बर्निंग फीट सिंड्रोम: पैरों में जलन के प्रमुख कारण और स्वास्थ्य परिदृश्य
सारांश
Key Takeaways
- बर्निंग फीट सिंड्रोम
- यह डायबिटीज, विटामिन कमी, और खून के प्रवाह की कमी के कारण हो सकता है।
- समस्या को अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।
- इसे सुधारने के लिए जीवनशैली में बदलाव आवश्यक है।
- समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कई लोग पैरों में जलन की समस्या को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, यदि यह समस्या बार-बार या लम्बे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
चिकित्सकों का कहना है कि पैरों में जलन केवल एक सामान्य लक्षण नहीं है, बल्कि यह नसों, हार्मोन या शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसलिए इस संकेत को समय रहते समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस स्थिति को चिकित्सा विज्ञान में बर्निंग फीट सिंड्रोम कहा जाता है। यह तब होता है जब पैरों की नसों पर किसी कारणवश असर पड़ता है। शोध बताते हैं कि जब नसें सही तरीके से कार्य नहीं करतीं या उनमें सूजन आ जाती है, तब व्यक्ति को जलन, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा अनुभव होता है। कई मामलों में, यह समस्या रात के समय अधिक बढ़ जाती है, जिससे नींद में भी बाधा उत्पन्न होती है।
इस समस्या के सबसे आम कारणों में से एक है डायबिटीज। जब शरीर में शुगर का स्तर लम्बे समय तक अधिक रहता है, तो यह छोटी नसों को नुकसान पहुँचाता है। इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है, जिसमें पैरों में जलन, सुन्नपन और झुनझुनी का अनुभव होता है। इसी तरह, किडनी से जुड़ी बीमारियों में शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जो नसों को प्रभावित कर जलन की समस्या पैदा कर सकते हैं।
विटामिन की कमी भी समस्या की एक बड़ी वजह मानी जाती है। विशेषकर विटामिन बी12 की कमी नसों के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करती है। जब शरीर में यह विटामिन कम हो जाता है, तो नसों की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे पैरों में जलन या सुन्नपन महसूस होता है। इसके अलावा, हाइपोथायरॉयडिज्म यानी थायरॉयड हार्मोन की कमी भी नसों की गति को धीमा कर देती है, जिससे यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।
खून के प्रवाह की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारण है। जब पैरों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुँचता, तो वहाँ ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इससे पैरों में भारीपन, दर्द और जलन का अनुभव हो सकता है। कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियाँ, जैसे नर्व डैमेज या लंबे समय तक शराब का सेवन, भी इसी तरह के लक्षण उत्पन्न कर सकती हैं।
सिर्फ बीमारियाँ ही नहीं, बल्कि हमारी दैनिक आदतें भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक खड़े रहना, बहुत टाइट जूते पहनना, पैरों में अधिक पसीना आना या फंगल इन्फेक्शन जैसी स्थितियाँ पैरों में जलन को बढ़ा सकती हैं।