जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: मोदी ने सुधारों का किया स्वागत, गिरफ्तारी शक्तियाँ हटेंगी, अभियोजन सीमा ₹5 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर 2026 को जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में मंजूर किए गए सुधारों का स्वागत किया और कहा कि ये निर्णय कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और व्यवसाय-अनुकूल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि पूरा जोर जीएसटी के रोज़मर्रा के संचालन को सरल बनाने पर रहा।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि जीएसटी परिषद की सिफारिशों में गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों को हटाना, अधिक अपराधों को गैर-आपराधिक श्रेणी में लाना और प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस तेज़ निर्णय प्रक्रिया, कम अनुपालन लागत, स्वचालित रिफंड और भरोसे पर आधारित प्रशासनिक व्यवस्था पर है। यह पोस्ट उनकी उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है जो 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को केंद्र सरकार की आर्थिक नीति का आधार मानती है।
पंजीकरण और रिफंड में बड़े बदलाव
बैठक में जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक स्वचालित बनाने का निर्णय लिया गया। कम जोखिम वाले आवेदनों को तीन कार्य दिवस के भीतर स्वतः मंजूरी देने का प्रस्ताव है, जबकि संशोधन आवेदनों और निलंबित पंजीकरणों की बहाली की प्रक्रिया को भी सुगम किया जाएगा।
रिफंड की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। रिफंड आवेदन स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। लगभग 90 प्रतिशत रिफंड दावे अब सिस्टम-आधारित जोखिम मूल्यांकन के ज़रिये मंजूर होंगे और कैश लेजर में उपलब्ध राशि का रिफंड पूरी तरह स्वचालित किया जाएगा, जिससे अधिकारियों के हस्तक्षेप की ज़रूरत घटेगी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार
परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दायरा बढ़ाते हुए पात्र मामलों में कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर चुकाए गए जीएसटी को शामिल किया है। इसके अलावा फैक्ट्री परिसरों के बाहर लगे टेलीकॉम टावरों और पाइपलाइनों, फ्री सैंपल तथा कुछ परिस्थितियों में नष्ट किए जाने वाले एक्सपायर्ड स्टॉक पर भी ITC राहत देने का निर्णय किया गया है।
प्रवर्तन और दंड प्रावधानों में राहत
जीएसटी प्रवर्तन के मोर्चे पर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियाँ समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। अभियोजन शुरू करने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है। सामान्य मामलों में जुर्माना ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 किया गया है, और ₹10,000 या उससे कम राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं किए जाएँगे — ऐसे लंबित मामले भी वापस लिए जाएँगे। गौरतलब है कि यह कदम तब आया है जब एमएसएमई क्षेत्र लंबे समय से जीएसटी नोटिसों के बोझ को लेकर शिकायत करता रहा है।
उद्योग जगत और आगे की राह
उद्योग संगठनों का मानना है कि इन सुधारों से एमएसएमई और निर्यातकों को सबसे अधिक राहत मिलेगी, क्योंकि उनकी कार्यशील पूंजी पर अनुपालन का बोझ अपेक्षाकृत अधिक होता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीएसटी परिषद अब कर दरों में बदलाव पर साल में एक बार विचार करेगी, जिससे व्यवसायों को नीतिगत स्थिरता और पूर्वानुमान की सुविधा मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांकों में अपनी रैंकिंग सुधारने के लिए व्यापार सुगमता पर ज़ोर दे रहा है।