मैदान में उतारा।

मुख्य बातें

11 अक्टूबर 2026 को गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में भीषण बाढ़ से दर्जनों घर और पुल बह गए।
341 मेगावाट बूढ़ी जलविद्युत परियोजना का निर्माण कैंप भी बाढ़ में बह गया; एक जलविद्युत निर्माण स्थल क्षतिग्रस्त।
अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं; जगत क्षेत्र से 6 लोगों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया।
बाढ़ का कारण कथित तौर पर लोकपा-चुम्लिंग के बीच भूस्खलन से स्यार खोला का अवरुद्ध होना; आधिकारिक पुष्टि बाकी।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नेपाली सेना और क्विक रिएक्शन टीम को हवाई व जमीनी मार्ग से तैनात किया।
यह घटना रासुवा-त्रिशूली बाढ़ के एक माह बाद हुई, जिसमें 1,455 मौतें और 5,285 लापता थे।

नेपाल के पश्चिमी गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में 11 अक्टूबर 2026 को अचानक आई भीषण बाढ़ ने चुमनुबरी ग्रामीण नगर पालिका क्षेत्र में व्यापक तबाही मचाई है। दर्जनों घर, झूला पुल और एक स्टील पुल बाढ़ की चपेट में आकर बह गए, जबकि 341 मेगावाट बूढ़ी जलविद्युत परियोजना का निर्माण कैंप भी क्षतिग्रस्त हो गया है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने रविवार तड़के ही बाढ़ की चेतावनी जारी कर नदी किनारे के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की थी।

मुख्य घटनाक्रम

गोरखा जिला प्रशासन कार्यालय के प्रमुख जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। चीन सीमा से सटे चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका के जगत और सल्लेरी गाँवों के कई घर बाढ़ में समा गए। उन्होंने कहा, 'हम बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी जुटा रहे हैं। जगत और सल्लेरी गाँवों के कुछ घर और 341 मेगावाट बूढ़ी जलविद्युत परियोजना का कैंप भी बाढ़ में बह गया है।'

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ में झूला पुल और एक स्टील पुल भी बह गए हैं। नुकसान का पूरा आकलन अभी जारी है।

बाढ़ का संभावित कारण

प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, लोकपा और चुम्लिंग के बीच हुए भूस्खलन को बाढ़ का कारण माना जा रहा है। कथित तौर पर इस भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार खोला का प्रवाह अवरुद्ध हुआ और बाद में उसका पानी एकाएक छूटने से बाढ़ आई। हालाँकि, अधिकारियों ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने स्थानीय समाचार पोर्टल 'ऑनलाइनखबर' से कहा, 'यह बाढ़ भोटेकोशी की बाढ़ की याद दिलाती है। दर्जनों घर बह गए हैं। फिलहाल नुकसान की सही तस्वीर बताना जल्दबाजी होगी।'

सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्य

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि बूढ़ी गंडकी बाढ़ के मद्देनज़र नेपाली सेना की एक टुकड़ी को हवाई और जमीनी दोनों मार्गों से प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया गया है। भूस्खलन के खतरे वाले जगत क्षेत्र से 6 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला जा चुका है।

शाह ने यह भी बताया कि काठमांडू में तैनात संयुक्त त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्विक रिएक्शन टीम) को हवाई मार्ग से प्रभावित इलाके में भेज दिया गया है, ताकि राहत और बचाव कार्यों को तेज़ी से पूरा किया जा सके। NDRRMA ने नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बताते हुए नदी किनारे के सभी लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की चेतावनी दी है।

ऐतिहासिक संदर्भ: एक माह में दूसरा बड़ा झटका

यह घटना ऐसे समय में आई है जब नेपाल अभी रासुवा और त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के जख्मों से उबरने की कोशिश कर रहा है। NDRRMA के आँकड़ों के अनुसार, उस बाढ़ में 1,455 लोगों की मौत हो गई थी और 5,285 लोग अब भी लापता हैं। गौरतलब है कि नेपाल में मानसून के दौरान भूस्खलन-जनित बाढ़ की यह कोई पहली घटना नहीं है — हिमालयी नदियों की तीव्र ढाल और भूगर्भीय संवेदनशीलता इसे हर वर्ष एक आवर्ती संकट बनाती है।

आगामी घंटों में क्षति का पूरा आकलन सामने आने और राहत अभियान की रफ़्तार तय होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ चेतावनी प्रणाली तो सक्रिय हो जाती है, पर निकासी और क्षति-न्यूनीकरण तंत्र पीछे छूट जाते हैं। त्रिशूली बाढ़ में 1,455 मौतों के एक महीने बाद एक और बड़ी बाढ़ यह सवाल उठाती है कि भूस्खलन-प्रवण हिमालयी नदी घाटियों में स्थायी बस्तियों और बुनियादी ढाँचे की अनुमति देने की नीति पर पुनर्विचार कब होगा। 341 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना का कैंप बहना यह भी दर्शाता है कि ऊर्जा निवेश का भूगोल और जोखिम मूल्यांकन दोनों पर नए सिरे से सोचने की ज़रूरत है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ कब और कहाँ आई?
11 अक्टूबर 2026 को नेपाल के गोरखा जिले में, चीन सीमा से सटे चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्र में बूढ़ी गंडकी नदी में भीषण बाढ़ आई। इससे जगत और सल्लेरी गाँवों सहित दर्जनों घर और पुल बह गए।
बूढ़ी गंडकी बाढ़ में कितना नुकसान हुआ?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दर्जनों घर, झूला पुल और एक स्टील पुल बाढ़ में बह गए। 341 मेगावाट बूढ़ी जलविद्युत परियोजना का निर्माण कैंप भी बाढ़ में बह गया और एक अन्य जलविद्युत निर्माण स्थल को भी नुकसान पहुँचा है। नुकसान का पूरा आकलन अभी जारी है।
क्या इस बाढ़ में कोई जनहानि हुई है?
गोरखा जिला प्रशासन के प्रमुख जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। जगत क्षेत्र से 6 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया है।
नेपाल सरकार ने बाढ़ के बाद क्या कदम उठाए?
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नेपाली सेना की एक टुकड़ी को हवाई और जमीनी दोनों मार्गों से तैनात किया है। काठमांडू से संयुक्त त्वरित प्रतिक्रिया दल को हवाई मार्ग से प्रभावित इलाके में भेजा गया है, और NDRRMA ने नदी किनारे के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
बूढ़ी गंडकी बाढ़ का क्या कारण बताया जा रहा है?
प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, लोकपा और चुम्लिंग के बीच हुए भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार खोला का प्रवाह अवरुद्ध हुआ, जिससे बाद में अचानक बाढ़ आई। हालाँकि, अधिकारियों ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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