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जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: पीएचडीसीसीआई ने फैसलों का स्वागत किया, एमएसएमई और निर्यातकों को राहत

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जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: पीएचडीसीसीआई ने फैसलों का स्वागत किया, एमएसएमई और निर्यातकों को राहत

सारांश

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक ने टैक्स स्लैब से परे जाकर प्रणाली को सरल बनाने पर ध्यान दिया — अभियोजन सीमा ₹5 करोड़, रिफंड 10 दिन, आईटीसी का विस्तार। पीएचडीसीसीआई ने स्वागत किया, लेकिन बोनाफाइड खरीदारों की सुरक्षा समेत लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय की माँग भी रखी।

मुख्य बातें

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त और अभियोजन सीमा ₹5 करोड़ की गई।
रिफंड दावे स्वीकार करने की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन ; भुगतान तीन कार्य दिवसों में।
जोखिम मूल्यांकन के आधार पर रिफंड का 90% स्वचालित रूप से मंजूर होगा।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा बढ़ा — कर्मचारी बीमा, दूरसंचार टावर, पाइपलाइन और फ्री सैंपल शामिल।
पीएचडीसीसीआई ने फैसलों का स्वागत करते हुए बोनाफाइड खरीदारों की सुरक्षा समेत लंबित मुद्दों पर शीघ्र निर्णय की माँग की।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक के फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि परिषद ने टैक्स स्लैब बदलने की बजाय प्रणाली को सरल और व्यवसाय अनुकूल बनाने को प्राथमिकता दी, जिससे विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र को सीधी राहत मिलेगी। संगठन ने साथ ही यह भी रेखांकित किया कि व्यापार जगत द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण लंबित मुद्दों पर अभी निर्णय होना बाकी है।

बैठक के प्रमुख फैसले

पीएचडीसीसीआई के अनुसार, इस बैठक में लिए गए निर्णय करदाताओं पर अनुपालन का बोझ कम करने और अनावश्यक कार्रवाई के भय को घटाने की दिशा में उठाए गए ठोस कदम हैं। चैंबर ने कहा कि गिरफ्तारी के अधिकार को समाप्त करना, अभियोजन की सीमा बढ़ाकर ₹5 करोड़ करना और दंडात्मक प्रावधानों में कमी करना — ये तीनों बदलाव मिलकर यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि ईमानदार करदाताओं को अपराधियों की तरह नहीं देखा जाएगा।

गौरतलब है कि कारोबारी संगठन लंबे समय से जीएसटी की दंडात्मक धाराओं को अत्यधिक कठोर बताते हुए सुधार की माँग कर रहे थे। इस दृष्टि से यह बैठक भरोसे पर आधारित कर व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है।

रिफंड प्रक्रिया में बड़ा सुधार

परिषद ने रिफंड प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं। अब रिफंड दावों को स्वीकार करने की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। इसके अलावा, जोखिम मूल्यांकन (रिस्क असेसमेंट) के आधार पर प्रणाली स्वचालित रूप से रिफंड दावे का 90 प्रतिशत हिस्सा मंजूर करेगी।

रिफंड आदेश जारी होने के बाद भुगतान की समय सीमा भी घटाकर तीन कार्य दिवस कर दी गई है। पीएचडीसीसीआई का मानना है कि इससे उद्योगों — विशेष रूप से निर्यातकों — को कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार

जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दायरे को भी बढ़ाया है। अब कर्मचारियों के लिए ली गई हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सेवाओं पर आईटीसी का लाभ मिलेगा। साथ ही, फैक्ट्री परिसरों के बाहर लगाए गए दूरसंचार टावरों और पाइपलाइनों पर भी आईटीसी लागू होगा।

इसके अतिरिक्त, फ्री सैंपल और एक्सपायरी के कारण राइट ऑफ किए गए स्टॉक पर भी कुछ निर्धारित शर्तों के साथ आईटीसी की अनुमति दी गई है। चैंबर ने इन फैसलों को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की दिशा में सार्थक कदम बताया।

लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय की माँग

हालांकि, पीएचडीसीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि बोनाफाइड खरीदारों की सुरक्षा सहित व्यापार और उद्योग जगत द्वारा लंबे समय से उठाए जा रहे कई मुद्दे अभी भी अनिर्णीत हैं। चैंबर ने जीएसटी परिषद से आग्रह किया है कि इन चिंताओं पर शीघ्र विचार किया जाए ताकि कर प्रणाली और अधिक पारदर्शी व व्यवसाय अनुकूल बन सके।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में निवेश माहौल को मजबूत करने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पीएचडीसीसीआई के अनुसार, परिषद के ये फैसले सही दिशा में हैं, लेकिन व्यापक सुधारों के लिए आगे और निर्णयों की दरकार होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — क्योंकि रिफंड की समय सीमाएँ पहले भी तय थीं, पर जमीनी हकीकत अलग रही। अभियोजन सीमा बढ़ाना और दंडात्मक प्रावधानों में कमी सही कदम है, लेकिन जब तक फील्ड अधिकारियों के विवेकाधीन अधिकारों पर अंकुश नहीं लगता, करदाताओं का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं होगा। बोनाफाइड खरीदारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर निर्णय टालना उद्योग जगत को अधूरा संदेश देता है — सुधार की दिशा तय है, पर गति और गहराई अभी और चाहिए।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कौन से प्रमुख फैसले लिए गए?
57वीं बैठक में गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त करना, अभियोजन सीमा बढ़ाकर ₹5 करोड़ करना, रिफंड की समय सीमा 10 दिन करना और आईटीसी के दायरे का विस्तार करना शामिल हैं। ये फैसले करदाताओं पर अनुपालन बोझ कम करने और प्रणाली को व्यवसाय अनुकूल बनाने के उद्देश्य से लिए गए हैं।
जीएसटी रिफंड प्रक्रिया में क्या बदलाव हुआ है?
अब रिफंड दावे स्वीकार करने की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। जोखिम मूल्यांकन के आधार पर प्रणाली स्वचालित रूप से 90% रिफंड मंजूर करेगी और आदेश जारी होने के बाद भुगतान तीन कार्य दिवसों में होगा।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा कैसे बढ़ा है?
अब कर्मचारियों की हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, फैक्ट्री परिसर के बाहर लगे दूरसंचार टावरों और पाइपलाइनों पर आईटीसी मिलेगी। फ्री सैंपल और एक्सपायरी के कारण राइट ऑफ स्टॉक पर भी निर्धारित शर्तों के साथ आईटीसी की अनुमति दी गई है।
पीएचडीसीसीआई ने किन लंबित मुद्दों पर चिंता जताई है?
पीएचडीसीसीआई ने कहा है कि बोनाफाइड खरीदारों की सुरक्षा सहित व्यापार और उद्योग जगत के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी निर्णय नहीं हुआ। चैंबर ने जीएसटी परिषद से आग्रह किया है कि इन चिंताओं पर शीघ्र विचार किया जाए।
इन फैसलों से एमएसएमई और निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
एमएसएमई को दंडात्मक प्रावधानों में कमी और अनुपालन सरलीकरण से सीधी राहत मिलेगी। निर्यातकों के लिए रिफंड प्रक्रिया तेज होने से कार्यशील पूंजी की उपलब्धता में सुधार होगा, जो उनकी नकदी प्रवाह की समस्या को कम करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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