नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी की बाढ़: 412 MW क्षमता वाले 4 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के गोरखा जिले की चुमानुबरी ग्रामीण नगरपालिका से होकर गुज़रने वाली बूढ़ी गंडकी नदी में रविवार, 11 अक्टूबर 2026 की तड़के अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने नदी के किनारे के इलाकों को तहस-नहस कर दिया। नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IPPAN) के अनुसार, इस बाढ़ से कुल 412.09 MW की संयुक्त क्षमता वाले चार हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
प्रभावित इलाके और तत्काल नुकसान
बाढ़ का असर दोभान, घट्टेखोला, जगत और सल्लेरी जैसे इलाकों में स्पष्ट रूप से देखा गया। आवासीय क्षेत्र, सड़कें और पुल भारी क्षति से प्रभावित हुए। IPPAN ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी चार प्रोजेक्टों के नुकसान का ब्यौरा दिया।
चारों हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को हुई क्षति
341 MW के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का मुख्य कैंप एरिया बाढ़ की चपेट में आया और निर्माण-स्थल पर मौजूद कुछ भारी उपकरण बह गए। यह सबसे बड़ी क्षमता का प्रोजेक्ट है और इसका नुकसान सबसे गंभीर माना जा रहा है।
24.5 MW के दोभान खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के कैंप एरिया में कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और प्रोजेक्ट साइट के निकट बना बेली ब्रिज पूरी तरह बह गया।
30.59 MW के यारू खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य में सहायक बेली ब्रिज को नुकसान पहुँचा और निर्माण सामग्री व उपकरण बाढ़ में बह गए।
16 MW के माछा खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तक पहुँचने वाली सड़क और पुल दोनों क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे साइट तक पहुँच अवरुद्ध हो गई है।
अगस्त की आपदा की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल अभी 26 अगस्त 2026 को भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ से उबर ही नहीं पाया था। उस आपदा में विश्व बैंक के 'ग्लोबल रैपिड पोस्ट-डिज़ास्टर डैमेज एस्टीमेशन' (GRADE) रिपोर्ट के अनुसार, 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और एक सौर ऊर्जा परियोजना क्षतिग्रस्त हुई थीं — जिनमें 281.1 MW की चालू क्षमता और 395.02 MW की निर्माणाधीन क्षमता शामिल थी। ट्रांसमिशन लाइनों और सब-स्टेशनों को हुई क्षति से नेशनल ग्रिड को 149.6 MW बिजली की आपूर्ति बाधित हुई थी, जिससे प्रभावित कुल क्षमता 430.7 MW तक पहुँच गई — जो नेपाल की कुल हाइड्रोपावर और सोलर क्षमता का 10.6 प्रतिशत है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के आँकड़ों के अनुसार, अगस्त की उसी आपदा में 1,455 लोग मारे गए थे और 5,285 लोग लापता हैं।
स्वच्छ ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों पर संकट
नेपाल दक्षिण एशिया में हाइड्रोपावर का प्रमुख निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन यह ताज़ा आपदा देश के स्वच्छ ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और जलवायु-जनित आपदाओं के प्रति गहरी संवेदनशीलता को उजागर करती है। आलोचकों का कहना है कि देश के पर्वतीय इलाकों में बनाए जा रहे बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों के लिए जलवायु-अनुकूल आपदा प्रबंधन योजनाएँ पर्याप्त नहीं हैं। यह वर्ष की दूसरी बड़ी बाढ़-आपदा है जिसने बूढ़ी गंडकी बेसिन के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुँचाया है।
आगे की राह
IPPAN ने संबंधित अधिकारियों और सरकार से तत्काल राहत एवं पुनर्निर्माण सहायता की माँग की है। क्षतिग्रस्त बेली ब्रिजों और सड़कों की मरम्मत के बिना निर्माण कार्य बाधित रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इन परियोजनाओं की समयसीमा और लागत दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।