सीबीआईसी का खंडन: ई-कॉमर्स डिलीवरी पर GST घटा, कोई नया टैक्स नहीं लगाया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 10 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे का स्पष्ट खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर 5 प्रतिशत का नया जीएसटी लगाया है। CBIC ने साफ किया कि वास्तव में इन सेवाओं पर टैक्स बढ़ाया नहीं, बल्कि 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
वायरल दावा और सरकारी खंडन
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हुई पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि 'सरकार ने कोई टैक्स नहीं बढ़ाया' — यह कहने के महज 48 घंटे बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ई-कॉमर्स डिलीवरी पर 5 प्रतिशत जीएसटी थोप दिया। CBIC ने इस वायरल पोस्ट को कोट करते हुए कहा, 'इस पोस्ट में किया गया दावा फर्जी और तथ्यों के आधार पर गलत है।'
सरकारी एजेंसी ने स्पष्ट किया कि फूड ऐप्स जैसी डिलीवरी सेवाओं पर पहले 18 प्रतिशत जीएसटी लागू था। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की सिफारिश के आधार पर इसे घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। CBIC ने यह भी अपील की कि 'आपसे अनुरोध है कि गलत खबरें न फैलाएं।'
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक के मुख्य फैसले
गुरुवार को संपन्न हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में देश में व्यापार सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से कई अहम निर्णय लिए गए। इनमें रिफंड प्रक्रिया को तेज़ करना और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का विस्तार प्रमुख हैं।
रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। यदि इस अवधि में न तो क्लेम स्वीकार किया जाए और न ही कोई कमी-सूचना जारी की जाए, तो क्लेम स्वतः स्वीकृत माना जाएगा — यह प्रावधान करदाताओं के लिए राहत लेकर आया है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट में विस्तार
जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दायरे को भी व्यापक किया है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर ITC का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, फैक्ट्रियों के बाहर लगाए गए टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर भी ITC उपलब्ध होगा।
इसके अलावा, फ्री सैंपल और कानूनी रूप से अनिवार्य रूप से नष्ट किए गए एक्सपायरी स्टॉक पर भी ITC का दावा किया जा सकेगा — बशर्ते संबंधित कानून के तहत उन वस्तुओं को नष्ट करना अनिवार्य हो।
आम उपभोक्ता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। डिलीवरी शुल्क पर टैक्स 18 प्रतिशत से 5 प्रतिशत होने से उपभोक्ताओं को सीधे राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि प्लेटफॉर्म इस कम हुए टैक्स का लाभ ग्राहकों तक पहुँचा सकते हैं। गौरतलब है कि फूड डिलीवरी ऐप्स पर लाखों उपभोक्ता प्रतिदिन निर्भर हैं।
क्या होगा आगे
CBIC का यह खंडन डिजिटल युग में फर्जी खबरों के प्रसार के खिलाफ सरकार की सक्रिय प्रतिक्रिया को दर्शाता है। ITC विस्तार और रिफंड प्रक्रिया में सुधार के क्रियान्वयन पर उद्योग जगत की नज़र रहेगी। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी टैक्स संबंधी जानकारी के लिए CBIC की आधिकारिक वेबसाइट अथवा सरकारी अधिसूचनाओं का ही संदर्भ लें।