जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त, मुकदमे की सीमा ₹5 करोड़ हुई
सारांश
मुख्य बातें
जीएसटी परिषद ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 57वीं बैठक में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति को समाप्त कर दिया और मुकदमा चलाने की न्यूनतम सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में इन निर्णयों की जानकारी दी।
मुख्य निर्णय और बदलाव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले वर्ष सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती पर ध्यान केंद्रित किया था, जबकि इस वर्ष परिषद का मुख्य लक्ष्य प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना है। परिषद ने पंजीकरण में सामान्य बदलावों को स्वतः स्वीकृति देने का निर्णय लिया है, जिससे व्यापारियों को बार-बार अनुमति लेने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।
सीतारमण ने कहा, “रिफंड प्रक्रिया तेज की जाएगी और स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी जाएगी। साथ ही, 90 प्रतिशत रिफंड 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे।”
ई-कॉमर्स विक्रेताओं को राहत
छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया अब अधिक सुलभ बनाई गई है। सीतारमण के अनुसार, अब छोटे व्यापारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिये बिना हर राज्य में व्यापारिक स्थान स्थापित किए सामान बेच सकेंगे। यह कदम एमएसएमई और लघु उद्यमियों के लिए डिजिटल बाज़ार तक पहुँच को सुगम बनाएगा।
गौरतलब है कि भारत में ई-कॉमर्स क्षेत्र तेज़ी से विस्तार कर रहा है और छोटे विक्रेताओं के लिए जटिल पंजीकरण प्रक्रियाएँ एक बड़ी बाधा रही हैं।
यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी का प्रस्ताव
परिषद ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर जीएसटी को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया। बैठक में अधिकांश राज्यों ने 18 प्रतिशत जीएसटी दर को लेकर चिंता व्यक्त की। नए यूपीआई फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के विशेष 'पर्सन-टू-मर्चेंट' लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर तय किया गया है।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 'पर्सन-टू-मर्चेंट' यूपीआई लेनदेन में से लगभग 96 प्रतिशत पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत का डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले बाज़ारों में शामिल है।
व्यापार जगत पर असर
कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त होने से व्यापारियों को अनावश्यक दबाव से राहत मिलने की उम्मीद है। मुकदमा चलाने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का निर्णय छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि पहले यह सीमा काफी कम थी और अनावश्यक मुकदमेबाज़ी को बढ़ावा देती थी।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' सूचकांक में भारत की रैंकिंग सुधारने पर ज़ोर दे रही है। रिफंड प्रक्रिया में तेज़ी आने से व्यवसायों की कार्यशील पूँजी की ज़रूरतें भी कम होंगी।
आगे की राह
परिषद के इन निर्णयों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किए जाने के बाद ये लागू होंगे। यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी दर में कटौती का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और राज्यों की सहमति के आधार पर इसका अंतिम स्वरूप तय होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सुधार जीएसटी के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।