जीएसटी सुधारों पर इंडस्ट्री की मुहर: पंजीकरण तेज होने और जुर्माना घटने से कारोबारियों में बढ़ेगा भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 9 अक्टूबर 2026 को उद्योग जगत ने जीएसटी परिषद के नए सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि ये बदलाव कारोबारी माहौल में विश्वास बहाल करने की दिशा में निर्णायक कदम हैं। पंजीकरण प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने के साथ-साथ जुर्माने में कटौती को व्यापार जगत ने दीर्घकालिक माँगों की पूर्ति बताया है।
जुर्माना कटौती और समावेशी ढाँचा
एंट्रप्रिन्योर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (EAI) के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा, 'जुर्माना कम करना लंबे समय से चली आ रही माँग थी, ताकि यह पक्का किया जा सके कि जीएसटी को सजा के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे समावेशी ढाँचे के तौर पर देखा जाए जो सभी को साथ लाता है।' उन्होंने इसे जीएसटी व्यवस्था और कारोबारी माहौल में भरोसा बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
ई-कॉमर्स कारोबारियों को राहत
अभिषेक कुमार ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स के जरिए काम करने वाले छोटे व्यवसायों के लिए जीएसटी पंजीकरण को सरल बनाना और उन्हें विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कार्यालय खोले बिना रजिस्ट्रेशन की सुविधा देना, बेहद महत्वपूर्ण कदम है। यह सुधार उन लाखों छोटे विक्रेताओं के लिए राहत लेकर आया है जो डिजिटल प्लेटफार्मों के जरिए अपना कारोबार चला रहे हैं।
एसएमई ग्रोथ फंड और टियर-3, टियर-4 शहर
केंद्र सरकार द्वारा ₹10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड (SGF) की स्थापना पर अभिषेक कुमार ने कहा कि इस फंड को केवल मेट्रो शहरों तक सीमित न रखकर टियर-3 और टियर-4 शहरों तक पहुँचाना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि यह फंड छोटे एसएमई को अपना दायरा बढ़ाने, विस्तार करने और निर्यात स्तर की वृद्धि हासिल करने में मदद करेगा। उन्होंने इस मंज़ूरी के लिए प्रधानमंत्री का आभार भी जताया।
बादली इंडस्ट्रियल एस्टेट का आकलन
बादली इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि सूद ने कहा कि जीएसटी परिषद ने उद्योगों — विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) — को बढ़ावा देने के लिए जो उपाय किए हैं, वे प्रशंसनीय हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस नीति को आगे भी जारी रखेगी, जिससे और अधिक उदारीकरण होगा तथा उपभोक्ताओं और व्यापारियों, दोनों का भरोसा बढ़ेगा।
विकसित भारत की राह
रवि सूद ने यह भी कहा कि भारतीय कारोबारियों में वैश्विक नेतृत्व की क्षमता है। उनके अनुसार, यदि सरकार इसी प्रकार उद्योगों का साथ देती रही, तो 2047 से पहले ही 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करना असंभव नहीं होगा। यह ऐसे समय में आया है जब एमएसएमई क्षेत्र वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश में लगा है।