कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओडिशा और झारखंड से 200 न्यायिक अधिकारियों की मांग की
सारांश
Key Takeaways
- कलकत्ता हाईकोर्ट ने 200 न्यायिक अधिकारियों की मांग की है।
- ये अधिकारी ओडिशा और झारखंड से लाए जाएंगे।
- मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच के लिए ये अधिकारी नियुक्त होंगे।
कोलकाता, २६ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को २०० न्यायिक अधिकारियों की मांग की है, जिनमें से १००-१०० अधिकारी ओडिशा और झारखंड हाईकोर्ट से होंगे। ये अधिकारी उन न्यायिक अधिकारियों की टीम में शामिल होंगे, जिन्हें “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” (तार्किक असंगति) श्रेणी में पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच और निर्णय लेने के लिए पहले से नियुक्त किया गया है।
पड़ोसी राज्यों से २०० न्यायिक अधिकारियों को बुलाने का निर्णय कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया।
बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार और पश्चिम बंगाल के विशेष रोल पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता भी उपस्थित थे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की खंडपीठ ने २४ फरवरी को झारखंड और ओडिशा के उच्च न्यायालयों से न्यायिक अधिकारियों को पश्चिम बंगाल भेजने की अनुमति दी थी, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के दावों और आपत्तियों का निपटारा तेजी से किया जा सके।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि २१ फरवरी की मध्यरात्रि तक तय की गई 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' मामलों के निपटारे के लिए अंतिम मानी जाएगी।
इससे पहले पश्चिम बंगाल की विभिन्न अदालतों से ५३२ न्यायिक अधिकारियों को मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच के लिए नियुक्त किया जा चुका है। इनमें से २७३ अधिकारी वर्तमान में इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।
ओडिशा और झारखंड उच्च न्यायालयों से २०० अन्य अधिकारियों के जुड़ने के बाद दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया में और तेजी की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची, न्यायिक जांच के लिए भेजे गए 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' मामलों को छोड़कर प्रकाशित की जाएगी। न्यायिक प्रक्रिया की प्रगति के अनुसार पूरक सूची बाद में जारी की जाएगी।
न्यायिक अधिकारी जांच कार्य की प्रगति की दैनिक रिपोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट को प्रस्तुत कर रहे हैं, ताकि प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।