10 अक्टूबर 2026
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सीबीआईसी का खंडन: ई-कॉमर्स डिलीवरी पर GST घटा, कोई नया टैक्स नहीं लगाया

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सीबीआईसी का खंडन: ई-कॉमर्स डिलीवरी पर GST घटा, कोई नया टैक्स नहीं लगाया

सारांश

ई-कॉमर्स पर नए टैक्स का वायरल दावा निकला फर्जी — CBIC ने साफ किया कि फूड डिलीवरी जैसी सेवाओं पर GST 18% से घटाकर 5% किया गया है, बढ़ाया नहीं। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में रिफंड प्रक्रिया और ITC में भी बड़े सुधार हुए।

मुख्य बातें

CBIC ने 10 अक्टूबर 2026 को वायरल पोस्ट का खंडन किया — ई-कॉमर्स पर कोई नया जीएसटी नहीं लगाया गया।
फूड ऐप्स जैसी डिलीवरी सेवाओं पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है।
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में रिफंड स्वीकृति अवधि 15 दिनों से घटाकर 10 दिन की गई।
ITC का दायरा बढ़ा — कर्मचारियों के हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकम्युनिकेशन टावर, पाइपलाइन और एक्सपायरी स्टॉक पर लाभ मिलेगा।
CBIC ने नागरिकों से अपील की — 'गलत खबरें न फैलाएं।'

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 10 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे का स्पष्ट खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर 5 प्रतिशत का नया जीएसटी लगाया है। CBIC ने साफ किया कि वास्तव में इन सेवाओं पर टैक्स बढ़ाया नहीं, बल्कि 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

वायरल दावा और सरकारी खंडन

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हुई पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि 'सरकार ने कोई टैक्स नहीं बढ़ाया' — यह कहने के महज 48 घंटे बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ई-कॉमर्स डिलीवरी पर 5 प्रतिशत जीएसटी थोप दिया। CBIC ने इस वायरल पोस्ट को कोट करते हुए कहा, 'इस पोस्ट में किया गया दावा फर्जी और तथ्यों के आधार पर गलत है।'

सरकारी एजेंसी ने स्पष्ट किया कि फूड ऐप्स जैसी डिलीवरी सेवाओं पर पहले 18 प्रतिशत जीएसटी लागू था। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की सिफारिश के आधार पर इसे घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। CBIC ने यह भी अपील की कि 'आपसे अनुरोध है कि गलत खबरें न फैलाएं।'

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक के मुख्य फैसले

गुरुवार को संपन्न हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में देश में व्यापार सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से कई अहम निर्णय लिए गए। इनमें रिफंड प्रक्रिया को तेज़ करना और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का विस्तार प्रमुख हैं।

रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। यदि इस अवधि में न तो क्लेम स्वीकार किया जाए और न ही कोई कमी-सूचना जारी की जाए, तो क्लेम स्वतः स्वीकृत माना जाएगा — यह प्रावधान करदाताओं के लिए राहत लेकर आया है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट में विस्तार

जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दायरे को भी व्यापक किया है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर ITC का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, फैक्ट्रियों के बाहर लगाए गए टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर भी ITC उपलब्ध होगा।

इसके अलावा, फ्री सैंपल और कानूनी रूप से अनिवार्य रूप से नष्ट किए गए एक्सपायरी स्टॉक पर भी ITC का दावा किया जा सकेगा — बशर्ते संबंधित कानून के तहत उन वस्तुओं को नष्ट करना अनिवार्य हो।

आम उपभोक्ता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। डिलीवरी शुल्क पर टैक्स 18 प्रतिशत से 5 प्रतिशत होने से उपभोक्ताओं को सीधे राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि प्लेटफॉर्म इस कम हुए टैक्स का लाभ ग्राहकों तक पहुँचा सकते हैं। गौरतलब है कि फूड डिलीवरी ऐप्स पर लाखों उपभोक्ता प्रतिदिन निर्भर हैं।

क्या होगा आगे

CBIC का यह खंडन डिजिटल युग में फर्जी खबरों के प्रसार के खिलाफ सरकार की सक्रिय प्रतिक्रिया को दर्शाता है। ITC विस्तार और रिफंड प्रक्रिया में सुधार के क्रियान्वयन पर उद्योग जगत की नज़र रहेगी। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी टैक्स संबंधी जानकारी के लिए CBIC की आधिकारिक वेबसाइट अथवा सरकारी अधिसूचनाओं का ही संदर्भ लें।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी 'टैक्स बढ़ाने' का आरोप वायरल हो गया — यह जनता और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद की गहरी खाई को उजागर करता है। CBIC की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या सरकार जीएसटी परिवर्तनों को आम भाषा में, समय पर और व्यापक स्तर पर संप्रेषित करने की व्यवस्था बना पाई है — क्योंकि खंडन तब तक पहुँचता है जब वायरल पोस्ट लाखों लोगों तक पहले ही पहुँच चुकी होती है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ई-कॉमर्स पर कोई नया जीएसटी लगाया गया है?
नहीं, कोई नया जीएसटी नहीं लगाया गया है। CBIC ने स्पष्ट किया है कि ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर टैक्स बढ़ाया नहीं, बल्कि 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। वायरल पोस्ट का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में क्या-क्या फैसले हुए?
57वीं बैठक में तीन प्रमुख फैसले हुए: फूड डिलीवरी जैसी सेवाओं पर GST 18% से घटाकर 5% किया गया, रिफंड स्वीकृति अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन की गई, और ITC का दायरा हेल्थ इंश्योरेंस, टेलीकम्युनिकेशन टावर व एक्सपायरी स्टॉक तक बढ़ाया गया।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में क्या बदलाव हुए हैं?
अब कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, फैक्ट्रियों के बाहर लगे टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर ITC मिलेगा। इसके अलावा, कानूनी रूप से अनिवार्य रूप से नष्ट किए गए एक्सपायरी स्टॉक और फ्री सैंपल पर भी ITC का दावा किया जा सकेगा।
रिफंड प्रक्रिया में क्या सुधार किया गया है?
रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। यदि इस अवधि में न तो क्लेम स्वीकार हो और न ही कोई कमी-सूचना जारी की जाए, तो रिफंड क्लेम स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा।
फूड डिलीवरी ऐप्स के उपभोक्ताओं पर इस बदलाव का क्या असर होगा?
डिलीवरी शुल्क पर GST 18% से घटकर 5% होने से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है, बशर्ते प्लेटफॉर्म इस कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुँचाएं। यह बदलाव जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की सिफारिश पर लागू हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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