57वीं जीएसटी परिषद बैठक आज नई दिल्ली में, रजिस्ट्रेशन-रिफंड और ITC सुधारों पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद (GST Council) की 57वीं बैठक 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हो रही है। केंद्र और सभी राज्यों के प्रतिनिधियों की भागीदारी वाली यह बैठक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के अगले चरण के सुधारों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि यह बैठक पहले बुधवार को प्रस्तावित थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों से इसे एक दिन के लिए स्थगित कर गुरुवार को निर्धारित किया गया।
मुख्य एजेंडा: क्या-क्या होगी चर्चा
सूत्रों और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, परिषद की इस बैठक में जीएसटी अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से कई प्रक्रियागत सुधारों पर विचार-विमर्श हो सकता है। इनमें रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड प्रक्रिया, विवाद निपटान व्यवस्था और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े नियमों को सरल करने के प्रस्ताव प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इन सुधारों का मूल उद्देश्य करदाताओं और व्यवसायों के लिए अनुपालन में लगने वाले समय एवं लागत को घटाना है। साथ ही, कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है।
लॉ कमेटी की सिफारिशें भी एजेंडे पर
बताया जा रहा है कि परिषद जीएसटी लॉ कमेटी की उन सिफारिशों पर भी विचार करेगी, जो जीएसटी कानूनों को सरल बनाने से संबंधित हैं। समिति ने जानबूझकर की गई कर चोरी और अनजाने में हुई कर भुगतान की कमी या देरी के मामलों में स्पष्ट अंतर करने की सिफारिश की है।
वर्तमान सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत आयुक्त को कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी की अनुमति देने का अधिकार है — विशेष रूप से जब धारा 132 के अंतर्गत निर्दिष्ट गंभीर अपराधों, जैसे कर चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामले सामने आते हैं। लॉ कमेटी की सिफारिशें इसी अंतर को कानूनी रूप से स्पष्ट करने की ओर इशारा करती हैं।
ई-कॉमर्स और लघु व्यवसायों पर विशेष ध्यान
बैठक में ई-कॉमर्स कारोबारियों और छोटे व्यवसायों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने के उपायों पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में डिजिटल और एमएसएमई क्षेत्र में नए उद्यमियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, और जीएसटी अनुपालन की जटिलता इनके लिए प्रमुख बाधा बनी हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में कह चुके हैं कि जीएसटी सुधारों का अगला चरण अनुपालन को और अधिक सरल बनाएगा तथा रिफंड प्रक्रिया में सुधार करेगा, जिससे उद्योगों को निवेश और विस्तार के लिए अधिक भरोसा मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी पहले स्पष्ट कर चुकी हैं कि अगले चरण के जीएसटी सुधारों का मुख्य फोकस रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, विवाद समाधान और ITC से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा।
गौरतलब है कि यह बैठक पहले 12 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। दो बार टलने के बाद अब यह बैठक हो रही है, इसलिए कारोबारी जगत और कर विशेषज्ञों की इस पर विशेष नजर है।
आम जनता और कारोबार पर असर
यदि प्रस्तावित सुधारों को परिषद की मंजूरी मिलती है, तो देश के लाखों छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए जीएसटी अनुपालन की राह आसान हो सकती है। ITC नियमों में सरलता से निर्यातकों और विनिर्माताओं को पूँजी का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। आने वाले हफ्तों में परिषद के निर्णयों का क्रियान्वयन भारत के कारोबारी परिवेश के लिए अहम परीक्षण होगा।