8 अक्टूबर 2026
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जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: रिफंड क्लेम अब 10 दिन में होगा स्वीकार, आईटीसी के दायरे में बड़ा विस्तार

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जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: रिफंड क्लेम अब 10 दिन में होगा स्वीकार, आईटीसी के दायरे में बड़ा विस्तार

सारांश

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में रिफंड क्लेम की मंजूरी अवधि 15 से घटाकर 10 दिन, 90% क्लेम सिस्टम-आधारित मंजूरी, और आईटीसी का विस्तार — ये तीन बदलाव मिलकर निर्यातकों और व्यवसायों के लिए नकदी प्रवाह की बाधाएँ काफी हद तक दूर कर सकते हैं।

मुख्य बातें

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुई।
रिफंड क्लेम स्वीकार करने की अवधि 15 दिनों से घटाकर 10 दिन की गई; समय-सीमा में कार्रवाई न होने पर क्लेम स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।
सिस्टम-आधारित रिस्क असेसमेंट से क्लेम का 90% स्वचालित रूप से मंजूर होगा; रिफंड ऑर्डर जारी करने की सीमा 7 दिन से घटाकर 3 कार्यदिवस की गई।
कर्मचारियों के हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस , टेलीकम्युनिकेशन टावर/पाइपलाइन और अनिवार्य रूप से नष्ट किए गए स्टॉक पर अब आईटीसी मिलेगा।
एजेंट के ज़रिए बुक ₹7,500 प्रति रात तक की होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट और यात्री परिवहन सेवाओं पर दोहरा कर समाप्त।
रिफंड दावों में से लगभग 65% निर्यातकों या इनवर्टेड रेट्स से जुड़े हैं — नई व्यवस्था से उन्हें सर्वाधिक लाभ मिलने की उम्मीद।

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कई अहम फैसले लिए गए, जिनसे देश में व्यापार सुगमता को नई गति मिलने की उम्मीद है। रिफंड क्लेम स्वीकार करने की अवधि को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन करना और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दायरे में उल्लेखनीय विस्तार इन फैसलों के केंद्र में हैं। ये बदलाव विशेष रूप से निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत काम करने वाले व्यवसायों के लिए राहत लेकर आए हैं।

रिफंड प्रक्रिया में बड़े बदलाव

परिषद के नए प्रावधान के अनुसार, यदि 10 दिनों के भीतर रिफंड क्लेम न तो स्वीकार किया जाता है और न ही उसमें किसी कमी की सूचना जारी की जाती है, तो क्लेम को स्वतः स्वीकृत माना जाएगा। यह कदम करदाताओं के लिए लंबे इंतज़ार की समस्या को काफी हद तक कम करेगा।

इसके अतिरिक्त, किसी अधिकारी के निर्णय पर निर्भर रहने के बजाय अब सिस्टम-आधारित रिस्क असेसमेंट के ज़रिए क्लेम का 90 प्रतिशत हिस्सा स्वचालित रूप से मंजूर किया जाएगा। रिफंड ऑर्डर जारी करने की समय-सीमा भी सात कार्यदिवसों से घटाकर तीन कार्यदिवस कर दी गई है। कैश लेजर में मौजूद अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड अब पूर्णतः स्वचालित होगा — इसमें किसी अधिकारी के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं रहेगी।

किसे मिलेगा सबसे अधिक फायदा

आँकड़ों के अनुसार, रिफंड के कुल दावों में से लगभग 65 प्रतिशत निर्यातकों या इनवर्टेड रेट्स से जुड़े होते हैं, जबकि 19 प्रतिशत दावे कैश लेजर में पहले से उपलब्ध बैलेंस से संबंधित होते हैं। इस पृष्ठभूमि में नई स्वचालित प्रणाली निर्यात क्षेत्र की कार्यशील पूंजी को सीधे लाभ पहुँचाएगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितता के बीच भारतीय निर्यातक नकदी प्रवाह की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

आईटीसी के दायरे में विस्तार

परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट के दायरे को भी व्यापक बनाया है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर आईटीसी मिलेगा। इसके साथ ही फैक्ट्रियों के बाहर स्थापित टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर भी क्रेडिट उपलब्ध होगा।

