जीएसटी के अगले चरण के सुधार: PM मोदी बोले — अनुपालन होगा आसान, रिफंड प्रक्रिया होगी तेज
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों का अगला चरण व्यापारियों और उद्यमियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को उल्लेखनीय रूप से सरल बनाएगा और रिफंड व्यवस्था को कहीं अधिक त्वरित करेगा। उन्होंने कहा कि ये सुधार उद्योग जगत का भरोसा सुदृढ़ करेंगे, नए निवेश का मार्ग प्रशस्त करेंगे और 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक लक्ष्य को ठोस आधार देंगे।
सुधारों की रूपरेखा
प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस विस्तृत लेख के संदर्भ में की, जिसमें नेक्स्ट-जेन जीएसटी सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। मोदी ने रेखांकित किया कि नई पीढ़ी के ये सुधार कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसका सीधा लाभ व्यवसायों और आम परिवारों दोनों को मिलेगा।
वित्त मंत्री सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने लेख के हवाले से बताया कि नेक्स्ट-जेन जीएसटी करदाताओं को राहत देने और आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करने — दोनों उद्देश्यों को एक साथ साधने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी सुधारों का मुख्य ज़ोर रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, विवाद निपटान और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर होगा।
जीएसटी परिषद बैठक से पहले की हलचल
7 अक्टूबर 2026 को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक से ठीक पहले सीतारमण ने अपने लेख में कहा कि प्रस्तावित प्रक्रियागत सुधारों का उद्देश्य करदाताओं के लिए अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को घटाना है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि कारोबारी वर्ग को कम कागजी कार्रवाई और अधिक सुविधा मिले।
यह ऐसे समय में आया है जब सितंबर 2025 में लागू की गई दर युक्तिकरण प्रक्रिया के बाद जीएसटी संग्रह और कर योग्य आपूर्ति के आँकड़ों में सुधार दर्ज किया गया है। सरकार का मानना है कि जीएसटी ने राजस्व को मज़बूत करने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गिरफ्तारी प्रावधान हटाने पर विचार
सूत्रों के अनुसार, आगामी जीएसटी परिषद बैठक में एक अहम कानूनी प्रश्न पर चर्चा हो सकती है — क्या सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत जाँच के दौरान कर अधिकारियों को प्राप्त करदाताओं की गिरफ्तारी का अधिकार हटाया जाए या नहीं।
यह सुझाव जीएसटी परिषद की लॉ कमेटी ने जीएसटी कानूनों के अपराधमुक्तिकरण के व्यापक प्रस्तावों के हिस्से के रूप में दिया है। कमेटी का तर्क है कि कई मामलों में कर भुगतान में चूक जानबूझकर नहीं होती, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में गिरफ्तारी जैसे कठोर कदम अनुपातहीन हो सकते हैं। गौरतलब है कि लॉ कमेटी में केंद्र और राज्य दोनों के अधिकारी शामिल होते हैं।
गंभीर धोखाधड़ी पर वैकल्पिक रास्ता
प्रस्तावित सोच के अनुसार, फर्जी चालान, फर्जी ITC और फर्जी रिफंड दावों जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) सहित सामान्य आपराधिक कानूनों के ज़रिये की जा सकती है। इस बदलाव से ईमानदार करदाताओं के लिए कारोबारी माहौल अधिक सहज और भरोसेमंद बन सकता है।
आने वाले हफ्तों में जीएसटी परिषद के निर्णय और केंद्र व राज्यों के बीच सहमति की तस्वीर यह तय करेगी कि ये सुधार कब और किस रूप में ज़मीन पर उतरेंगे।