8 अक्टूबर 2026
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जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त, मुकदमे की सीमा ₹5 करोड़ हुई

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जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त, मुकदमे की सीमा ₹5 करोड़ हुई

सारांश

जीएसटी परिषद ने 57वीं बैठक में व्यापारियों को बड़ी राहत दी — कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति खत्म हुई, मुकदमे की सीमा ₹5 करोड़ हुई, रिफंड 3 दिनों में, और ई-कॉमर्स पंजीकरण सरल। यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी 18% से 5% करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन।

मुख्य बातें

जीएसटी परिषद ने 8 अक्टूबर 2026 की 57वीं बैठक में कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त की।
मुकदमा चलाने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ की गई।
रिफंड स्वीकृति अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन ; 90% रिफंड 3 कामकाजी दिनों में जारी होंगे।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर छोटे विक्रेताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण सरल बनाया गया।
यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% करने का प्रस्ताव विचाराधीन; ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4% एमडीआर तय।
सरकार के अनुसार 96% 'पर्सन-टू-मर्चेंट' यूपीआई लेनदेन पर कोई असर नहीं।

जीएसटी परिषद ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 57वीं बैठक में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति को समाप्त कर दिया और मुकदमा चलाने की न्यूनतम सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में इन निर्णयों की जानकारी दी।

मुख्य निर्णय और बदलाव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले वर्ष सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती पर ध्यान केंद्रित किया था, जबकि इस वर्ष परिषद का मुख्य लक्ष्य प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना है। परिषद ने पंजीकरण में सामान्य बदलावों को स्वतः स्वीकृति देने का निर्णय लिया है, जिससे व्यापारियों को बार-बार अनुमति लेने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।

सीतारमण ने कहा, “रिफंड प्रक्रिया तेज की जाएगी और स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी जाएगी। साथ ही, 90 प्रतिशत रिफंड 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे।”

ई-कॉमर्स विक्रेताओं को राहत

छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया अब अधिक सुलभ बनाई गई है। सीतारमण के अनुसार, अब छोटे व्यापारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिये बिना हर राज्य में व्यापारिक स्थान स्थापित किए सामान बेच सकेंगे। यह कदम एमएसएमई और लघु उद्यमियों के लिए डिजिटल बाज़ार तक पहुँच को सुगम बनाएगा।

गौरतलब है कि भारत में ई-कॉमर्स क्षेत्र तेज़ी से विस्तार कर रहा है और छोटे विक्रेताओं के लिए जटिल पंजीकरण प्रक्रियाएँ एक बड़ी बाधा रही हैं।

यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी का प्रस्ताव

परिषद ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर जीएसटी को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया। बैठक में अधिकांश राज्यों ने 18 प्रतिशत जीएसटी दर को लेकर चिंता व्यक्त की। नए यूपीआई फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के विशेष 'पर्सन-टू-मर्चेंट' लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर तय किया गया है।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 'पर्सन-टू-मर्चेंट' यूपीआई लेनदेन में से लगभग 96 प्रतिशत पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत का डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले बाज़ारों में शामिल है।

व्यापार जगत पर असर

कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त होने से व्यापारियों को अनावश्यक दबाव से राहत मिलने की उम्मीद है। मुकदमा चलाने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का निर्णय छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि पहले यह सीमा काफी कम थी और अनावश्यक मुकदमेबाज़ी को बढ़ावा देती थी।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' सूचकांक में भारत की रैंकिंग सुधारने पर ज़ोर दे रही है। रिफंड प्रक्रिया में तेज़ी आने से व्यवसायों की कार्यशील पूँजी की ज़रूरतें भी कम होंगी।

आगे की राह

परिषद के इन निर्णयों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किए जाने के बाद ये लागू होंगे। यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी दर में कटौती का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और राज्यों की सहमति के आधार पर इसका अंतिम स्वरूप तय होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सुधार जीएसटी के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जाँच यह है कि क्या यह बदलाव ज़मीन पर उत्पीड़न कम करेगा या सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेगा। मुकदमे की सीमा ₹5 करोड़ करने से छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी, मगर बड़े कर चोरों को अनावश्यक छूट न मिले — यह सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी अब प्रशासनिक तंत्र पर है। यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी घटाने का प्रस्ताव डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की दिशा में सकारात्मक है, लेकिन राज्यों में आम सहमति न बनना यह दर्शाता है कि राजस्व-साझेदारी का पुराना तनाव अभी भी बना हुआ है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसटी परिषद ने 57वीं बैठक में क्या बड़े फैसले लिए?
जीएसटी परिषद ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं बैठक में कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त की और मुकदमा चलाने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ की। इसके अलावा रिफंड प्रक्रिया तेज़ करने और ई-कॉमर्स पंजीकरण सरल बनाने के भी निर्णय लिए गए।
कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त होने से व्यापारियों को क्या फायदा होगा?
इस बदलाव से व्यापारियों को अनावश्यक प्रशासनिक दबाव से राहत मिलेगी और व्यापारिक विवादों में जाँच-पड़ताल अधिक पारदर्शी तरीके से होगी। यह निर्णय सरकार की 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' नीति के अनुरूप है।
जीएसटी रिफंड प्रक्रिया में क्या बदलाव किए गए हैं?
अब रिफंड स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। 90 प्रतिशत रिफंड 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी किए जाएंगे, जिससे व्यवसायों की कार्यशील पूँजी पर दबाव कम होगा।
यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी घटाने का प्रस्ताव क्या है?
परिषद ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर विचार किया है। यह प्रस्ताव अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है, क्योंकि अधिकांश राज्यों ने 18 प्रतिशत की मौजूदा दर पर चिंता जताई और सहमति बनाना बाकी है।
ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण में क्या बदलाव आया है?
अब छोटे विक्रेता ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिये बिना हर राज्य में व्यापारिक स्थान बनाए सामान बेच सकेंगे। वित्त मंत्री के अनुसार, यह सुविधा छोटे व्यापारियों को डिजिटल बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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