फ्री सैंपल और एक्सपायरी के कारण राइट-ऑफ किए गए स्टॉक पर भी आईटीसी का लाभ दिया जाएगा, बशर्ते कानून के तहत उन वस्तुओं को नष्ट करना अनिवार्य हो। यह प्रावधान विशेष रूप से फार्मा और एफएमसीजी क्षेत्र के व्यवसायों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

बी2बी सेवाओं पर दोहरे कराधान का समाधान

सरकार ने कुछ बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) सेवा श्रृंखलाओं में दोहरे कर से बचाव के लिए भी प्रभावी कदम उठाए हैं। एजेंट के माध्यम से बुक की गई ₹7,500 प्रति रात तक की होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट एवं कैटरिंग सेवाएँ, और यात्री परिवहन जैसी सेवाओं पर अब दो बार की बजाय केवल एक बार टैक्स लगेगा। यह निर्णय हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल उद्योग के लिए अनुपालन बोझ को कम करेगा।

आगे की राह

जीएसटी परिषद के इन फैसलों को व्यापार जगत ने स्वागत योग्य बताया है। ये बदलाव प्रक्रियागत सुधार की दिशा में एक ठोस कदम हैं, हालाँकि इनके व्यावहारिक क्रियान्वयन और तकनीकी अवसंरचना की तैयारी पर सबकी नज़र रहेगी। इन सुधारों की अधिसूचना और लागू होने की तिथि आने वाले दिनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तकनीकी अवसंरचना की होगी, जो पहले भी जीएसटी पोर्टल की खामियों के चलते करदाताओं को परेशान कर चुकी है। आईटीसी का विस्तार स्वागत योग्य है, पर इसकी वास्तविक उपयोगिता तब स्पष्ट होगी जब विभागीय ऑडिट में इन नई श्रेणियों पर कोई विवाद न उठे। बी2बी सेवाओं पर दोहरे कर का समाधान हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की पुरानी माँग थी — देर से सही, यह कदम उद्योग का अनुपालन बोझ घटाएगा।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में रिफंड प्रक्रिया में क्या बदलाव हुए?
रिफंड क्लेम स्वीकार करने की अवधि 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। यदि इस अवधि में न तो क्लेम स्वीकार हो और न ही कमी की सूचना जारी हो, तो क्लेम स्वतः स्वीकृत माना जाएगा। इसके अलावा, रिफंड ऑर्डर जारी करने की समय-सीमा भी 7 दिन से घटाकर 3 कार्यदिवस की गई है।
आईटीसी के दायरे में किन नई श्रेणियों को शामिल किया गया है?
अब कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, फैक्ट्रियों के बाहर लगे टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन, तथा कानूनी रूप से अनिवार्य रूप से नष्ट किए गए स्टॉक (जैसे फ्री सैंपल और एक्सपायर्ड माल) पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा। ये बदलाव विशेष रूप से फार्मा, एफएमसीजी और दूरसंचार क्षेत्र के लिए लाभकारी हैं।
इन बदलावों से निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
रिफंड के कुल दावों में से लगभग 65% निर्यातकों या इनवर्टेड रेट स्ट्रक्चर से जुड़े होते हैं। स्वचालित और तेज़ रिफंड प्रक्रिया से निर्यातकों की कार्यशील पूंजी जल्दी मुक्त होगी, जिससे उनके नकदी प्रवाह में सुधार आएगा।
बी2बी सेवाओं पर दोहरे कर की समस्या कैसे हल की गई?
एजेंट के माध्यम से बुक की गई ₹7,500 प्रति रात तक की होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट एवं कैटरिंग सेवाएँ और यात्री परिवहन जैसी बी2बी सेवाओं पर अब केवल एक बार जीएसटी लगेगा। इससे हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल उद्योग को अनुपालन में बड़ी राहत मिलेगी।
कैश लेजर के अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड अब कैसे काम करेगा?
कैश लेजर में मौजूद अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड अब पूर्णतः स्वचालित होगा — इसमें किसी कर अधिकारी के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी। सिस्टम-आधारित रिस्क असेसमेंट के ज़रिए क्लेम का 90% हिस्सा स्वयं मंजूर हो जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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